देवघर के बाबा बैद्यनाथ धाम में दुर्गा पूजा की ऐसी परंपरा, सप्तमी से नवमी तक बंद रहते हैं 3 मंदिरों के कपाट!
महालया के साथ बाबा नगरी में शुरू हुआ मां शक्ति की आराधना का माहौल, 10 दिनों तक होती है विशेष तांत्रिक पूजा; सप्तमी, अष्टमी और नवमी को मां काली, मां पार्वती और मां संध्या के मंदिरों के कपाट बंद रखने की है परंपरा।

देवघर। शारदीय नवरात्र और दुर्गा पूजा का नाम आते ही मां दुर्गा की भक्ति और उत्सव की तस्वीर सामने आने लगती है। लेकिन झारखंड की बाबा नगरी देवघर में दुर्गा पूजा की परंपरा कुछ खास है। यहां स्थित बाबा बैद्यनाथ धाम में दस दिनों तक मां शक्ति की विशेष आराधना की जाती है। सबसे खास बात यह है कि सप्तमी, अष्टमी और नवमी के दौरान मां काली, मां पार्वती और मां संध्या के मंदिरों के कपाट बंद रखे जाने की परंपरा है। इसी अनूठी पूजा पद्धति के कारण दुर्गा पूजा के दौरान बाबा धाम का धार्मिक महत्व और बढ़ जाता है।
10 दिनों तक होती है मां शक्ति की विशेष आराधना
बाबा बैद्यनाथ धाम में दुर्गा पूजा के दौरान दस दिनों तक विशेष पूजा-अर्चना की जाती है। इस दौरान तांत्रिक विधि-विधान से मां शक्ति की उपासना, हवन और दुर्गा सप्तशती का पाठ किया जाता है।
मंदिर के वरिष्ठ पुजारी एवं धर्माचार्य लम्बोदर परिहस्त के अनुसार, दुर्गा पूजा के अवसर पर बड़ी संख्या में श्रद्धालु बाबा धाम पहुंचते हैं। भक्त मां जगदंबा की आराधना कर अपनी मनोकामनाएं व्यक्त करते हैं। इस दौरान हवन कुंड में विशेष अनुष्ठान किए जाते हैं, जिनमें श्रद्धालु भी भाग लेते हैं।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, विजयादशमी तक चलने वाली पूजा में दुर्गा सप्तशती का पाठ और गुरु से प्राप्त दीक्षा मंत्र का विधिपूर्वक जाप विशेष महत्व रखता है।
सप्तमी, अष्टमी और नवमी को क्यों बंद रहते हैं तीन मंदिरों के कपाट?
बाबा बैद्यनाथ धाम की दुर्गा पूजा परंपरा में सबसे अधिक चर्चा सप्तमी से नवमी तक की विशेष व्यवस्था को लेकर होती है। धर्माचार्य उदय शंकर के अनुसार, इन तीन दिनों में मां काली, मां पार्वती और मां संध्या के मंदिरों के कपाट बंद रखे जाते हैं। विजयादशमी के दिन इन्हें फिर से खोला जाता है।
इस अवधि में हवन कुंड में रातभर तांत्रिक विधि-विधान से पूजा-अर्चना किए जाने की परंपरा बताई जाती है। यहां की पूजा पद्धति को स्थानीय धार्मिक परंपराओं में विशेष स्थान प्राप्त है।
ज्योतिर्लिंग के साथ शक्तिपीठ की मान्यता
बाबा बैद्यनाथ धाम भगवान शिव के प्रमुख तीर्थस्थलों में शामिल है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, यह द्वादश ज्योतिर्लिंगों में से एक है। साथ ही, इसे माता सती के हृदय शक्तिपीठ के रूप में भी माना जाता है।
इसी मान्यता के कारण यहां शिवभक्तों के साथ मां शक्ति के उपासकों की भी विशेष आस्था जुड़ी हुई है। सावन के अलावा नवरात्र और दुर्गा पूजा के दौरान भी देश के विभिन्न हिस्सों से श्रद्धालु देवघर पहुंचते हैं।
मिथिलांचल से भी पहुंचते हैं बड़ी संख्या में भक्त
दुर्गा पूजा के अवसर पर बिहार के मिथिलांचल क्षेत्र से भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु बाबा बैद्यनाथ धाम आते हैं। दरभंगा, मधुबनी, समस्तीपुर, सहरसा, मुजफ्फरपुर और सीतामढ़ी सहित कई जिलों से भक्त मां शक्ति की आराधना के लिए देवघर पहुंचते हैं।
पंडा अंकित बाबा के अनुसार, सावन की तरह दुर्गा पूजा के दौरान भी कुछ श्रद्धालु कांवर लेकर बाबा धाम पहुंचते हैं और पूजा-अर्चना करते हैं। श्रद्धालुओं की आवाजाही से मंदिर परिसर और आसपास के इलाकों में धार्मिक गतिविधियां बढ़ जाती हैं।
महालया के साथ बाबा नगरी में बढ़ा उत्साह
पितृपक्ष की समाप्ति और महालया के साथ ही शारदीय नवरात्र की तैयारियां तेज हो जाती हैं। बाबा नगरी देवघर में भी मां दुर्गा के स्वागत को लेकर भक्तों में उत्साह देखने को मिलता है।
आने वाले दिनों में नवरात्र और दुर्गा पूजा के दौरान दर्शन-पूजन के लिए श्रद्धालुओं की संख्या बढ़ने की संभावना है। बाबा बैद्यनाथ धाम की दस दिवसीय पूजा परंपरा और विशेष अनुष्ठान इसे इस पर्व के दौरान श्रद्धालुओं के लिए एक खास धार्मिक स्थल बनाते हैं।












