ऑपरेशन सिंदूर के बाद देश में हाई अलर्ट! 17 राज्यों से 457 जासूस गिरफ्तार, सेना की हर हरकत पर थी दुश्मन की नजर

सोशल मीडिया, हनी ट्रैप और सीक्रेट कैमरों के जरिए देश में बिछाया गया जासूसी का जाल, खुफिया एजेंसियों के खुलासे ने बढ़ाई सुरक्षा एजेंसियों की चिंता

देश की सुरक्षा एजेंसियों को लेकर एक बेहद चौंकाने वाला खुलासा सामने आया है। ‘ऑपरेशन सिंदूर’ शुरू होने के बाद से पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी ISI ने भारत में अपनी गतिविधियां तेजी से बढ़ा दीं। हालात इतने गंभीर हो गए कि देश के 17 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में फैले जासूसी नेटवर्क का पर्दाफाश करते हुए 457 लोगों को गिरफ्तार किया गया है।

यह सनसनीखेज जानकारी पंजाब पुलिस की ISI गतिविधियों पर आधारित रिपोर्ट में सामने आई है। पंजाब के DGP गौरव यादव के मुताबिक, राज्य पुलिस ने कई ऐसी खुफिया जानकारियां जुटाईं जिन्हें केंद्रीय एजेंसियों और दूसरे राज्यों के साथ साझा किया गया। इन्हीं सूचनाओं के आधार पर 2025 में 457 और मार्च 2026 तक 17 अन्य लोगों की पहचान हुई जो सीधे पाकिस्तानी खुफिया अधिकारियों के संपर्क में थे।

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रिपोर्ट के मुताबिक, ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के बाद ISI ने अपने एजेंटों को खास मिशन सौंपे थे। उन्हें सेना की गतिविधियों, सीमावर्ती इलाकों, रणनीतिक ठिकानों और सैनिकों की आवाजाही से जुड़ी संवेदनशील जानकारी जुटाने के निर्देश दिए गए थे। इसके लिए सोशल मीडिया, हनी ट्रैप और पैसों का लालच देकर लोगों को फंसाया जा रहा था।

सबसे डराने वाला खुलासा उन सोलर-पावर्ड CCTV कैमरों को लेकर हुआ जिन्हें सेना और पुलिस ठिकानों के आसपास लगाने की कोशिश की जा रही थी। इन कैमरों में SIM कार्ड लगाए गए थे ताकि दूर बैठे लोग लाइव फुटेज देख सकें और सैन्य गतिविधियों पर नजर रख सकें। बताया गया कि यह पूरी निगरानी सीमा पार बैठे आकाओं तक पहुंचाई जानी थी।

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पंजाब पुलिस की काउंटर इंटेलिजेंस विंग ने मार्च 2026 के आखिरी हफ्ते और अप्रैल के पहले सप्ताह में इस पूरे नेटवर्क का सुराग पकड़ा। जांच में सामने आया कि स्थानीय लोगों को पैसों के बदले संवेदनशील इलाकों में कैमरे लगाने का काम दिया जा रहा था। हालांकि एजेंसियों ने समय रहते कार्रवाई करते हुए कई संदिग्धों को कैमरे एक्टिव होने से पहले ही पकड़ लिया।

इसके बाद पूरे राज्य में तलाशी अभियान चलाया गया और दूसरी एजेंसियों को भी एडवाइजरी जारी की गई। जांच एजेंसियों का दावा है कि अगर यह नेटवर्क समय रहते नहीं पकड़ा जाता तो देश की सुरक्षा से जुड़ी बेहद संवेदनशील जानकारियां दुश्मन देशों तक पहुंच सकती थीं।

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