Dharmendra Pradhan Parliament: इस्तीफे के बाद संसद पहुंचे धर्मेंद्र प्रधान, BJP ने लगाए जिंदाबाद के नारे; विपक्ष का जोरदार विरोध

पूर्व शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान इस्तीफे के बाद पहली बार संसद पहुंचे। BJP सांसदों ने जिंदाबाद के नारे लगाकर स्वागत किया, जबकि प्रियंका गांधी के नेतृत्व में विपक्ष ने विरोध प्रदर्शन किया।

Dharmendra Pradhan News: केंद्रीय शिक्षा मंत्री पद से इस्तीफा देने के बाद सोमवार को पहली बार धर्मेंद्र प्रधान संसद पहुंचे। संसद भवन के मकर द्वार पर NDA और BJP सांसदों ने उनका गर्मजोशी से स्वागत किया। इस दौरान ‘धर्मेंद्र प्रधान जिंदाबाद’ के नारे लगे और उन्हें पारंपरिक पाग पहनाकर सदन के भीतर ले जाया गया। वहीं दूसरी ओर कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी के नेतृत्व में विपक्ष ने विरोध प्रदर्शन करते हुए सरकार को घेरने की कोशिश की।


इस्तीफे के बाद संसद में धर्मेंद्र प्रधान का जोरदार स्वागत

मानसून सत्र के दौरान संसद पहुंचे पूर्व केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का BJP और NDA सांसदों ने जोरदार स्वागत किया। सांसदों ने उनके समर्थन में नारे लगाए और पारंपरिक सम्मान के साथ सदन तक पहुंचाया।

राजनीतिक जानकारों का मानना है कि इस स्वागत के जरिए BJP ने यह संदेश देने की कोशिश की कि NEET पेपर लीक मामले में इस्तीफा देने के बावजूद पार्टी धर्मेंद्र प्रधान के साथ मजबूती से खड़ी है।


विपक्ष का प्रदर्शन, प्रियंका गांधी ने उठाए सवाल

उधर, संसद के मकर द्वार पर कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी के नेतृत्व में विपक्षी सांसदों ने विरोध प्रदर्शन किया। विपक्ष ने 20 जुलाई को हुए प्रदर्शन के दौरान पुलिस कार्रवाई को मुद्दा बनाते हुए केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से जवाब मांगा।

प्रियंका गांधी ने कहा कि उन्हें जानकारी मिली है कि बिहार और पश्चिम बंगाल में छात्रों के खिलाफ अब भी FIR दर्ज की जा रही हैं। उन्होंने कहा कि यदि यह सही है तो केवल इस्तीफा देने से मामला खत्म नहीं हो जाता।


पेपर लीक कानून में संशोधन वाला बिल भी हो सकता है पेश

संसद के मानसून सत्र में आज पेपर लीक कानून में संशोधन से जुड़ा विधेयक भी लोकसभा में पेश किए जाने की संभावना जताई जा रही है।

हालांकि, सुबह 11 बजे कार्यवाही शुरू होते ही विपक्ष के हंगामे के कारण लोकसभा और राज्यसभा की कार्यवाही सुचारू रूप से नहीं चल सकी।


सरकार ने क्या दिया संदेश?

धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद संसद में BJP सांसदों द्वारा किए गए स्वागत को राजनीतिक रूप से अहम माना जा रहा है। इससे यह संकेत देने की कोशिश दिखी कि सरकार और पार्टी उन्हें व्यक्तिगत रूप से दोषी नहीं मानती, जबकि विपक्ष इस पूरे मामले में सरकार की जवाबदेही तय करने की मांग पर कायम है।

 

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