लो हो गया ऐलान! भारत ने एडवांस्ड अग्नि मिसाइल का सफल परीक्षण किया, MIRV तकनीक से लैस

भारत ने एक बार फिर दुनिया को अपनी बढ़ती सैन्य ताकत का अहसास करा दिया है। Defence Research and Development Organisation और Strategic Forces Command के संयुक्त प्रयास से एडवांस्ड ‘अग्नि’ मिसाइल का सफल परीक्षण किया गया है, जो अत्याधुनिक MIRV तकनीक से लैस बताई जा रही है। इस परीक्षण के बाद हिंद महासागर के आसमान में दिखी चमकदार ‘आग की लकीर’ ने सोशल मीडिया पर सनसनी फैला दी थी और लोग इसे रहस्यमयी उड़न वस्तु तक मानने लगे थे।
यह परीक्षण शुक्रवार को Dr. APJ Abdul Kalam Island से किया गया। मिसाइल ने उड़ान भरने के बाद हिंद महासागर क्षेत्र में फैले अलग-अलग लक्ष्यों पर बेहद सटीक निशाना साधा। रक्षा सूत्रों के अनुसार, मिसाइल में कई पेलोड्स लगाए गए थे, जिन्होंने अलग-अलग दिशाओं में जाकर अपने टारगेट को भेदा। इस पूरी प्रक्रिया पर जमीन और समुद्र आधारित ट्रैकिंग सिस्टम से नजर रखी गई।
सबसे ज्यादा चर्चा MIRV तकनीक को लेकर हो रही है। इस तकनीक की मदद से एक ही मिसाइल कई परमाणु या रणनीतिक वॉरहेड लेकर जा सकती है और अलग-अलग लक्ष्यों पर एक साथ हमला कर सकती है। यानी दुश्मन के कई ठिकानों को एक ही वार में तबाह करने की क्षमता अब भारत के पास और मजबूत हो गई है।
रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि यह परीक्षण अग्नि-5 के और अधिक एडवांस वर्जन या नई पीढ़ी की मिसाइल तकनीक की तरफ इशारा करता है। इसमें संभावित हाइपरसोनिक ग्लाइड व्हीकल जैसी तकनीक शामिल होने की भी चर्चा है, जो दुश्मन के मिसाइल डिफेंस सिस्टम को चकमा देने में सक्षम मानी जाती है।
इस टेस्ट का असर भारत के पड़ोसी देशों तक दिखाई दिया। Bangladesh के कई तटीय इलाकों समेत पूर्वी भारत के आसमान में चमकदार रोशनी और लंबी आग जैसी लकीर साफ नजर आई। वायरल वीडियो में लोग हैरान दिखाई दिए और कई तरह के कयास लगाए जाने लगे।
इस बड़ी सफलता पर रक्षा मंत्री Rajnath Singh ने डीआरडीओ, सेना और इस परियोजना से जुड़े वैज्ञानिकों को बधाई दी। उन्होंने कहा कि तेजी से बदलती सुरक्षा चुनौतियों के बीच यह उपलब्धि भारत की रक्षा शक्ति में “अविश्वसनीय क्षमता” जोड़ने वाली है।
भारत पहले भी ‘मिशन दिव्यास्त्र’ के तहत MIRV तकनीक का परीक्षण कर चुका है, लेकिन इस बार का परीक्षण ज्यादा एडवांस और रणनीतिक रूप से बेहद अहम माना जा रहा है। माना जा रहा है कि अग्नि सीरीज की ये मिसाइलें चीन और पाकिस्तान जैसे देशों के खिलाफ भारत की परमाणु निरोधक क्षमता को और मजबूत करेंगी।












