CM का काफिला अचानक एक छोटी दुकान पर क्यों रुका? अंदर की कहानी सुनकर हर कोई रह गया भावुक

कभी हाथों में थी बंदूक, आज चला रहे किराना दुकान... मुख्यमंत्री ने खरीदी पानी की बोतल और बढ़ाया हौसला

रायपुर। बीजापुर के सुदूर वनांचल क्षेत्र कोण्डापल्ली में मंगलवार को एक ऐसा दृश्य देखने को मिला, जिसने बदलते बस्तर की तस्वीर को नई पहचान दे दी। सुशासन तिहार के तहत चौपाल में शामिल होने जा रहे मुख्यमंत्री विष्णु देव साय का काफिला अचानक एक छोटी-सी किराना दुकान के सामने रुक गया। बाहर से यह एक साधारण दुकान नजर आ रही थी, लेकिन उसके पीछे संघर्ष, बदलाव और नई जिंदगी की ऐसी कहानी छिपी थी, जिसने सभी को भावुक कर दिया।

यह दुकान आत्मसमर्पित दंपत्ति मासा तामो और जयमोती की है, जिन्होंने कभी नक्सल संगठन का रास्ता चुना था, लेकिन आज वे मेहनत और आत्मनिर्भरता के दम पर सम्मानजनक जीवन जी रहे हैं।

मुख्यमंत्री पहुंचे दुकान के अंदर, खरीदी पानी की बोतल

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय दुकान के भीतर पहुंचे और मासा तामो व जयमोती से आत्मीय बातचीत की। उन्होंने उनके जीवन में आए बदलाव की जानकारी ली और दुकान से पानी की बोतल खरीदकर उनका उत्साह बढ़ाया।

मुख्यमंत्री ने कहा कि आत्मनिर्भरता ही नए जीवन की सबसे बड़ी पहचान है और मासा-जयमोती जैसे लोग बदलते बस्तर की नई उम्मीद हैं।

अभावों से शुरू हुई जिंदगी, फिर भटक गया रास्ता

मासा तामो का बचपन बेहद कठिन परिस्थितियों में बीता। बचपन में ही पिता का साया सिर से उठ गया और पढ़ाई का अवसर नहीं मिल सका। वर्ष 2007 में हालात के कारण वह नक्सली संगठन से जुड़ गया।

वहीं जयमोती की जिंदगी भी संघर्षों से भरी रही। बचपन में माता-पिता का निधन हो गया और परिस्थितियों ने उन्हें भी उसी रास्ते की ओर धकेल दिया। संगठन में दोनों की मुलाकात हुई और वर्ष 2021 में उन्होंने विवाह कर लिया।

लेकिन समय के साथ दोनों को महसूस हुआ कि हिंसा का रास्ता उनके और उनके परिवार के भविष्य को अंधकार की ओर ले जा रहा है। आखिरकार अक्टूबर 2025 में उन्होंने आत्मसमर्पण कर मुख्यधारा में लौटने का फैसला किया।

पुनर्वास केंद्र से शुरू हुई नई जिंदगी

आत्मसमर्पण के बाद दोनों बीजापुर पुनर्वास केंद्र पहुंचे, जहां उनके जीवन का नया अध्याय शुरू हुआ। पहली बार उन्हें अक्षर ज्ञान मिला, कौशल विकास का प्रशिक्षण मिला और शासन की विभिन्न योजनाओं का लाभ मिला।

राशन कार्ड, आधार कार्ड, आयुष्मान कार्ड, मनरेगा जॉब कार्ड, बैंक खाता और अन्य जरूरी दस्तावेज बनवाए गए। महिला एवं बाल विकास विभाग की सक्षम योजना के तहत जयमोती को एक लाख रुपये का ऋण भी स्वीकृत हुआ।

इसी आर्थिक सहायता से कोण्डापल्ली में उनकी छोटी-सी किराना दुकान शुरू हुई।

अब बंदूक नहीं, मेहनत की कमाई से चल रहा घर

मुख्यमंत्री से बातचीत के दौरान मासा और जयमोती ने बताया कि अब वे सम्मान के साथ जीवन जी रहे हैं। दुकान से होने वाली आय से परिवार का खर्च चल रहा है और भविष्य को लेकर नई उम्मीदें जगी हैं।

उन्होंने कहा कि कभी कल्पना भी नहीं की थी कि जिंदगी इतनी बदल सकती है, लेकिन सरकार की पुनर्वास नीति और प्रशासन के सहयोग ने उन्हें नई पहचान और नया रास्ता दिया है।

मुख्यमंत्री बोले- यही है नए बस्तर की असली तस्वीर

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा कि मासा तामो और जयमोती की कहानी सिर्फ दो लोगों की कहानी नहीं है, बल्कि यह बदलते बस्तर की जीवंत तस्वीर है।

उन्होंने कहा कि जब किसी व्यक्ति को अवसर, विश्वास और सहयोग मिलता है तो वह हिंसा का रास्ता छोड़कर भी सम्मानजनक और आत्मनिर्भर जीवन जी सकता है। कोण्डापल्ली की यह छोटी-सी दुकान आज उसी बदलाव, विश्वास और नई शुरुआत का प्रतीक बन चुकी है।

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