Men No Entry In Temples: भारत के इन मंदिरों में पुरुषों की एंट्री क्यों है बंद? वजह जानकर आप भी रह जाएंगे हैरान, सदियों पुरानी है परंपरा!
कहीं सिर्फ खास दिनों में नहीं मिलती पुरुषों को एंट्री, तो कहीं शादीशुदा पुरुषों के लिए हैं अलग नियम; जानिए इन प्रसिद्ध मंदिरों की अनोखी धार्मिक परंपराएं

नई दिल्ली। भारत को मंदिरों और धार्मिक परंपराओं का देश कहा जाता है। यहां अलग-अलग देवी-देवताओं से जुड़े मंदिरों में सदियों से कई तरह की परंपराएं चली आ रही हैं। कहीं पूजा का तरीका अलग है तो कहीं किसी खास त्योहार या धार्मिक अवसर पर प्रवेश को लेकर विशेष नियम लागू होते हैं।
भारत में कुछ ऐसे प्रसिद्ध मंदिर भी हैं जहां पुरुषों के प्रवेश पर पूरी तरह या खास अवसरों पर रोक रहती है। इन नियमों के पीछे धार्मिक मान्यताएं, पौराणिक कथाएं और सदियों पुरानी परंपराएं जुड़ी हुई हैं। आइए जानते हैं ऐसे ही कुछ मंदिरों के बारे में।
अट्टुकल भगवती मंदिर, केरल
केरल की राजधानी तिरुवनंतपुरम स्थित अट्टुकल भगवती मंदिर महिलाओं की बड़ी धार्मिक भागीदारी के लिए जाना जाता है। यहां आयोजित होने वाला अट्टुकल पोंगाला उत्सव विशेष रूप से महिलाओं की भागीदारी के लिए प्रसिद्ध है।
इस दौरान बड़ी संख्या में महिलाएं मंदिर में पूजा और पोंगाला अनुष्ठान में शामिल होती हैं। उत्सव के विशेष अवसर पर मंदिर परिसर में पुरुषों के प्रवेश को लेकर प्रतिबंध रहता है।
चक्कुलाथुकावु भगवती मंदिर, केरल
केरल का चक्कुलाथुकावु भगवती मंदिर भी अपनी अनोखी परंपरा के लिए जाना जाता है। यहां हर साल नारी पूजा का आयोजन किया जाता है।
इस विशेष अनुष्ठान के दौरान पुरुषों को मंदिर में प्रवेश की अनुमति नहीं होती। इस पूजा में महिला श्रद्धालुओं को विशेष सम्मान दिया जाता है। मंदिर के पुरुष पुजारी महिलाओं के पैर धोकर उनका सम्मान करते हैं।
इस परंपरा को देवी शक्ति की आराधना और महिलाओं के सम्मान से जोड़कर देखा जाता है।
कामाख्या मंदिर, असम
असम के गुवाहाटी में स्थित कामाख्या मंदिर देश के प्रमुख शक्तिपीठों में शामिल है। मंदिर में देवी कामाख्या की पूजा की जाती है और यहां होने वाला अंबुबाची मेला देशभर में प्रसिद्ध है।
अंबुबाची के दौरान धार्मिक मान्यता के अनुसार देवी कामाख्या के मासिक धर्म की अवधि मानी जाती है। इस दौरान मंदिर के कपाट कुछ समय के लिए बंद रहते हैं और श्रद्धालुओं के प्रवेश पर रोक रहती है।
यही वजह है कि इस विशेष अवधि के दौरान पुरुषों के प्रवेश को लेकर भी नियम लागू होते हैं।
कन्याकुमारी भगवती अम्मन मंदिर, तमिलनाडु
तमिलनाडु के कन्याकुमारी में स्थित भगवती अम्मन मंदिर देवी कुमारी को समर्पित है। इस मंदिर से जुड़ी धार्मिक मान्यताओं के कारण पुरुषों के प्रवेश को लेकर विशेष नियम बताए जाते हैं।
परंपरा के अनुसार, शादीशुदा पुरुषों को मंदिर के कुछ हिस्सों में प्रवेश की अनुमति नहीं होती, जबकि संन्यासी पुरुषों को मंदिर के द्वार तक जाने की अनुमति बताई जाती है।
इस परंपरा को देवी के कुमारी स्वरूप और उनके तप से जोड़कर देखा जाता है।
ब्रह्मा मंदिर, पुष्कर में भी है खास नियम
राजस्थान के पुष्कर स्थित जगतपिता ब्रह्मा मंदिर में प्रवेश से जुड़ा नियम थोड़ा अलग है। यहां सभी पुरुषों के प्रवेश पर रोक नहीं है, बल्कि शादीशुदा पुरुषों के गर्भगृह में प्रवेश को लेकर विशेष प्रतिबंध बताया जाता है।
इसके पीछे एक पौराणिक कथा जुड़ी हुई है। मान्यता के अनुसार, यज्ञ के दौरान देवी सरस्वती के देर से पहुंचने पर ब्रह्मा ने गायत्री से विवाह कर यज्ञ पूरा किया था। इसी कथा से जुड़ी मान्यताओं के कारण मंदिर में कुछ विशेष नियमों का पालन किया जाता है।
आखिर क्यों हैं इतने अलग नियम?
भारत के अलग-अलग मंदिरों में प्रवेश से जुड़े नियम एक जैसे नहीं हैं। कहीं ये नियम किसी विशेष त्योहार तक सीमित हैं, तो कहीं किसी खास पूजा या मंदिर के विशेष हिस्से से जुड़े हैं।
इन परंपराओं को मुख्य रूप से स्थानीय धार्मिक मान्यताओं, पौराणिक कथाओं और सदियों से चली आ रही परंपराओं से जोड़कर देखा जाता है।
यही वजह है कि भारत के मंदिर सिर्फ पूजा के केंद्र ही नहीं, बल्कि देश की विविध धार्मिक और सांस्कृतिक परंपराओं की झलक भी दिखाते हैं।











