Raksha Bandhan 2026: सोने-चांदी की राखी या साधारण धागा? भाई की कलाई पर क्या बांधना सबसे शुभ, जानें ज्योतिषाचार्य की राय
Raksha Bandhan 2026: राखी की कीमत नहीं, इस एक चीज को माना जाता है सबसे खास; जानिए सोने, चांदी और साधारण रक्षा सूत्र में क्या है अंतर

नई दिल्ली: रक्षाबंधन का त्योहार भाई-बहन के प्रेम, विश्वास और रक्षा के संकल्प का प्रतीक है। सावन पूर्णिमा के दिन मनाए जाने वाले इस पर्व पर बहनें भाई की कलाई पर राखी बांधती हैं और उसके सुख, स्वास्थ्य, लंबी आयु व समृद्धि की कामना करती हैं।
आजकल बाजार में सोने-चांदी, रेशम, मोती और कई तरह की डिजाइनर राखियां उपलब्ध हैं। ऐसे में अक्सर सवाल उठता है कि भाई की कलाई पर सोने या चांदी की राखी बांधना ज्यादा शुभ है या फिर साधारण पवित्र धागे से बनी राखी का धार्मिक महत्व अधिक है?
ज्योतिष और धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, राखी की कीमत से ज्यादा उसकी पवित्रता, भावना और विधि-विधान को महत्व दिया जाता है। ज्योतिषाचार्य पंडित निरंजन जी के अनुसार, रक्षा सूत्र केवल सजावट के लिए बांधा जाने वाला धागा नहीं है, बल्कि इसके पीछे भाई की मंगलकामना और सुरक्षा की भावना जुड़ी होती है।
क्या सोने की राखी बांधना ज्यादा शुभ है?
भारतीय परंपरा में सोने को शुभता और समृद्धि का प्रतीक माना जाता है। ऐसे में परिवार की परंपरा हो या भाई-बहन अपनी खुशी से सोने की राखी बांधना चाहें, तो इसे शुभ अवसर पर पहनाया जा सकता है।
हालांकि, सिर्फ सोने की राखी बांधने से भाई के जीवन में धन या सौभाग्य बढ़ जाएगा, ऐसा कोई सार्वभौमिक धार्मिक नियम नहीं है। राखी का धार्मिक महत्व उसकी कीमत से तय नहीं होता।
चांदी की राखी को लेकर क्या है मान्यता?
चांदी को भी भारतीय ज्योतिष और धार्मिक परंपराओं में शुभ धातु माना जाता है। इसे शीतलता और सकारात्मकता से जोड़कर देखा जाता है। इसलिए भाई को चांदी की राखी बांधना भी शुभ माना जा सकता है।
लेकिन चांदी की राखी को साधारण रक्षा सूत्र की तुलना में अनिवार्य रूप से अधिक शुभ मानने का कोई सार्वभौमिक नियम नहीं है।
साधारण धागे की राखी क्यों है खास?
पारंपरिक रूप से रक्षा सूत्र और कलावा जैसे पवित्र धागों का धार्मिक महत्व काफी पुराना है। इनमें सादगी के साथ रक्षा, मंगलकामना और शुभ भावना जुड़ी होती है।
इसलिए अगर कोई बहन अपने भाई की कलाई पर स्वच्छ और पवित्र साधारण धागे से बनी राखी बांधती है, तो उसे कम शुभ नहीं माना जाना चाहिए। राखी की सादगी उसके धार्मिक महत्व को कम नहीं करती।
तो भाई की कलाई पर कौन-सी राखी बांधें?
ज्योतिषीय दृष्टि से राखी चुनते समय केवल उसकी कीमत या धातु को ही आधार नहीं बनाना चाहिए। भाई की राशि, ग्रह स्थिति और शुभ रंग जैसी बातों को भी ध्यान में रखा जा सकता है। हालांकि, ऐसी सलाह व्यक्तिगत कुंडली के आधार पर अलग-अलग हो सकती है।
सामान्य रूप से कहा जाए तो सोने और चांदी की राखी शुभ हो सकती है, लेकिन पवित्र धागे की राखी भी श्रद्धा और विधि-विधान से बांधी जाए तो उसका महत्व कम नहीं होता।
राखी बांधते समय इन बातों का रखें ध्यान
रक्षाबंधन के दिन बहन को शुभ मुहूर्त में भाई को तिलक लगाने के बाद राखी बांधनी चाहिए। इस दौरान भाई की सुख-समृद्धि, स्वास्थ्य और मंगल की कामना करना शुभ माना जाता है।
राखी बांधते समय यह भी ध्यान रखें कि वह बहुत ढीली या इतनी कसी हुई न हो कि भाई की कलाई पर परेशानी हो।
आखिर सबसे शुभ राखी कौन-सी?
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, राखी का मूल्य नहीं बल्कि उसके पीछे छिपी बहन की श्रद्धा, प्रेम और भाई के मंगल की कामना सबसे महत्वपूर्ण मानी जाती है। इसलिए सोने-चांदी की राखी अपनी जगह शुभ हो सकती है, लेकिन सच्चे मन से बांधा गया साधारण रक्षा सूत्र भी उतना ही भावपूर्ण और धार्मिक महत्व रखता है।









