झारखंड में 15 दिसंबर से शुरू हो सकती है धान खरीदी, इस बार घटा दिया गया लक्ष्य! किसानों के लिए लागू होंगे ये नए नियम
खरीफ विपणन मौसम 2026-27 में 60 लाख की जगह 50 लाख क्विंटल धान खरीदने की तैयारी; ई-केवाईसी, जमीन सत्यापन और GPS ट्रैकिंग से होगी निगरानी, राइस मिलों को 15 अक्टूबर तक करना होगा निबंधन के लिए आवेदन।

रांची। झारखंड में धान की खेती करने वाले किसानों के लिए बड़ी खबर है। राज्य में खरीफ विपणन मौसम 2026-27 के तहत धान खरीदी की तैयारी तेज हो गई है। सरकार इस बार 15 दिसंबर से किसानों से धान खरीद शुरू करने की तैयारी कर रही है। हालांकि, पिछले साल के मुकाबले इस बार खरीद का लक्ष्य घटा दिया गया है। जहां वित्तीय वर्ष 2025-26 में 60 लाख क्विंटल धान खरीदने का लक्ष्य रखा गया था, वहीं इस बार इसे घटाकर 50 लाख क्विंटल कर दिया गया है।
धान खरीदी की प्रक्रिया को पारदर्शी बनाने, फर्जीवाड़े पर रोक लगाने और वास्तविक किसानों तक सरकारी लाभ पहुंचाने के लिए कई व्यवस्थाएं लागू करने की तैयारी है।
इस बार 50 लाख क्विंटल धान खरीदने का लक्ष्य
राज्य सरकार ने खरीफ विपणन मौसम 2026-27 के लिए 50 लाख क्विंटल धान अधिप्राप्ति का लक्ष्य निर्धारित किया है। पिछले वर्ष की तुलना में यह लक्ष्य 10 लाख क्विंटल कम है।
धान खरीदी की प्रक्रिया को व्यवस्थित तरीके से पूरा करने के लिए खरीद केंद्रों से लेकर धान के परिवहन और मिलिंग तक निगरानी की व्यवस्था की जा रही है।
राइस मिल संचालक 15 अक्टूबर तक करें आवेदन
धान खरीद के बाद उसकी मिलिंग और चावल की समय पर आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए राइस मिलों का निबंधन अनिवार्य किया गया है। झारखंड राज्य खाद्य एवं असैनिक आपूर्ति निगम लिमिटेड के जिला आपूर्ति कार्यालय की ओर से इस संबंध में सूचना जारी की गई है।
इच्छुक राइस मिल संचालकों को 15 अक्टूबर तक आवेदन जमा करने का निर्देश दिया गया है। इसका उद्देश्य धान खरीद के बाद मिलिंग और चावल की आपूर्ति की प्रक्रिया को सुचारु बनाए रखना है।
GPS से होगी धान ले जाने वाले वाहनों की निगरानी
इस बार धान के परिवहन पर भी विशेष नजर रखी जाएगी। धान ढोने वाले वाहनों को GPS आधारित ट्रैकिंग सिस्टम से जोड़ने की व्यवस्था की जा रही है।
इससे विभाग को वाहनों की लोकेशन और धान की आवाजाही की जानकारी मिल सकेगी। साथ ही यह पता लगाने में भी मदद मिलेगी कि धान निर्धारित राइस मिल या गोदाम तक पहुंचा है या नहीं। इस व्यवस्था से परिवहन के दौरान होने वाली संभावित गड़बड़ियों पर नियंत्रण रखने में मदद मिलने की उम्मीद है।
किसानों के लिए ई-केवाईसी और जमीन सत्यापन जरूरी
धान बेचने वाले किसानों के लिए ई-केवाईसी और जमीन का सत्यापन अहम शर्त होंगे। निर्धारित व्यवस्था के अनुसार, उन्हीं किसानों से धान खरीद की जाएगी, जिनकी जमीन का सत्यापन पूरा हो चुका होगा और ई-केवाईसी की प्रक्रिया भी पूरी होगी।
इस व्यवस्था का उद्देश्य वास्तविक किसानों की पहचान सुनिश्चित करना, फर्जी पंजीकरण पर रोक लगाना और सरकारी खरीद में बिचौलियों की भूमिका कम करना है।
किसानों को सलाह है कि धान बेचने की तैयारी करने से पहले अपने पंजीकरण, ई-केवाईसी और जमीन से जुड़े दस्तावेजों की स्थिति जांच लें।
19 लाख क्विंटल चावल तैयार करने का लक्ष्य
धान अधिप्राप्ति के बाद मिलिंग के जरिए इस वर्ष 19 लाख क्विंटल चावल तैयार करने का लक्ष्य रखा गया है। इसके लिए राइस मिलों का निबंधन, परिवहन वाहनों की GPS ट्रैकिंग और किसानों के दस्तावेजों का सत्यापन महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।
अब किसानों और राइस मिल संचालकों की नजर धान खरीदी शुरू होने की अंतिम तारीख और सरकार की ओर से जारी होने वाले विस्तृत दिशा-निर्देशों पर रहेगी।












