ASI व कर्मचारी सहित 5 गिरफ्तार: 40 करोड़ की जमीन के फर्जीवाड़ा मामले में पुलिस ने की कार्रवाई, SIT की जांच रिपोर्ट पर एक्शन

गुरुग्राम । 40 करोड़ रुपये की जमीन हड़पने के मामले में हरियाणा पुलिस के एक ASI और दिल्ली के तहसील कार्यालय के एक संविदा कर्मचारी सहित पांच लोगों को गिरफ्तार किया है। आरोपियों ने योजनाबद्ध तरीके से करीब 40 करोड़ रुपये की जमीन को 6.6 करोड़ रुपये में खरीदने का झांसा देकर एनआरआई की जमीन अपने नाम कर ली थी। जांच से पता चला कि 1.5 एकड़ से अधिक की जमीन दक्षिणी पेरिफेरल रोड (एसपीआर) पर बगमपुर खटोला गांव में स्थित थी और फर्जी दस्तावेजों का उपयोग करके इसे हड़प लिया गया था।

एक मार्च 2022 को पूर्ण मनचंदा नाम के व्यक्ति ने पुलिस आयुक्त को लिखित शिकायत देकर कुछ व्यक्तियों पर गांव बेगमपुर खटोला में उसकी जमीन को जाली व फर्जी कागजात के आधार पर पंजीकृत कराकर हड़पने का आरोप लगाया था। इस मामले में बादशाहरपुर पुलिस ने संबंधित धाराओं में केस दर्ज किया था। पुलिस आयुक्त विकास अरोड़ा ने मामले में एसआईटी बनाई थी।टीम ने जांच के दौरान एएसआई के खिलाफ भ्रष्टाचार का एक अलग मामला दर्ज किया है।

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संदिग्धों के खिलाफ बादशाहपुर पुलिस स्टेशन में आईपीसी की धारा 120-बी, 420, 467, 468 और 471 के तहत मामला दर्ज किया गया था।पुलिस के मुताबिक, शिकायतकर्ता मनचंदा ने 1 मार्च, 2022 को सभी संदिग्धों के खिलाफ कथित तौर पर उसकी जमीन हड़पने के लिए जमीन के दस्तावेजों में जालसाजी करने की शिकायत दर्ज कराई थी। जांच के दौरान पुलिस ने पाया कि संदिग्धों ने जमीन के मूल जनरल पावर ऑफ अटॉर्नी (जीपीए) रिकॉर्ड में जालसाजी की थी और गोस्वामी की मदद से फर्जी जीपीए और अन्य दस्तावेज तैयार किए थे, जिन्होंने जमीन का रिकॉर्ड बदलने के लिए 5 लाख रुपये लिए थे।

आरोपियों ने जमीन हड़प ली और उन दस्तावेजों के आधार पर फर्जी तरीके से विनोद के नाम पर रजिस्ट्री करा ली। जीपीए के फर्जी दस्तावेज तैयार करने के लिए संदिग्धों ने मेजर पी.के. मेहता सहित कुछ लोगों को फर्जी गवाह भी बनाए। मेहता की वर्ष 2001 में एक हेलीकॉप्टर दुर्घटना में मौत हो गई थी और वकील संदीप, जिनके जीपीए पर हस्ताक्षर टोनी यादव ने फर्जी दस्तघखत किए थे।

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आरोपी ने फर्जी जीपीए के आधार पर शिकायतकर्ता की 15 कनाल 2 मरला जमीन विनोद के नाम कर दी, जिसका उल्लेख राठी, शैल नारंग और ओम भाटी ने किया था।

जांच के दौरान यह भी पता चला कि ईओडब्ल्यू शाखा में पदस्थ एएसआई प्रदीप आरोपियों को फायदा पहुंचाने के लिए उनसे पैसे लेता था। आरोपियों को अदालत में पेश कर न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया है।

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