“रील्स देखो, व्हाट्सऐप चलाओ…” राहुल गांधी ने युवाओं को लेकर कही ऐसी बात, बोले- ये है 21वीं सदी का नशा
रोजगार और शिक्षा के संकट के बीच सोशल मीडिया पर राहुल गांधी का बड़ा बयान, युवाओं के मोबाइल इस्तेमाल को लेकर उठाए सवाल

नई दिल्ली: मोबाइल और सोशल मीडिया आज युवाओं की जिंदगी का अहम हिस्सा बन चुका है। लेकिन क्या यही सोशल मीडिया उन्हें उनके भविष्य से दूर भी कर रहा है? लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने युवाओं के मोबाइल और सोशल मीडिया इस्तेमाल को लेकर ऐसा बयान दिया है, जिसने एक नई बहस छेड़ दी है। उन्होंने रील्स देखने और सोशल मीडिया में लगातार व्यस्त रहने को “21वीं सदी का नशा” बताया।
राहुल गांधी ने कहा कि युवाओं को शिक्षा और रोजगार जैसे गंभीर मुद्दों से दूर रखने के लिए उन्हें रील्स, व्हाट्सऐप और इंस्टाग्राम जैसी गतिविधियों में लगातार उलझाया जा रहा है।
शिक्षा और रोजगार को लेकर उठाए सवाल
राहुल गांधी ने कहा कि आज देश के युवाओं के सामने शिक्षा और रोजगार का बड़ा संकट है। युवा अपनी पढ़ाई के लिए परिवार से पैसा खर्च कराते हैं, डिग्री हासिल करते हैं, लेकिन डिग्री मिलने के बाद भी रोजगार की कोई गारंटी नहीं होती।
उनके मुताबिक, ऐसी स्थिति में युवाओं का ध्यान दूसरी चीजों की तरफ खींचा जा रहा है और सोशल मीडिया इसमें बड़ी भूमिका निभा रहा है।
“जितनी रील्स देखनी हैं, देखिए…”
राहुल गांधी ने युवाओं के सोशल मीडिया इस्तेमाल का जिक्र करते हुए कहा कि वे जितनी रील्स देखना चाहते हैं, जितने व्हाट्सऐप संदेश भेजना चाहते हैं और इंस्टाग्राम पर जितना समय बिताना चाहते हैं, बिता सकते हैं। लेकिन दूसरी तरफ उनसे डिलीवरी और दूसरे तरह के काम करने की उम्मीद की जाती है।
उनका सवाल है कि क्या देश की युवा शक्ति का इस्तेमाल इसी तरह होना चाहिए?
डेटा को बताया देश की बड़ी पूंजी
राहुल गांधी ने डेटा को 21वीं सदी में बेहद महत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि युवाओं द्वारा तैयार किया गया डेटा देश की पूंजी है। उन्होंने कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) भी डेटा के आधार पर विकसित होती है।
उन्होंने आरोप लगाया कि बड़ी कंपनियां युवाओं के डेटा का इस्तेमाल कर रही हैं। सोशल मीडिया पर रील्स और लगातार संदेशों के जरिए युवाओं को व्यस्त रखा जाता है, जबकि दूसरी ओर उनके लिए रोजगार की स्थायी व्यवस्था नहीं बन रही है।
“युवा ही देश की असली ताकत”
राहुल गांधी ने कहा कि देश के युवाओं में क्षमता, कल्पना और ऊर्जा की कोई कमी नहीं है। यही युवा शक्ति देश की सबसे बड़ी ताकत है।
उन्होंने कहा कि जरूरत इस बात की है कि युवाओं की ऊर्जा का इस्तेमाल शिक्षा, रोजगार और देश के भविष्य को बेहतर बनाने में किया जाए, न कि उन्हें केवल मोबाइल और सोशल मीडिया की दुनिया में उलझाकर रखा जाए।
राहुल गांधी का यह बयान ऐसे समय में आया है जब युवाओं में सोशल मीडिया और शॉर्ट वीडियो का इस्तेमाल तेजी से बढ़ रहा है। ऐसे में उनका “21वीं सदी का नशा” वाला बयान सोशल मीडिया की भूमिका और युवाओं के भविष्य को लेकर एक नई बहस को जन्म दे सकता है।












