झारखंड- JAP जवान हत्याकांड: स्वास्थ्य मंत्री के बॉडीगार्ड को मारी गयी थी गोली, हाईकोर्ट ने दोषी को नहीं दी राहत, निचली अदालत के फैसले को …

Jharkhand- JAP jawan murder case: Health Minister's bodyguard was shot, High Court did not grant relief to the accused, upheld the lower court's decision...

झारखंड हाई कोर्ट ने JAP जवान की हत्या के मामले में दोषी अमजद गद्दी की जमानत याचिका खारिज कर दी है। अदालत ने मामले की गंभीरता को देखते हुए निचली अदालत के फैसले को बरकरार रखते हुए राहत देने से इनकार किया।
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Jharkhand Crime News : JAP जवान के हत्यारे को हाईकोर्ट से राहत नहीं मिली है। हाईकोर्ट ने दोषी जवान की जमानत याचिका खारिज कर दी है। न्यायमूर्ति रंगन मुखोपाध्याय और न्यायमूर्ति प्रदीप कुमार श्रीवास्तव की खंडपीठ ने मामले की सुनवाई के बाद यह फैसला सुनाया।

साल 2016 में हुई थी जवान की हत्या
यह मामला 31 जुलाई 2016 का है, जब JAP (झारखंड आर्म्ड पुलिस) के जवान अंजन विश्वकर्मा की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। उस समय अंजन विश्वकर्मा पूर्व स्वास्थ्य मंत्री रामचंद्र चंद्रवंशी की सुरक्षा में तैनात थे। घटना के दिन वह साप्ताहिक अवकाश पर थे और डोरंडा स्थित नदी किनारे मैदान में फुटबॉल खेलने गए थे।

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स्वास्थ्य मंत्री के गार्ड थे जवान अंजन विश्वकर्मा
बताया जाता है कि उसी दौरान वहां पहले से मौजूद अमजद गद्दी के साथ उनका किसी बात को लेकर विवाद हो गया। यह विवाद इतना बढ़ गया कि अमजद गद्दी ने आवेश में आकर अंजन विश्वकर्मा पर गोली चला दी। गोली लगने से जवान की मौके पर ही मौत हो गई, जिससे पूरे इलाके में सनसनी फैल गई थी।

2019 में दोषी को सुनायी गयी थी सजा
इस मामले में पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार किया था और बाद में मामले की सुनवाई पूरी होने पर मार्च 2019 में निचली अदालत ने अमजद गद्दी को दोषी ठहराते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी। यह फैसला एमपी मिश्रा की अदालत ने सुनाया था।

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निचली अदालत के फैसले को रखा बरकरार
सजा के खिलाफ आरोपी ने हाई कोर्ट में जमानत याचिका दाखिल की थी, जिसमें उसने राहत की मांग की थी। हालांकि, हाई कोर्ट ने मामले की गंभीरता और उपलब्ध साक्ष्यों को देखते हुए उसकी याचिका को खारिज कर दिया और निचली अदालत के फैसले को बरकरार रखा।गौरतलब है कि अमजद गद्दी का नाम इससे पहले भी एक अन्य आपराधिक मामले में सामने आ चुका है।

26 और 27 सितंबर 2015 को डोरंडा में हुए दंगे में भी वह आरोपी रहा है। इस मामले में फिरोज रिजवी को सह-अभियुक्त बनाया गया था। हालांकि, इस दंगा मामले में दोनों आरोपियों को फिलहाल जमानत मिल चुकी है।हाई कोर्ट के इस फैसले को कानून व्यवस्था के लिहाज से अहम माना जा रहा है।

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