झारखंड में क्यों बढ़ रहा है ‘आकाशीय कहर’? BIT मेसरा के शोध में हुआ बड़ा खुलासा, अब इन 5 जिलों पर है सबसे ज्यादा खतरा

Why is the "celestial threat" increasing in Jharkhand? Research by BIT Mesra reveals that these five districts are now most at risk.

रांची: झारखंड में लगातार बढ़ती वज्रपात की घटनाओं के बीच बिरला प्रौद्योगिकी संस्थान, मेसरा (BIT मेसरा) ने एक महत्वपूर्ण शोध प्रस्तुत किया है। इस अध्ययन के अनुसार राज्य के कुछ जिलों में बिजली गिरने की घटनाओं का खतरा अधिक है और इससे होने वाली मौत और आर्थिक नुकसान को कम करने के उपाय सुझाए गए हैं।

BIT मेसरा के रिमोट सेंसिंग और जियोइन्फॉर्मेटिक्स विभाग की डॉ. मिली घोष और डॉ. स्वागता पायरा ने अपने शोधार्थी सुमेधा के साथ मिलकर यह अध्ययन भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) की ‘रिस्पॉन्ड’ परियोजना के तहत किया। शोध में पिछले 25 वर्षों में आकाशीय बिजली गिरने से देशभर में 50 हजार से अधिक मौतें दर्ज हुईं, जिनके आंकड़े एनसीआरबी और भारतीय मौसम विभाग (IMD) से लिए गए हैं।

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अध्ययन में जनसंख्या घनत्व, दिन-रात फ्लैश डेंसिटी, बारिश, फसल क्षेत्र और जमीन की बनावट जैसी कई पहलुओं को शामिल किया गया। 2020 से 2024 के आंकड़ों के अनुसार, ओडिशा पहले और झारखंड पांचवें स्थान पर है। हालांकि, दिन के समय झारखंड में बिजली गिरने की घटनाएं छत्तीसगढ़ के बाद दूसरे नंबर पर आती हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि छोटानागपुर पठार की भौगोलिक स्थिति और बंगाल की खाड़ी से आने वाली आर्द्रता इसका मुख्य कारण हैं।

इस शोध के नतीजे ग्रामीण और कृषि क्षेत्रों के लिए बेहद उपयोगी साबित होंगे। संवेदनशील इलाकों में बिजली निरोधक यंत्र लगाए जा सकते हैं, स्थानीय अलर्ट सिस्टम विकसित किया जा सकता है और लोगों को पहले से सावधान किया जा सकता है।

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BIT मेसरा का यह अध्ययन झारखंड में बिजली से होने वाले नुकसान को कम करने और सुरक्षा सुनिश्चित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

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