धरती के नीचे छिपा है ब्रह्मांड के सबसे बड़े रहस्य का जवाब? वैज्ञानिकों को मिला ऐसा सुराग, जिसने बढ़ाई उम्मीद
Dark Matter: दशकों से जिस रहस्यमयी पदार्थ की तलाश में जुटे हैं वैज्ञानिक, उसका संकेत अब धरती के चुंबकीय क्षेत्र में मिलने की उम्मीद

नई दिल्ली: ब्रह्मांड के सबसे रहस्यमयी सवालों में से एक का जवाब शायद वैज्ञानिकों को आसमान में नहीं, बल्कि हमारी अपनी धरती से मिल सकता है। जिस डार्क मैटर को पकड़ने की कोशिश वैज्ञानिक दशकों से कर रहे हैं, उसकी तलाश में शोधकर्ताओं को एक नया रास्ता मिला है। वैज्ञानिकों ने धरती के चुंबकीय क्षेत्र, वायुमंडल और आयनमंडल को मिलाकर अल्ट्रालाइट डार्क मैटर के संभावित संकेत खोजने का तरीका विकसित किया है।
डार्क मैटर ऐसा रहस्यमयी पदार्थ है जिसे सीधे देखा नहीं जा सकता, लेकिन आकाशगंगाओं और पूरे ब्रह्मांड की संरचना पर इसके गुरुत्वीय प्रभाव दिखाई देते हैं। नए शोध में खासतौर पर दो संभावित कणों—एक्सियन (Axion) और डार्क फोटॉन (Dark Photon)—पर ध्यान दिया गया है। वैज्ञानिकों का मानना है कि अगर ये कण वास्तव में डार्क मैटर का हिस्सा हैं, तो इनके बेहद कमजोर संकेत धरती के आसपास मौजूद हो सकते हैं।
धरती का चुंबकीय क्षेत्र बनेगा ‘प्राकृतिक डिटेक्टर’?
वैज्ञानिकों के मुताबिक, एक्सियन धरती के वैश्विक चुंबकीय क्षेत्र के साथ संपर्क कर बेहद कमजोर विद्युतचुंबकीय संकेत पैदा कर सकते हैं। खास बात यह है कि धरती की सतह और आयनमंडल के बीच का क्षेत्र कुछ विशेष आवृत्तियों पर इन तरंगों को रोककर उन्हें मजबूत कर सकता है।
यानी धरती की यह प्राकृतिक व्यवस्था एक तरह की रेजोनेंस कैविटी की तरह काम कर सकती है, जो बेहद कमजोर संकेतों को पकड़ने में वैज्ञानिकों की मदद करे।
Progress of Theoretical and Experimental Physics में प्रकाशित नए शोध के अनुसार, एक्सियन से जुड़े संभावित संकेतों में धरती के प्राकृतिक शुमान रेजोनेंस से संबंधित प्रभाव दिखाई दे सकते हैं। शोधकर्ताओं के मॉडल में लगभग 3×10⁻¹⁴ इलेक्ट्रॉन-वोल्ट के एक्सियन द्रव्यमान पर चुंबकीय संकेत विशेष रूप से मजबूत होने की संभावना सामने आई है।
इतना ही नहीं, इस संकेत की ताकत और दिशा धरती पर स्थान के अनुसार बदल सकती है। मॉडल के अनुसार दक्षिण-पूर्व एशिया में इस प्रभाव को पकड़ने की संवेदनशीलता अधिक हो सकती है।
10 साल के चुंबकीय आंकड़ों में क्या मिला?
इस सिद्धांत को जांचने के लिए वैज्ञानिकों ने ब्रिटिश जियोलॉजिकल सर्वे की एस्कडेलमुइर वेधशाला से मिले चुंबकीय क्षेत्र के आंकड़ों का विश्लेषण किया। शोध में सितंबर 2012 से नवंबर 2022 तक के आंकड़ों को शामिल किया गया।
वैज्ञानिकों ने बेहद कम आवृत्ति वाले संकेतों पर खास नजर रखी, क्योंकि अगर एक्सियन से कोई संकेत पैदा होता है तो वह किसी निश्चित आवृत्ति पर बेहद संकरी और लगातार बनी रहने वाली लाइन के रूप में दिखाई दे सकता है।
विश्लेषण के दौरान शोधकर्ताओं को 65 लगातार बने संकेतों के उम्मीदवार मिले, जिनका सिग्नल-टू-नॉइज अनुपात 3 से अधिक था। हालांकि, वैज्ञानिकों ने साफ किया कि इनमें से किसी भी संकेत को अभी डार्क मैटर की पुष्टि नहीं माना जा सकता।
फिर भी अध्ययन से एक्सियन-फोटॉन संपर्क की सीमा को पहले की तुलना में काफी बेहतर तरीके से निर्धारित करने में मदद मिली है।
डार्क फोटॉन ने भी बढ़ाई वैज्ञानिकों की उत्सुकता
डार्क फोटॉन भी इस खोज का एक अहम हिस्सा हैं। हालांकि, इनके संभावित संकेतों के लिए धरती का चुंबकीय क्षेत्र एक्सियन की तरह जरूरी नहीं है। यही वजह है कि डार्क फोटॉन से जुड़े संभावित संकेतों का भौगोलिक पैटर्न अलग हो सकता है।
शोध में धरती के चुंबकीय क्षेत्र के आंकड़ों की मदद से डार्क फोटॉन के लिए भी सीमाएं तय की गईं। कुछ द्रव्यमान क्षेत्रों में वैज्ञानिकों को पुराने जमीनी अध्ययनों की तुलना में बेहतर परिणाम मिले हैं।
लेकिन अभी तक डार्क मैटर की खोज की पुष्टि नहीं हुई है।
अब अलग-अलग देशों के आंकड़ों पर होगी नजर
वैज्ञानिकों के लिए अगला बड़ा कदम धरती के अलग-अलग हिस्सों में मौजूद चुंबकीय वेधशालाओं के आंकड़ों की तुलना करना होगा।
अगर भविष्य में कोई ऐसा संकेत मिलता है जो वास्तव में डार्क मैटर से जुड़ा है, तो वह धरती के अलग-अलग हिस्सों में उसी भौगोलिक पैटर्न में दिखाई देना चाहिए जिसकी भविष्यवाणी वैज्ञानिकों के मॉडल करते हैं।












