बूढ़ा पहाड़ के जंगल में आखिर किसने छिपाकर रखे थे 2 गैस सिलेंडर? सुरक्षाबलों की बरामदगी से मचा हड़कंप
गढ़वा के तुरेर गांव के पास जंगल में CRPF और पुलिस की संयुक्त टीम ने चलाया तलाशी अभियान; सिलेंडर किसके हैं और वहां क्यों रखे गए थे, इसकी जांच जारी।

गढ़वा। झारखंड के गढ़वा जिले में कभी माओवादी गतिविधियों का केंद्र रहे बूढ़ा पहाड़ की तलहटी के जंगल से दो गैस सिलेंडर बरामद किए गए हैं। मंगलवार को तुरेर गांव के समीप जंगल में तलाशी अभियान के दौरान सुरक्षाबलों को ये सिलेंडर मिले। दुर्गम इलाके में सिलेंडर मिलने के बाद पुलिस ने उन्हें अपने कब्जे में लेकर जांच शुरू कर दी है। फिलहाल यह स्पष्ट नहीं है कि इन्हें जंगल में किसने और किस उद्देश्य से रखा था।
सूचना मिलते ही जंगल में पहुंची संयुक्त टीम
बड़गड़ थाना प्रभारी राजेश वर्मा के अनुसार, वरिष्ठ अधिकारियों के निर्देश पर मिली सूचना के आधार पर CRPF और बड़गड़ थाना पुलिस की संयुक्त टीम ने तुरेर गांव के पास जंगल में तलाशी अभियान चलाया।
सावधानीपूर्वक की गई खोजबीन के दौरान जंगल के अंदर से दो गैस सिलेंडर बरामद हुए। सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए दोनों सिलेंडरों को कब्जे में लेकर टीम अपने साथ ले गई।
सिलेंडर किसके हैं, पुलिस कर रही जांच
बरामदगी के बाद सबसे बड़ा सवाल यही है कि दोनों गैस सिलेंडर जंगल में कैसे पहुंचे और उन्हें वहां रखने के पीछे क्या वजह थी। पुलिस के मुताबिक, फिलहाल सिलेंडरों के मालिक और उन्हें वहां रखे जाने के उद्देश्य की जानकारी सामने नहीं आई है।
सुरक्षाबल मामले से जुड़े सभी पहलुओं की जांच कर रहे हैं। जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा कि सिलेंडरों को जंगल में रखने के पीछे क्या कारण था।
माओवादी गतिविधियों के पुराने इतिहास के कारण सतर्कता
बूढ़ा पहाड़ का इलाका अतीत में माओवादी गतिविधियों के लिए जाना जाता रहा है। ऐसे क्षेत्र में जंगल के भीतर संदिग्ध परिस्थितियों में सामान मिलने के बाद सुरक्षाबल सतर्कता बरत रहे हैं।
हालांकि, सिर्फ गैस सिलेंडर बरामद होने से माओवादी गतिविधि या किसी साजिश की पुष्टि नहीं होती। फिलहाल पुलिस की जांच का मुख्य उद्देश्य सिलेंडरों के स्रोत और उन्हें वहां रखे जाने की वजह का पता लगाना है।












