रांची विश्वविद्यालय 109 करोड़ घोटाला मामला : राज्यपाल ने कुलपति पर दिया जांच का आदेश

रांची। रांची विवि में पिछले कुछ समय में 109 करोड़ को घोटाले को लेकर विवाद खड़ा हुआ है। इस पर राजभवन गंभीर है। इसे लेकर बुधवार को राज्यपाल रमेश बैस ने रांची विश्वविद्यालय के कुलपति को इस पूरे मामले की जांच के लिए तथा अन्य जरूरी निर्देश दिए। कहा की अनियमितताओं से संबंधित तथ्यों की गंभीरता पूर्वक समीक्षा करें। 109 करोड़ की संचिका खो जाने के मामले में दोषी पदाधिकारियों /कर्मियों के विरुद्ध अबिलंब प्राथमिकी दर्ज करें।
राज्यपाल सह झारखंड राज्य विश्वविद्यालयों के कुलाधिपति रमेश बैस के समक्ष कुलपति, रांची विश्वविद्यालय, डॉक्टर अजीत कुमार सिन्हा ने तत्कालीन प्रभारी कुलपति, रांची विश्वविद्यालय, डॉक्टर कामिनी कुमार कार्यकाल में बरती गई विभिन्न अनियमितताओं के संबंध में ध्यान आकृष्ट कराया। इस पर कुलपति कार्यालय द्वारा समीक्षा की गई। समीक्षा के बाद कुछ बिंदुओं पर प्रथम दृष्टया दोषी पाया गया। गौरतलब है कि इस मामले पर राज्यपाल ने तटस्थ जांच के लिए डॉक्टर कामिनी कुमार को प्रशासनिक दृष्टिकोण से रांची विश्वविद्यालय से प्रति कुलपति, कोल्हन विश्वविद्यालय चाईबासा में स्थानांतरित कर दिया गया था।
इन बिंदुओं पर 15 दिनों के अंदर करनी है जांच
राज्यपाल ने 15 बिंदुओं पर डॉ कामिनी कुमार के संबंध में जांच कर स्पष्टीकरण देने को कहा है। वो बिंदु इस प्रकार हैं-
तत्कालीन कार्यवाहक कुलपति, रांची विश्वविद्यालय, रांची के पद पर रहते हुए वर्ग तृतीय एवं चतुर्थ श्रेणी के 36 कर्मियों को 18.12.2021 को नियमित कर दिया गया। उक्त कार्य को किस आधार पर किया गया, यह स्पष्ट नहीं है. कार्यवाहक कुलपति को यह शक्तियां प्राप्त नहीं थीं।
प्राचार्य, रांची महिला महाविद्यालय से अवैध तरीके से भुगतान किये गये आवास भत्ते के वसूली के लिए 06.04.2022 को कुलाधिपति कार्यालय द्वारा आदेश दिया गया था. उक्त आदेश का अनुपालन नहीं किया गया।
रांची विश्वविद्यालय, रांची में 109 करोड़ रुपये की राशि की वित्तीय अनियमितता के संबंध में निदेशक, उच्च शिक्षा द्वारा 28.06.2021 को जांच प्रतिवेदन के साथ कार्रवाई के लिए राज्यपाल सचिवालय को प्रेषित किया गया था। 02.06.2022 को इस कार्यालय द्वारा तत्कालीन कुलपति, वित्तीय सलाहकार, वित्त पदाधिकारी एवं कुलसचिव के विरुद्ध आरोप पत्र गठित करने के लिए निर्देशित किया गया था। उक्त विषयक संचिका कुलपति कार्यालय में उपलब्ध नहीं होने की सूचना वर्तमान कुलपति द्वारा राज्यपाल सचिवालय को दी गयी है। विश्वविद्यालय के संचिका के नोट-शीट से यह स्पष्ट होता है कि यह सम्पूर्ण विषय कुलपति की पूर्ण जानकारी में था, किन्तु कोई कार्रवाई नहीं की गई, जबकि डॉ कामिनी कुमार कुलपति के प्रभार में थीं।
डॉ० गौरी जिलानी की सेवा नियमितीकरण के प्रस्ताव पर प्रतिकुलपति-सह-स्क्रीनिंग समिति की अध्यक्ष के तौर पर दो माह में दो सम्पूर्ण विरोधाभासी तथ्य प्रेषित किये गये, जिस कारण निर्णय लेने में दुविधा की स्थिति उत्पन्न हुई। इस संबंध में भी स्थिति स्पष्ट करने के लिए निर्देश दिया गया।
20.06.2022 को नये कुलपति की नियुक्ति की अधिसूचना जारी होने के पश्चात डॉ. कामिनी कुमार के द्वारा तत्कालीन कार्यवाहक कुलपति के तौर पर स्वयं हस्ताक्षर करते हुए एक एमओयू विज्ञान प्रसार संस्थान के साथ किया गया। सामान्यतः विश्वविद्यालय के तरफ से यह कार्य कुलसचिव द्वारा किया जाता है, जो इस आशय में स्वतः कुलपति के तौर पर डॉ० कामिनी कुमार के द्वारा किया गया।











