ब्रिगेड ग्राउंड में बदला बंगाल का चेहरा… ‘मां, माटी, मानुष’ के मंच पर दिखा ऐसा ‘Poroborton’ कि सियासत में मच गई हलचल

जिस मैदान से कभी वामपंथ और ममता की हुंकार गूंजी, वहीं पहली बार BJP ने रचा नया इतिहास

कोलकाता। पश्चिम बंगाल की राजनीति में शनिवार का दिन सिर्फ सत्ता परिवर्तन का नहीं, बल्कि प्रतीकों और संदेशों की लड़ाई का भी गवाह बना। कोलकाता का ऐतिहासिक Brigade Parade Ground, जहां कभी वामपंथी ताकत का सबसे बड़ा प्रदर्शन होता था और बाद में ममता बनर्जी ने ‘मां, माटी, मानुष’ के नारे से सत्ता हासिल की थी, वहीं अब पहली बार बीजेपी ने अपना ‘Poroborton’ यानी परिवर्तन का संदेश पूरे बंगाल को दे दिया।

सुवेंदु अधिकारी के मुख्यमंत्री पद की शपथ के दौरान सबसे ज्यादा चर्चा जिस चीज की हुई, वह था मंच के पीछे लगा विशाल ‘Poroborton’ पोस्टर। राजनीतिक जानकार इसे सिर्फ सजावट नहीं, बल्कि बंगाल की बदलती सियासत का खुला ऐलान मान रहे हैं।

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ब्रिटिश दौर में यह मैदान सेना की रणनीतिक गतिविधियों का केंद्र हुआ करता था, लेकिन वक्त के साथ Brigade Parade Ground बंगाल की राजनीति का सबसे बड़ा शक्ति स्थल बन गया। बांग्लादेश के संस्थापक शेख मुजीबुर रहमान का ऐतिहासिक भाषण हो या वाम दलों की विशाल रैलियां, इस मैदान ने कई राजनीतिक तूफान देखे हैं। बाद में ममता बनर्जी ने भी यहीं से सत्ता परिवर्तन की लड़ाई को धार दी थी।

लेकिन इस बार तस्वीर पूरी तरह बदल चुकी थी। 15 साल तक सत्ता में रही टीएमसी के बाद पहली बार BJP ने इसी मैदान से सत्ता संभालने का संदेश दिया। यही वजह रही कि शपथ ग्रहण समारोह को सिर्फ राजनीतिक आयोजन नहीं, बल्कि सांस्कृतिक और वैचारिक शक्ति प्रदर्शन के तौर पर पेश किया गया।

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पूरा मंच ‘मां, माटी, मानुष’ की थीम पर तैयार किया गया था, लेकिन उसमें ‘Poroborton’ का नया राजनीतिक संदेश साफ दिखाई दे रहा था। मंच पर गुरुदेव रवींद्रनाथ टैगोर के चित्र लगाए गए थे, वहीं अष्टभुजा माता महाकाली की भव्य छवि ने लोगों का ध्यान खींचा। बंगाली महिलाएं धुनुची नृत्य करती नजर आईं, जबकि दक्षिणेश्वर मंदिर की प्रतिकृति और विशाल मंदिरनुमा मेहराब आयोजन का मुख्य आकर्षण बनी रही।

कमल के आकार की विशाल रंगोली और बंगाल की पारंपरिक टेराकोटा कला से सजे मंच ने यह संकेत देने की कोशिश की कि बीजेपी अब बंगाल की सांस्कृतिक पहचान के साथ खुद को जोड़कर पेश करना चाहती है।

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कार्यक्रम में सिर्फ राजनीति नहीं, बल्कि बंगाल की सांस्कृतिक विरासत का भी बड़ा प्रदर्शन देखने को मिला। छाऊ, बाउल और गम्भीरा जैसे लोक नृत्य और संगीत कार्यक्रमों ने माहौल को उत्सव में बदल दिया। सुंदरबन थीम पर तैयार इंस्टॉलेशन और दक्षिणेश्वर काली मंदिर शैली की संरचनाओं ने लोगों को लंबे समय तक आकर्षित किया।

खाने-पीने के स्टॉल भी चर्चा में रहे। झालमुड़ी, रसगुल्ला और संदेश जैसी बंगाल की मशहूर मिठाइयों से पूरा आयोजन किसी राजनीतिक समारोह से ज्यादा सांस्कृतिक मेले जैसा दिखाई दिया।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि Brigade Parade Ground से दिया गया यह संदेश आने वाले दिनों में बंगाल की राजनीति की दिशा बदल सकता है। क्योंकि इस बार सिर्फ सरकार नहीं बदली, बल्कि उस मैदान की पहचान भी बदलती दिखाई दी, जो दशकों तक दूसरे राजनीतिक विचारों का गढ़ माना जाता था।

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