महिला कर्मचारियों की मैटरनिटी लीव पर हाईकोर्ट का बड़ा फैसला, गर्भपात के बाद दोबारा प्रेग्नेंट होने पर भी मिलेगा मातृत्व अवकाश, कोर्ट ने सैलरी व छुट्टी को लेकर दिया आदेश…
The High Court has issued a significant ruling on maternity leave for women employees, including those who become pregnant again after a miscarriage. The court issued orders regarding salary and leave.

Highcourt Big Decesion। महिला कर्मचारियों की मैटरनिटी लीव पर हाईकोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाया है। हाईकोर्ट ने कहा है कि गर्भपात के बाद दोबारा गर्भवती होने पर भी महिला कर्मचारी मातृत्व अवकाश की हकदार है। ये फैसला हाईकोर्ट ने महिला कर्मचारी की उस याचिका पर सुनवाई करते हुए दिया है, जिसमें विभाग ने महिला कर्मचारी की अर्जी को खारिज कर दिया था।
मातृत्व अवकाश को लेकर एक महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने कहा है कि गर्भपात (Miscarriage) के बाद यदि कोई महिला कर्मचारी दोबारा गर्भवती होती है, तो उसे फिर से मातृत्व अवकाश (Maternity Leave) का पूरा अधिकार मिलेगा। ये मामला FCI मे पदस्थ महिला कर्मचारी से जुड़ा था।
हाईकोर्ट ने अपने आदेश में क्या कहा
छत्तीसगढ़ की हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि मातृत्व अवकाश किसी महिला कर्मचारी पर उपकार नहीं, बल्कि उसका संवैधानिक और वैधानिक अधिकार है। छत्तीसगढ़ की बिलासपुर हाईकोर्ट ने यह फैसला जस्टिस अमितेंद्र किशोर प्रसाद (Amitendra Kishore Prasad) की एकलपीठ ने सुनाया। कोर्ट ने मामले की सुनवाई के दौरान कहा कि मातृत्व अवकाश महिला के गरिमामय जीवन और स्वास्थ्य से जुड़ा विषय है, जो संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत प्रदत्त जीवन जीने के अधिकार का हिस्सा है।
जानिये क्या है पूरा मामला
दरअसल, मामला Food Corporation of India (FCI) रायपुर में कार्यरत एक महिला कर्मचारी से जुड़ा था। महिला कर्मचारी ने हाईकोर्ट में याचिका दायर कर बताया था कि उसे पहले गर्भपात होने के कारण चिकित्सकीय कारणों से अवकाश लेना पड़ा। बाद में दोबारा गर्भधारण होने पर उसने नियमानुसार मातृत्व अवकाश के लिए आवेदन किया, लेकिन विभाग ने छुट्टी देने के बावजूद उसके वेतन में कटौती कर दी।
कोर्ट में महिला अधिकार के कानून पर दी गयी दलील
याचिकाकर्ता की ओर से कोर्ट में दलील दी गई कि मातृत्व अवकाश महिला कर्मचारियों का कानूनी अधिकार है और गर्भपात के बाद दोबारा गर्भवती होने पर भी यह अधिकार समाप्त नहीं हो जाता। विभाग द्वारा वेतन कटौती करना नियमों और महिला अधिकारों के विपरीत है।मामले की सुनवाई के बाद हाईकोर्ट ने महिला कर्मचारी के पक्ष में फैसला सुनाते हुए कहा कि मातृत्व अवकाश का उद्देश्य केवल प्रसव तक सीमित नहीं है, बल्कि महिला और नवजात के स्वास्थ्य, सुरक्षा और मानसिक संतुलन को सुनिश्चित करना भी है। कोर्ट ने माना कि गर्भपात एक गंभीर शारीरिक और मानसिक स्थिति होती है, जिसके बाद महिला को विशेष देखभाल और आराम की आवश्यकता होती है।
90 दिन के मातृत्व अवकाश का मिलेगा लाभ
हाईकोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि यदि कोई महिला कर्मचारी गर्भपात के बाद पुनः गर्भवती होती है, तो उसे फिर से 90 दिन के मातृत्व अवकाश का अधिकार मिलेगा। कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि इस प्रकार की छुट्टी को लेकर किसी प्रकार की वेतन कटौती करना उचित नहीं माना जा सकता। कोर्ट ने Food Corporation of India को निर्देश दिया कि महिला कर्मचारी का काटा गया वेतन तत्काल वापस किया जाए। साथ ही भविष्य में इस प्रकार के मामलों में संवेदनशीलता और कानून के अनुरूप निर्णय लेने की बात भी कही।












