तेज आवाज में ईयरफोन लगाने से कान हो सकते हैं खराब, बढ़ सकता है बहरेपन का खतरा; एक्सपर्ट ने बताए बचाव के तरीके
तेज आवाज में ईयरफोन और ईयरबड्स लगाने से सुनने की क्षमता प्रभावित हो सकती है। जानें टिनिटस, कान के संक्रमण और बहरेपन के खतरे से बचने के आसान तरीके।

हेल्थ डेस्क। कान हमारे शरीर के बेहद महत्वपूर्ण अंग हैं। ये सिर्फ आवाज सुनने में ही मदद नहीं करते, बल्कि शरीर का संतुलन बनाए रखने में भी अहम भूमिका निभाते हैं। आज के दौर में ईयरफोन और ईयरबड्स का इस्तेमाल तेजी से बढ़ा है। लंबे समय तक तेज आवाज में ईयरफोन लगाने की आदत कानों की सुनने की क्षमता को स्थायी रूप से प्रभावित कर सकती है। लगातार तेज शोर के संपर्क में रहने से सुनने की क्षमता कम होने के साथ आगे चलकर बहरेपन का खतरा भी बढ़ सकता है।
विशेषज्ञों के मुताबिक, कान के अंदर मौजूद बेहद संवेदनशील कोशिकाएं तेज आवाज से क्षतिग्रस्त हो सकती हैं। एक बार इन कोशिकाओं को स्थायी नुकसान होने पर उनकी भरपाई आसानी से नहीं हो पाती। इसके कारण कानों में लगातार घंटी बजने, सीटी या सनसनाहट जैसी आवाज सुनाई दे सकती है। मेडिकल भाषा में इसे टिनिटस (Tinnitus) कहा जाता है।
बारिश के मौसम में बढ़ जाता है कान के संक्रमण का खतरा
बारिश के मौसम में वातावरण में नमी और उमस बढ़ जाती है। ऐसे में कान के बाहरी हिस्से में फंगल या बैक्टीरियल संक्रमण का खतरा बढ़ सकता है। कान में होने वाले फंगल संक्रमण को ऑटोमाइकोसिस (Otomycosis) कहा जाता है।
कान में खुजली या गंदगी महसूस होने पर कई लोग कॉटन बड्स, पिन, चाबी या किसी दूसरी नुकीली वस्तु से कान साफ करने लगते हैं। विशेषज्ञों के अनुसार ऐसा करना नुकसानदायक हो सकता है। इससे कान के अंदर की नाजुक त्वचा पर खरोंच लग सकती है और संक्रमण का खतरा बढ़ सकता है।
सुनने की क्षमता कम होने, कानों में आवाज आने और सूंघने की क्षमता प्रभावित होने जैसी समस्याओं पर चर्चा हुई।
सवाल: 55 साल की उम्र में सुनने में परेशानी हो रही है, सामने वाले को तेज बोलना पड़ता है?
जवाब: उम्र बढ़ने के साथ सुनने की क्षमता कम हो सकती है। ऐसी स्थिति में ENT विशेषज्ञ से परामर्श लेकर कानों की जांच करानी चाहिए। डॉक्टर जरूरत के अनुसार ऑडियोमेट्री जैसी जांच कराने की सलाह दे सकते हैं। सुनने की क्षमता में कमी पाए जाने पर जरूरत के मुताबिक हीयरिंग एड का इस्तेमाल किया जा सकता है। बिना चिकित्सकीय सलाह के ईयरफोन या अन्य गैजेट्स का इस्तेमाल करने से बचना चाहिए।
सवाल: 40 साल की उम्र में नाक से गंध महसूस नहीं हो रही, क्या चिंता की बात है?
जवाब: सूंघने की क्षमता कम होने के कई कारण हो सकते हैं। वायरल इंफेक्शन या एलर्जी के कारण भी कुछ समय के लिए गंध महसूस करने की क्षमता प्रभावित हो सकती है। जिस चीज से एलर्जी होती है, उससे दूरी बनाना जरूरी है। यदि समस्या लंबे समय तक बनी रहती है या बार-बार होती है तो डॉक्टर से जांच करानी चाहिए।
सवाल: 72 साल की उम्र में कानों से लगातार सनसनाहट की आवाज आती है?
जवाब: कानों में सीटी, घंटी या सनसनाहट जैसी आवाज सुनाई देने को टिनिटस कहा जाता है। इसकी वजह अलग-अलग हो सकती है और उपचार भी कारण पर निर्भर करता है। विशेषज्ञ से जांच और सलाह लेना जरूरी है। पूरी तरह शांत वातावरण में कई लोगों को यह आवाज ज्यादा महसूस हो सकती है। ऐसे में हल्का बैकग्राउंड साउंड या मधुर संगीत कुछ लोगों को राहत दे सकता है। लाइफस्टाइल में सुधार भी मददगार हो सकता है।
सवाल: अत्यधिक शोर कानों के लिए कितना नुकसानदेह है?
जवाब: कान के अंदर मौजूद संरचनाएं और संवेदनशील कोशिकाएं तेज आवाज से प्रभावित हो सकती हैं। लंबे समय तक अत्यधिक शोर के संपर्क में रहने से सुनने की क्षमता धीरे-धीरे कम हो सकती है। तेज आवाज में लगातार ईयरफोन या ईयरबड्स इस्तेमाल करना भी इसी कारण जोखिम बढ़ा सकता है।
कानों को सुरक्षित रखने के लिए अपनाएं ये सावधानियां
• ईयरफोन या ईयरबड्स का इस्तेमाल सीमित रखें और आवाज कम स्तर पर रखें। सामान्य तौर पर 60% से कम वॉल्यूम रखने की सलाह दी जाती है।
• कानों में पिन, तिल्ली, पेन, चाबी या कॉटन बड्स जैसी चीजें डालकर सफाई न करें।
• बारिश या नहाने के बाद कान में नमी रहने पर बाहरी हिस्से को साफ और सूखे तौलिये से धीरे-धीरे पोंछें।
• डॉक्टर की सलाह के बिना कान में तेल या किसी तरह की ड्रॉप्स न डालें।
• लगातार कानों में घंटी, सीटी या सनसनाहट सुनाई दे तो इसे नजरअंदाज न करें।
• सुनने की क्षमता कम होने, कान में दर्द, पानी/मवाद आने या संक्रमण के लक्षण होने पर ENT विशेषज्ञ से जांच कराएं।
जरूरी बात: कान में सुनाई देने वाली लगातार आवाज या सुनने की क्षमता में कमी के कई कारण हो सकते हैं। इसलिए केवल घरेलू उपायों पर निर्भर रहने के बजाय जरूरत पड़ने पर विशेषज्ञ से जांच और उचित उपचार लेना बेहतर है।
डिस्क्लेमर: यह खबर सामान्य स्वास्थ्य जानकारी के लिए है। इसमें दी गई जानकारी को चिकित्सकीय निदान या उपचार का विकल्प न मानें। किसी भी लगातार या गंभीर समस्या के लिए योग्य डॉक्टर या ENT विशेषज्ञ से परामर्श लें।












