Mauni Amavasya 2023 : मौनी अमावस्या पर 30 साल बाद बन रहा विशेष संयोग, जानें इसका महत्व और पूजा विधि

धनबाद : हिंदू धर्म में मौनी अमावस्या का विशेष महत्व होता है। इस दिन दान, दक्षिणा और पवित्र नदियों में स्नान करना बहुत ही शुभ माना जाता है। हिंदू पंचांग के अनुसार मौनी अमावस्या पर 30 साल बाद विशेष संयोग बनेगा।अमावस्या और पूर्णिमा तिथि का विशेष महत्व होता है। हिंदू पंचांग के अनुसार 15-15 दिनों के दो पक्ष होते हैं। एक पक्ष में पूर्णिमा और दूसरे पक्ष में अमावस्या आती है। कृष्ण पक्ष के दौरान चंद्रमा का आकार धीरे-धीरे कम होता है और अमावस्या पर चांद आकाश से गायब हो जाता है। इस तरह से कृष्ण पक्ष की अंतिम तिथि को अमावस्या कहा जाता है।
30 साल बाद बन रहा संयोग
मौनी अमावस्या पर विशेष संयोग बनने जा रहा है। ऐसे संयोग 30 वर्षों के बाद दोबारा से बनेगा। हिंदू पंचांग की गणना के मुताबिक 21 जनवरी को मौनी अमावस्या पर 30 साल के बाद खप्पर योग बनेगा।इस योग में कुंडली में शनि के शुभ प्रभाव को बढ़ाने और धार्मिक कार्यों के लिए विशेष माना जाता है। इसके अलावा मौनी अमावस्या के पहले शनि का राशि परिवर्तन भी होने वाला है। अमावस्या तिथि शनिदेव को प्रसन्न करने के लिए विशेष तिथि मानी जाती है। शनि सभी ग्रहों में सबसे मंद गति से चलने वाले ग्रह हैं और यह न्याय और कर्मफलदाता है। शनि ढाई वर्ष में राशि परिवर्तन करते हैं। मौनी अमावस्या पर शनि कुंभ राशि में मौजूद रहेंगे। मकर राशि में सूर्य और शुक्र की युति से खप्पर योग का निर्माण होगा।
मौनी अमावस्या का महत्व
हिंदू धर्म में अमावस्या तिथि पर दान, दक्षिणा और पवित्र नदियों में स्नान करने का विशेष महत्व होता है। हर वर्ष माघ महीने के अमावस्या तिथि को मौनी अमावस्या के नाम से जाना जाता है। इस अमावस्या में मौन रहते हुए पूजा-पाठ और जप-तप करने का विशेष महत्व होता है। माघ में मौन रहते हुए व्रत करना सबसे अच्छा माना जाता है। इस दिन मौन व्रत का पालन करते हुए भगवान से जाने-अनजाने में हुए पाप के लिए क्षमा प्रार्थना मांगना शुभ होता है। मौनी अमावस्या के दिन पवित्र नदियों में स्नान करने से सभी तरह के पापों से मुक्ति मिल जाती है। इसके अलावा इस दिन दान करने से ग्रह अनुकूल रहते हैं।
पूजा विधि
मौनी अमावस्या तिथि पर सबसे पहले सूर्योदय से पहले उठकर किसी पवित्र नदी में स्नान करें। अगर यह संभव न हो सके तो पानी में गंगाजल की कुछ बूदें मिलाकर स्नान करें। स्नान के बाद सूर्य देव को जल अर्पित करें। फिर मंत्रों का जाप करें। इसके बाद गरीबों को धन, भोजन औ वस्त्रों का दान करें।










