झारखंड गठबंधन में महासंग्राम :जब हम बोलना शुरूकरेंगे तो ठीक नहीं होगा.. राजद और कांग्रेस के नेता को JMM ने बताया धूर्त और चालबाज.. वहीं राजद ने की बड़बोले मंत्री पर कारवाई की मांग

झारखंड ब्रेकिंग: झारखंड में सबकुछ ठीकठाक नहीं हैं… ये बढ़त अब खुलकर सामने आ रही है जब पार्टी के नेता एक दूसरे पर आरोप प्रत्यारोप लगाते नजर आए।मतलब साफ है कि जिसतरह से बयानबाजी जारी है उससे साफ पता चलता है कि अंदरखाने में सबकुछ ठीक नहीं है।

महागठबंधन में बढ़ रही दूरी

बिहार विधानसभा चुनाव 2025 को लेकर झारखंड की सत्ताधारी महागठबंधन के दलों के बीच दरार लगातार बढ़ती जा रही है. झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) लगातार राष्ट्रीय जनता दल और कांग्रेस के नेताओं को धूर्त और चालबाज बता रहा है और जल्द समीक्षा की बात कर रहा है, अब राजद भी मुखर होने लगा है. वहीं घाटशिला उपचुनाव को लेकर भी कई तरह के कयास लगाए जा रहे हैं.

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जनता को जल्द मिलेगा जवाब

बिहार विधानसभा चुनाव में झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) की हिस्सेदारी न मिलने के बाद, झारखंड में सत्तारूढ़ गठबंधन में दरार पड़ती दिख रही है. झामुमो नेता बिहार विधानसभा चुनाव के बाद गठबंधन की समीक्षा की बार-बार मांग कर रहे हैं. जब झामुमो के केंद्रीय प्रवक्ता मनोज पांडे से पूछा गया कि समीक्षा में देरी क्यों हो रही है, तो उन्होंने जवाब दिया कि राज्य की जनता के सभी सवालों के जवाब जल्द ही मिल जाएंगे. उन्होंने आगे कहा कि घाटशिला में कोई मुकाबला नहीं है. हम इस बार पिछले चुनाव से भी बड़े अंतर से जीत दर्ज करेंगे.

राजद प्रदेश सचिव ने कहा

राजद के प्रदेश सचिव रामकुमार यादव ने “प्रसाद के लिए मंदिर नहीं तोड़ा जाता” वाली कहावत का हवाला देते हुए हेमंत सोरेन से मांग की है कि वे अपने बड़बोले और बयानबीर प्रवक्ता और मंत्री पर कार्रवाई करें, वरना जब हम बोलना शुरू करेंगे तो ठीक नहीं होगा. इशारों-इशारों में राष्ट्रीय जनता दल नेता यह कहने से भी नहीं चूके कि ‘घाटशिला’ में हमारे 16-17 हजार वोटर हैं. हर क्षेत्र में हमारा जनाधार है.

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राजद ने झामुमो को की थी पेशकश पर….

उनकी जानकारी के अनुसार, राष्ट्रीय जनता दल (राजद) ने कोई धोखाधड़ी नहीं की है.राजद ने बिहार चुनाव में झामुमो को सीटें देने की पेशकश की थी, लेकिन शर्त यह थी कि झामुमो नेता राजद के चुनाव चिन्ह पर चुनाव लड़ें, लेकिन झामुमो ने इनकार कर दिया.

राजद नेता ने कहा कि हमें धूर्त और चालबाज बताने वाले दल के नेता ने हमारे साथ विधानसभा चुनाव में क्या-क्या नहीं किया था? कांके रोड पर हमारे नेताओं से जो कहा गया, उसके बारे में बात करना शुरू कर दें, तो यह एक समस्या बन जाएगी.

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अब देखना ये होगा कि पार्टी के शीर्ष नेता क्या फैसला लेते है। इन सब के बीच विपक्षी पार्टी बीजेपी लगातार हमलावर है और हर आरोप का टीस हेमंत सरकार को दे रही है। घाटशिला उपचुनाव के बाद बड़े फैसले का इंतजार सभी को है।

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