इंसानों की हैवानियत का डरावना सच! एक साल में 10 हजार से ज्यादा गिरफ्तार, जानवरों पर क्रूरता में महाराष्ट्र सबसे आगे

NCRB की पहली रिपोर्ट ने खोली देश की काली तस्वीर, हजारों बेजुबानों पर अत्याचार के मामलों ने बढ़ाई चिंता

देश में जानवरों के साथ होने वाली क्रूरता को लेकर राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो यानी NCRB की पहली विस्तृत रिपोर्ट ने चौंकाने वाले खुलासे किए हैं। रिपोर्ट के मुताबिक साल 2024 में पूरे देश में पशु क्रूरता के 9,039 मामले दर्ज किए गए, जबकि 10,312 लोगों को गिरफ्तार किया गया। इन आंकड़ों ने साफ कर दिया है कि बेजुबान जानवरों पर अत्याचार का दायरा लगातार बढ़ता जा रहा है।

सबसे ज्यादा हैरान करने वाली बात यह है कि पशु क्रूरता के मामलों में महाराष्ट्र देश में सबसे ऊपर रहा, जहां अकेले 2,356 केस दर्ज किए गए। इसके बाद मध्य प्रदेश में 1,346, उत्तर प्रदेश में 1,121, गुजरात में 526 और तमिलनाडु में 457 मामले सामने आए।

NCRB ने पहली बार पशु क्रूरता निवारण अधिनियम 1960 के तहत दर्ज अपराधों का पूरा डेटा तैयार किया है। इसमें एफआईआर दर्ज होने से लेकर जांच, चार्जशीट और कोर्ट में मामलों के निपटारे तक की जानकारी शामिल की गई है। इससे पहली बार देश के सामने यह साफ तस्वीर आई है कि जानवरों पर अत्याचार के मामलों में हमारी कानूनी और प्रशासनिक व्यवस्था किस तरह काम कर रही है।

रिपोर्ट के अनुसार, पुलिस ने लगभग 77 प्रतिशत मामलों का निपटारा कर दिया, लेकिन 2024 के अंत तक करीब 2,070 मामले अब भी जांच में लंबित रहे। दूसरी ओर, अदालतों में लंबित मामलों की संख्या भी बेहद चिंताजनक है। 82 प्रतिशत से ज्यादा केस अभी भी ट्रायल का इंतजार कर रहे हैं, जो न्यायिक प्रक्रिया की धीमी रफ्तार को दिखाता है।

हालांकि एक राहत की बात यह रही कि जिन मामलों का ट्रायल पूरा हुआ उनमें दोष सिद्ध होने की दर 80 प्रतिशत से अधिक रही। महानगरों में यह आंकड़ा लगभग 94 प्रतिशत तक पहुंच गया। इसका मतलब है कि अदालत तक पहुंचने वाले अधिकतर मामलों में आरोपियों के खिलाफ मजबूत सबूत मौजूद थे।

रिपोर्ट में पशु चोरी के मामलों का भी बड़ा खुलासा हुआ है। साल 2024 में पशु चोरी के 8,660 मामले दर्ज किए गए जिनकी कुल कीमत करीब 48.8 करोड़ रुपये बताई गई। इनमें लगभग 45 प्रतिशत मामलों में चोरी किए गए जानवरों को बरामद कर लिया गया, जो संपत्ति से जुड़े दूसरे अपराधों के मुकाबले बेहतर रिकवरी रेट माना जा रहा है।

पशु कल्याण कार्यकर्ता गौरी मौलेखी ने इसे पारदर्शिता और डेटा आधारित प्रशासन की दिशा में बड़ा कदम बताया। उनका कहना है कि अब तक पशु क्रूरता के मामले केवल सुनी-सुनाई बातों तक सीमित रहते थे, लेकिन पहली बार ठोस आंकड़े सामने आने से यह समझना आसान होगा कि सिस्टम कहां मजबूत है और कहां कमजोर।

यह रिपोर्ट अब सिर्फ आंकड़ों का दस्तावेज नहीं मानी जा रही, बल्कि देश में बेजुबानों की सुरक्षा को लेकर एक बड़ा चेतावनी संकेत बन चुकी है।

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