रूपी सोरेन के श्राद्धकर्म के तीसरे दिन संथाली परंपरा के अनुसार हुईं रस्में, मुख्यमंत्री ने परोसा भोजन, छुतका समाप्त होने की प्रक्रिया शुरू

रामगढ़। दिवंगत शिबू सोरेन की पत्नी और झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की मां रूपी सोरेन के श्राद्धकर्म के तीसरे दिन शनिवार को संथाली रीति-रिवाज के अनुसार विभिन्न पारंपरिक रस्में संपन्न कराई गईं। आज से नेमरा गांव से छुतका भी खत्म हो गया। इस दौरान मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने परिजनों के साथ घाट पहुंचकर दिवंगत मां के लिए पारंपरिक विधि-विधान पूरे किए। पूरे आयोजन में संथाली समाज की परंपराओं और रीति-रिवाजों का पालन किया जा रहा है।
इससे पहले आज सुबह मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन अपने परिजनों के साथ घाट के समीप स्थित कुल्ही मोढ़ा दोपट्टिया पहुंचे। वे घर में तैयार किया गया भोजन, दातून और पानी साथ लेकर आए थे। वहां उन्होंने संथाली परंपरा के अनुसार दिवंगत मां रूपी सोरेन को भोजन अर्पित किया और निर्धारित विधि-विधान पूरे किए।
पारंपरिक नेग-नियम के अनुसार संपन्न हो रहीं रस्में
श्राद्धकर्म के तीसरे दिन की रस्मों को पूरा करने के लिए नेमरा गांव के संथाली समाज के लोग भी दोपहर करीब 12 बजे घाट पहुंचे। इस दौरान समाज के लोगों ने पारंपरिक रीति-रिवाजों के अनुसार निर्धारित अनुष्ठानों में हिस्सा लिया।
श्राद्धकर्म की सभी रस्में नेमरा गांव के प्राणिक हड़ाम बिजू सोरेन, नायके हड़ाम चेतन टुडू और कुडूम हड़ाम के सदस्यों की देखरेख में पारंपरिक नेग-नियम के अनुसार संपन्न कराई जा रही हैं।घाट पर रस्में पूरी करने के बाद मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन सहित समाज के लोग दोपहर करीब एक बजे पैतृक आवास के सामने स्थित तालाब पहुंचे। यहां बाल और नाखून कटवाने की पारंपरिक रस्म पूरी की जा रही है।
छुतका समाप्त होने के बाद सामान्य होगी ग्रामीणों की दिनचर्या
रूपी सोरेन के निधन के बाद नेमरा गांव के संथाली समाज के लोग परंपरा के अनुसार छुतका का पालन कर रहे थे। इस अवधि में ग्रामीण हल्दी और तेल का सेवन नहीं कर रहे थे। संथाली समाज में छुतका शोक से जुड़ी एक पारंपरिक प्रथा है, जिसके दौरान समुदाय के लोग कुछ निर्धारित वस्तुओं और दैनिक गतिविधियों से परहेज करते हैं।
यह परंपरा दिवंगत व्यक्ति के प्रति सम्मान और शोक व्यक्त करने से जुड़ी है। इस दौरान समुदाय में कुछ विशेष रीति-रिवाजों और धार्मिक गतिविधियों पर भी रोक रहती है।श्राद्धकर्म के तीसरे दिन निर्धारित नेग-नियम और विधि-विधान पूरे होने के बाद नेमरा गांव के लोगों का छुतका समाप्त हो जाएगा। इसके साथ ही ग्रामीणों की दिनचर्या फिर से सामान्य हो जाएगी।संथाली समाज की परंपराओं के अनुरूप संपन्न हो रहे इन अनुष्ठानों के जरिए दिवंगत रूपी सोरेन को श्रद्धांजलि अर्पित की जा रही है।












