Railway Job Fraud: नौकरी का ऐसा जाल कि युवतियां भी रह गईं दंग! फर्जी जॉइनिंग लेटर से मेडिकल तक… ट्रेनिंग कराकर ठगे 13 लाख
बिना परीक्षा रेलवे में नौकरी दिलाने का किया दावा, फर्जी ई-मेल और नियुक्ति पत्र से बनाया भरोसा; ओडिशा के स्टेशन पर बाकायदा ट्रेनिंग भी कराई, एक आरोपी गिरफ्तार

जमशेदपुर। रेलवे में नौकरी पाने का सपना देख रही दो युवतियों और उनके परिवार के साथ ऐसी ठगी हुई, जिसका तरीका जानकर पुलिस भी हैरान रह गई। आरोपियों ने बिना परीक्षा रेलवे में नौकरी दिलाने का झांसा दिया और फर्जी ई-मेल, नियुक्ति पत्र और मेडिकल जांच के जरिए ऐसा भरोसा कायम किया कि पीड़ित परिवार को लंबे समय तक किसी शक की गुंजाइश ही नहीं लगी।
आरोप है कि इस पूरे फर्जीवाड़े के जरिए दो युवतियों और उनके परिवार से करीब 13 लाख रुपये ठगे गए। मामले में सीतारामडेरा थाना पुलिस ने कोलकाता के बेनियापुकुर निवासी शेख शाहिद आलम को गिरफ्तार किया है।
वरिष्ठ अधिकारियों से पहुंच का दावा कर शुरू हुआ खेल
मामला भालूबासा मुस्लिम बस्ती निवासी बुसरा खातून की शिकायत पर दर्ज किया गया है। बुसरा और उनकी फुफेरी बहन शाहिबा नफीस रेलवे भर्ती बोर्ड की तैयारी कर रही थीं।
बताया गया कि वर्ष 2025 में उनके पिता की मुलाकात मो. फैसल नामक व्यक्ति से हुई। उसने रेलवे के वरिष्ठ अधिकारियों तक अपनी सीधी पहुंच होने का दावा किया और बिना परीक्षा दोनों युवतियों की नौकरी लगवाने का भरोसा दिया।
शुरुआत में नौकरी के लिए 8 लाख रुपये मांगे गए, लेकिन बाद में यह रकम बढ़ाकर 15 लाख रुपये कर दी गई। 17 अक्टूबर 2025 को आरोपियों ने पहली किस्त के रूप में एक लाख रुपये लिए। इसी दौरान दोनों युवतियों के पहचान पत्र और शैक्षणिक दस्तावेज भी हासिल कर लिए गए।
फर्जी ई-मेल से मेडिकल जांच तक, हर कदम पर बनाया भरोसा
आरोपियों ने ठगी को असली नियुक्ति जैसा दिखाने के लिए रेलवे अधिकारियों से मिलते-जुलते नाम वाले फर्जी ई-मेल तैयार किए।
इन्हीं ई-मेल के जरिए दोनों युवतियों को कोलकाता बुलाया गया, जहां उनका मेडिकल परीक्षण और दस्तावेज सत्यापन कराया गया। इसके बाद उन्हें फर्जी जॉइनिंग लेटर भी दे दिया गया।
फर्जीवाड़े की यही प्रक्रिया पीड़ित परिवार को यह विश्वास दिलाती रही कि रेलवे में नौकरी वास्तव में लग चुकी है।
राजगंगपुर स्टेशन पहुंचाकर कराई ‘ट्रेनिंग’
ठगी करने वाले गिरोह ने यहां भी कोई कसर नहीं छोड़ी। दोनों युवतियों को ओडिशा के राजगंगपुर रेलवे स्टेशन भेजा गया।
वहां उन्हें नौकरी की ट्रेनिंग के नाम पर टिकट काउंटर समेत दूसरे काम भी कराए गए। इस वजह से पीड़ितों को काफी समय तक यह अहसास ही नहीं हुआ कि वे एक बड़े फर्जीवाड़े का शिकार हो चुकी हैं।
पुलिस वेरिफिकेशन ने खोल दिया पूरा राज
मामले का खुलासा तब हुआ, जब पुलिस सत्यापन के दौरान नियुक्ति से जुड़े दस्तावेजों और पूरी प्रक्रिया में गंभीर गड़बड़ियां सामने आईं।
इसके बाद परिवार को ठगी का एहसास हुआ और उन्होंने आरोपियों से पैसे वापस मांगे। आरोप है कि रकम लौटाने के बजाय आरोपी लगातार टालमटोल करते रहे।
आखिरकार बुसरा खातून ने सीतारामडेरा थाना में शिकायत दर्ज कराई। प्राथमिकी में मो. फैसल, निखिल, संजीता खेरसल, एसके मो. साहेब आलम, ईस्टर्न रेलवे के मेडिकल स्टाफ समेत 10 अज्ञात लोगों को आरोपी बनाया गया है।
एक आरोपी गिरफ्तार, बाकी की तलाश जारी
शिकायत के बाद पुलिस ने जांच तेज करते हुए शेख शाहिद आलम को गिरफ्तार कर लिया। मामले में एक अन्य आरोपी को पहले ही जेल भेजा जा चुका है।
पुलिस अब गिरोह से जुड़े अन्य लोगों की तलाश में जुटी है। जांच के दौरान फर्जी नियुक्ति पत्र, ई-मेल और रेलवे भर्ती के नाम पर चलाए जा रहे इस पूरे नेटवर्क से जुड़े अन्य सुराग सामने आने की उम्मीद है।
नौकरी के नाम पर ठगी से रहें सावधान
रेलवे समेत किसी भी सरकारी नौकरी के लिए बिना परीक्षा या आधिकारिक प्रक्रिया के सीधे नियुक्ति का दावा करने वालों से सावधान रहने की जरूरत है। किसी भी नियुक्ति पत्र या ई-मेल पर भरोसा करने से पहले संबंधित विभाग की आधिकारिक प्रक्रिया से उसकी पुष्टि करना बेहद जरूरी है।












