भर्ती परीक्षाओं में धांधली पर सियासत तेज! भाजयुमो सड़क पर उतरा, राज्यपाल के नाम भेजा बड़ा ज्ञापन
JPSC-JSSC और CGL परीक्षाओं की CBI जांच की मांग, मुख्यमंत्री के इस्तीफे से लेकर ₹1 करोड़ मुआवजे तक उठीं कई बड़ी मांगें

Bokaro: झारखंड में भर्ती परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं और पेपर लीक के आरोपों को लेकर अब राजनीतिक माहौल भी गर्माने लगा है। शनिवार को भारतीय जनता युवा मोर्चा (भाजयुमो) की जिला इकाई ने जिला अध्यक्ष विनोद कुमार महतो के नेतृत्व में उपायुक्त कार्यालय के सामने जोरदार प्रदर्शन किया और राज्यपाल के नाम संबोधित ज्ञापन सौंपकर कई अहम मांगें उठाईं।
रांची में छात्रों के आंदोलन को मिला समर्थन
भाजयुमो ने ज्ञापन में कहा कि पिछले कई वर्षों में JPSC, JSSC, CGL, उत्पाद सिपाही भर्ती परीक्षा समेत कई प्रतियोगी परीक्षाओं में कथित धांधली, पेपर लीक और परीक्षा माफियाओं की भूमिका जैसे गंभीर आरोप सामने आए हैं। संगठन ने रांची में भर्ती परीक्षाओं के विरोध में आंदोलन कर रहे अभ्यर्थियों का समर्थन करते हुए सरकार से निष्पक्ष कार्रवाई की मांग की।
CBI जांच और फास्ट ट्रैक कोर्ट की मांग
भाजयुमो ने वर्ष 2019 के बाद आयोजित सभी JPSC, JSSC, CGL और अन्य भर्ती परीक्षाओं की CBI जांच कराने की मांग उठाई। साथ ही परीक्षा से जुड़े मामलों की त्वरित सुनवाई के लिए फास्ट ट्रैक कोर्ट गठित करने और दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई सुनिश्चित करने की मांग भी की।
मुख्यमंत्री के इस्तीफे और कार्रवाई की मांग
संगठन ने मुख्यमंत्री से नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए इस्तीफा देने की मांग की। इसके अलावा 14वीं JPSC परीक्षा में कथित गड़बड़ी के मामले में तत्कालीन अध्यक्ष एल. ख्यांगते के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर गिरफ्तारी तथा आयोग के तीनों सदस्यों को बर्खास्त कर उनके विरुद्ध कानूनी कार्रवाई की मांग भी ज्ञापन में शामिल रही।
मृत अभ्यर्थियों के परिजनों को ₹1 करोड़ मुआवजा देने की मांग
भाजयुमो ने उत्पाद सिपाही भर्ती दौड़ परीक्षा के दौरान जान गंवाने वाले सभी अभ्यर्थियों के परिजनों को एक-एक करोड़ रुपये का मुआवजा देने की भी मांग की। संगठन का कहना है कि भर्ती प्रक्रिया में हुई कथित लापरवाही की जिम्मेदारी तय की जानी चाहिए।
“युवाओं के भविष्य से खिलवाड़ बर्दाश्त नहीं”
प्रदर्शन के दौरान भाजयुमो पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं ने कहा कि युवाओं के भविष्य के साथ किसी भी प्रकार का खिलवाड़ स्वीकार नहीं किया जाएगा। उन्होंने सरकार से भर्ती प्रक्रिया को पूरी तरह पारदर्शी, निष्पक्ष और विश्वासयोग्य बनाने की मांग की। ज्ञापन सौंपने के दौरान बड़ी संख्या में पार्टी कार्यकर्ता मौजूद रहे।
अब नजर सरकार के अगले कदम पर
भर्ती परीक्षाओं को लेकर छात्रों का आंदोलन पहले से जारी है। ऐसे में अब विपक्षी संगठनों के खुलकर समर्थन में आने से यह मुद्दा और अधिक राजनीतिक होता दिख रहा है। आने वाले दिनों में सरकार इन मांगों पर क्या रुख अपनाती है, इस पर सभी की नजरें टिकी हैं।









