Unemployment Rate: देश में बेरोजगारी का चौंकाने वाला आंकड़ा! इस राज्य में 37% से ज्यादा युवा बिना नौकरी, जानिए सबसे ज्यादा बेरोजगारी कहां

Unemployment Rate: भारत में रोजगार को लेकर बहस लगातार तेज हो रही है। खासकर 15 से 29 साल के युवाओं के लिए नौकरी पाना कई राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में बड़ी चुनौती बना हुआ है। अलग-अलग रिपोर्ट और डेटा सेट बेरोजगारी की अलग तस्वीर पेश करते हैं, लेकिन कुछ क्षेत्रों में युवा बेरोजगारी की दर काफी ज्यादा दिखाई देती है।
सरकारी पीरियोडिक लेबर फोर्स सर्वे (PLFS) और सेंटर फॉर मॉनिटरिंग इंडियन इकोनॉमी (CMIE) के आंकड़ों को देखें तो बेरोजगारी के मामले में कुछ राज्य और केंद्र शासित प्रदेश लगातार चर्चा में हैं। हालांकि, दोनों डेटा सेट में अंतर होने की वजह से किसी राज्य की रैंकिंग उसके इस्तेमाल किए गए स्रोत के आधार पर बदल सकती है।
लक्षद्वीप में युवा बेरोजगारी सबसे ज्यादा
PLFS से जुड़े आंकड़ों के मुताबिक, लक्षद्वीप में 15 से 29 साल के युवाओं की बेरोजगारी दर करीब 36.2% बताई गई है। यह इसे सबसे ज्यादा युवा बेरोजगारी वाले क्षेत्रों में शामिल करता है।
इसके अलावा अंडमान और निकोबार द्वीप समूह में करीब 33.6%, जम्मू-कश्मीर में 28.4%, नागालैंड में 27.4% और छत्तीसगढ़ में 26.3% युवा बेरोजगारी दर का आंकड़ा सामने आया है।
केरल में भी युवाओं की बेरोजगारी दर अपेक्षाकृत ऊंची रही है। अलग-अलग अवधि और आंकड़े मापने के तरीके के आधार पर इसके आंकड़ों में अंतर देखा जा सकता है।
CMIE के आंकड़ों में हरियाणा की तस्वीर अलग
सरकारी PLFS और CMIE के आंकड़ों को एक जैसा नहीं माना जा सकता, क्योंकि दोनों की डेटा कलेक्शन और गणना की पद्धति अलग है।
CMIE के आंकड़ों के मुताबिक, हरियाणा में बेरोजगारी दर 37.4% तक दर्ज की गई। इस आंकड़े के आधार पर हरियाणा देश में सबसे ज्यादा बेरोजगारी वाले राज्यों में शामिल नजर आता है।
इसलिए जब यह पूछा जाता है कि ‘देश में सबसे ज्यादा बेरोजगारी किस राज्य में है?’, तो यह बताना जरूरी है कि जवाब इस्तेमाल किए जा रहे डेटा सेट और समय अवधि पर निर्भर करता है।
शहरों में युवाओं के लिए नौकरी की चुनौती ज्यादा
बेरोजगारी का असर ग्रामीण और शहरी युवाओं पर एक जैसा नहीं है। दिए गए आंकड़ों के अनुसार, शहरी युवाओं में बेरोजगारी दर करीब 18.2%, जबकि ग्रामीण युवाओं में यह लगभग 15.1% रही।
शहरों में बड़ी संख्या में युवा मैन्युफैक्चरिंग, सर्विस, टेक्नोलॉजी और फाइनेंस जैसे क्षेत्रों में औपचारिक नौकरियों की तलाश करते हैं। इन क्षेत्रों में नौकरी पाने के लिए प्रतिस्पर्धा अधिक होने के कारण योग्य उम्मीदवारों के बीच भी बेरोजगारी की स्थिति बन सकती है।
युवा महिलाओं के सामने चुनौती और बड़ी
बेरोजगारी के आंकड़ों में पुरुषों और महिलाओं के बीच भी अंतर दिखाई देता है। दिए गए आंकड़ों के मुताबिक, युवा पुरुषों में बेरोजगारी दर करीब 14.6%, जबकि युवा महिलाओं में यह 20.7% के आसपास रही।
महिलाओं के रोजगार में कई सामाजिक और व्यावहारिक बाधाएं भी भूमिका निभाती हैं। इनमें स्थानीय स्तर पर नौकरी के सीमित अवसर, आने-जाने से जुड़ी दिक्कतें, परिवार और देखभाल की जिम्मेदारियां और सुरक्षित एवं उपयुक्त कार्यस्थल की उपलब्धता शामिल हैं।
डिग्री है, लेकिन नौकरी के लिए जरूरी स्किल नहीं?
युवा बेरोजगारी की एक बड़ी वजह शिक्षा और रोजगार बाजार की जरूरतों के बीच स्किल गैप को माना जाता है।
कई युवा डिग्री हासिल कर लेते हैं, लेकिन कंपनियों को जिस तरह के तकनीकी, डिजिटल, कम्युनिकेशन या वोकेशनल स्किल की जरूरत होती है, वह हर उम्मीदवार के पास नहीं होती। इसका नतीजा यह होता है कि एक तरफ बड़ी संख्या में युवा नौकरी तलाशते हैं, जबकि दूसरी तरफ कंपनियों को उपयुक्त स्किल वाले उम्मीदवार खोजने में मुश्किल हो सकती है।
खेती से दूर हो रहे युवा, लेकिन विकल्प सीमित
भारत के कृषि क्षेत्र में भी बदलाव का असर रोजगार पर पड़ रहा है। पारंपरिक खेती से होने वाली आय कई बार सीमित और अनिश्चित होती है। बेहतर कमाई और स्थायी करियर की तलाश में युवा खेती से निकलकर मैन्युफैक्चरिंग, सर्विस और अन्य क्षेत्रों की ओर जाना चाहते हैं।
लेकिन अगर इन क्षेत्रों में पर्याप्त संख्या में नए रोजगार पैदा नहीं होते, तो खेती छोड़ने वाले युवाओं के सामने भी बेरोजगारी का संकट खड़ा हो सकता है।
सबसे बड़ा सवाल—युवाओं के लिए पर्याप्त नौकरियां कब?
आंकड़ों की तस्वीर यह बताती है कि युवा बेरोजगारी सिर्फ किसी एक राज्य की समस्या नहीं है। अलग-अलग राज्यों और क्षेत्रों में इसकी वजहें अलग हो सकती हैं, लेकिन स्किल गैप, रोजगार के सीमित अवसर, क्षेत्रीय असमानता और महिलाओं की कम भागीदारी जैसी चुनौतियां देशभर में दिखाई देती हैं।
ऐसे में युवाओं के लिए सिर्फ डिग्री हासिल करना ही पर्याप्त नहीं होगा। रोजगार के नए अवसर पैदा करने के साथ-साथ स्किल ट्रेनिंग, वोकेशनल एजुकेशन और उद्योग की जरूरत के मुताबिक प्रशिक्षण पर भी जोर देना जरूरी है।












