IPS का 20 लाख का घूसकांड: बिहार के रहने वाले इस आईपीएस ने रेप मामले में स्कूल वाले से मांगा 20 लाख घूस

लखनऊ। बिहार के रहने वाले एक IPS को 20 लाख रूपये घूस मांगने के मामले में दोषी पाया गयाहै। IPS का नाम अनिरूद्ध सिंह है, जो यूपी कैडर के अफसर हैं। पिछले दिनों एक स्कूल संचालक से IPS के 20 लाख रूपये घूस मांगने का वीडियो वायरल हुआ था। इस मामले में जांच हुई थी, जिसमें IPS को दोषी पाया गया है। लिहाजा स्कूल वाले से 20 लाख रूपये घूस मांगने वाले IPS अनिरुद्ध सिंह कि मुश्किलें बढ़ गयी है। योगी सरकार ने अब उनके खिलाफ अब विभागीय जांच के आदेश जारी कर दिए गए हैं।

विभाग की तरफ से अब आईपीएस अनिरुद्ध को आरोप पत्र दिया जाएगा और पूरे मामले पर जवाब मांगा जाएगा। अनिरुद्ध पर वाराणसी के स्कूल संचालक से 20 लाख रुपए घूस मांगने का आरोप है। इस संबंध में एक वीडियो वायरल हुआ था।वाराणसी पुलिस की शुरुआती जांच में आईपीएस अनिरुद्ध सिंह दोषी करार दिए गए थे। स्थानीय ज्वाइंट सीपी संतोष सिंह ने जांच के बाद रिपोर्ट तैयार की थी। डीजीपी मुख्यालय ने यह रिपोर्ट शासन को भेजी थी, जिसके बाद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने मामले को गंभीरता से लिया और जांच के आदेश दिए हैं।

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बिहार निवासी 2018 बैच के आईपीएस अनिरुद्ध पर स्कूल में हुई एक घटना की जांच के दौरान स्कूल संचालक से 20 लाख रुपये मांगने का आरोप है। वह वाराणसी के चेतगंज थाने में सहायक पुलिस आयुक्त के पद पर तैनात थे। रिश्वत मांगने की वीडियो वायरल होने के बाद उनका तबादला करके उन्हें बचाने की कोशिश की गई थी।

मामला शांत न होने पर पुलिस मुख्यालय की तरफ से इसकी जांच वाराणसी के पुलिस कमिश्नर को सौंपी गई थी। तीन दिनों में जांच रिपोर्ट भी देने के आदेश थे। वाराणसी के कमिश्नर ने डीआइजी क्राइम संतोष कुमार सिंह को मामले का जांच अधिकारी बनाया था, जिनकी रिपोर्ट पर अब अनिरुद्ध के खिलाफ विभागीय जांच के आदेश दिए गए हैं। वीडियो की फॉरेंसिक जांच के चलते करीब तीन महीने देरी से पूरी हुई जांच की रिपोर्ट बीते दिन शासन को भेजी गई थी।

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रेप केस मामले में कर रहे थे डील

अनिरुद्ध सिंह वर्ष 2018 बैच के आईपीएस अधिकारी हैं। वे वाराणसी के एक नामी स्कूल के कर्मचारी पर छात्रा से रेप का आरोप लगा था। इसी केस में वे डील कर रहे थे। उन्होंने स्कूल संचालक से 20 लाख रुपए की रकम घूस के तौर पर मांगी तो संचालक ने वीडियो रिकॉर्ड कर सोशल मीडिया पर डाल दिया। उस समय अनिरुद्ध सिंह वाराणसी कमिश्नरेट में सहायक पुलिस आयुक्त के पद पर तैनात थे। उनकी तैनाती चेतगंज थाने में थी। सोशल मीडिया पर वीडियो वायरल होते ही पुलिस मुख्यालय हरकत में आई। उनका ट्रांसफर कर दिया गया। जांच बैठाई गई। इसमें उन्होंने स्कूल संचालक को ट्रैप में लेने के लिए दांव लगाने की बात कही। हांलाकि, अब उनका यह दावा सही नहीं पाया गया है।

पहले की शादी, फिर बने IPS
अनिरुद्ध सिंह और आरती की कहानी भी काफी अलग है। दरअसल, अनिरुद्ध सिंह मूल रूप से बिहार के जहानाबाद के रहने वाले हैं। उन्होंने अपनी दसवीं और 12वीं की पढ़ाई बीएनएसडी शिक्षा निकेतन से की। एचबीटीयू से बीटेक करने के बाद वाणिज्य कर विभाग में पांच साल तक असिस्टेंट कमिश्नर पद पर तैनात रहे। दिल्ली में रहकर वे सिविल सर्विसेज की तैयारी कर रहे थे। आरती सिंह मध्य प्रदेश के सिंगरौली शहर की रहने वाली हैं। उन्होंने अपनी स्कूली शिक्षा एनटीपीसी शक्ति नगर के विवेकानंद स्कूल से पूरी की। इसके बाद डीएवी स्कूल एनसीएल दुद्धीचुआ से इंटरमीडिएट, जबलपुर से बीबीए और इंदौर से एमबीए पास किया। यूपीएससी सिविल सर्विसेज का सपना लिए आरती भी सिंगरौली से दिल्ली पहुंची। दिल्ली में अनिरुद्ध और आरती की मुलाकात हुई। दोनों ने साथ मिलकर यूपीएससी का सपना देखना शुरू किया। यूपीएससी में लगातार मिलती असफलताओं के बाद भी दोनों ने हौसला नहीं छोड़ा। वर्ष 2015 में शादी कर ली। इसके बाद एक साथ तैयारी शुरू की। पहले आरती और फिर अनिरुद्ध को सफलता मिली। हालांकि, अब दोनों ही विवादों में फंसे हुए हैं।

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पहले पत्नी, फिर पति बने IPS
अनिरुद्ध सिंह और उनकी पत्नी आरती दोनों आईपीएस हैं। आरती ने पहले यूपीएससी को क्लीयर किया। इसके बाद अनिरुद्ध सिंह भी यूपीएससी क्लीयर कर आईपीएस बनने में सफल रहे। आरती ने वर्ष 2016 की यूपीएससी परीक्षा में 118वें रैंक के साथ सफलता हासिल की। अनिरुद्ध सिंह को एक साल बाद सफलता मिली। वे वर्ष 2017 की यूपीएससी परीक्षा में 146वीं रैक के साथ सिविल सर्विसेज को क्रैक किया। आरती सिंह ने आखिरी और अनिरुद्ध सिंह ने चौथे अटेंप्ट में यूपीएससी सिविल सर्विसेज परीक्षा में सफलता हासिल की। हालांकि, पुलिसिंग करियर के शुरुआती दौर में ही दोनों के खिलाफ आरोप लगे। आरती पर मकान मालिक को किराया न देने का केस चल रहा है।

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