झारखंड: सिपाही ही निकला साइबर ठगी का सरदार, गाड़ी की निलामी के नाम पर लगाया चूना, 8 लोगों से ठग लिये लाखों रुपये…

Jharkhand: Police Constable Exposed as Mastermind Behind Cyber Fraud; Duped Victims Under the Pretext of Vehicle Auctions, Swindling Lakhs from 8 People.

झारखंड के जामताड़ा में साइबर थाना में पदस्थ एक जवान पर जब्त वाहनों की नीलामी के नाम पर लाखों रुपये की ठगी का आरोप लगा है। गिरिडीह जिले में मामले की प्राथमिकी दर्ज कर जांच शुरू कर दी गई है।

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जामताड़ा। झारखंड पुलिस विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। पूरा मामला जामताड़ा से सामने आया है, जहां साइबर थाना में तैनात एक पुलिस जवान पर लाखों रुपये की ठगी करने का आरोप लगा है। आरोपी आरक्षी गौतम कुमार के खिलाफ गिरिडीह जिले के बेंगाबाद थाना में प्राथमिकी दर्ज कर ली गई है।

 

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मामले के अनुसार, चपुआडीह पंचायत निवासी महाराज यादव ने लिखित आवेदन देकर आरोप लगाया कि गौतम कुमार ने जब्त वाहनों की नीलामी के नाम पर उनसे और अन्य लोगों से बड़ी रकम वसूली। थाना प्रभारी जितेंद्र सिंह ने बताया कि इस शिकायत के आधार पर कांड संख्या 58/26 दर्ज किया गया है और भारतीय न्याय संहिता की धारा 316(2) एवं 318(4) के तहत मामला दर्ज कर लिया गया है।

 

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पीड़ित महाराज यादव के अनुसार, गौतम कुमार से उनकी पहले से जान-पहचान थी। इसी भरोसे का फायदा उठाते हुए आरोपी ने उन्हें भरोसा दिलाया कि वह थानों में जब्त चारपहिया वाहनों की नीलामी कम कीमत पर करवा सकता है। इतना ही नहीं, उसने कई लोगों को थानों में खड़े जब्त वाहन भी दिखाए, जिससे लोगों का विश्वास और मजबूत हो गया।

 

झांसे में आकर गिरिडीह जिले के विभिन्न थाना क्षेत्रों के करीब 8 लोगों ने आरोपी को कुल 39 लाख 60 हजार 500 रुपये दे दिए। लेकिन समय बीतने के बावजूद न तो किसी को वाहन मिला और न ही उनकी रकम वापस की गई। जब लोगों ने बार-बार दबाव बनाया, तो आरोपी ने नीलामी प्रक्रिया टलने की बात कहकर उन्हें टालना शुरू कर दिया।

 

बताया जा रहा है कि लगभग एक साल तक आरोपी लोगों को बहलाता रहा। इस दौरान जमुआ थाना क्षेत्र के रजाउद्दीन मिर्जा, हरिला निवासी मनोज कुमार यादव और चपुआडीह के अरुण कुमार सहित कई अन्य लोग भी ठगी का शिकार बने।

 

जब मामला बढ़ा और पीड़ितों ने विभागीय अधिकारियों से शिकायत की, तब इसकी जांच शुरू की गई। प्रारंभिक जांच में आरोप सही पाए जाने के बाद पुलिस ने औपचारिक रूप से मामला दर्ज कर लिया।शिकायत के बाद जांच की गई।

 

जांच में आरोपों की पुष्टि होने पर लिखित आवेदन के आधार पर प्राथमिकी दर्ज की गई है और आगे की कार्रवाई जारी है।यह घटना पुलिस विभाग के लिए गंभीर चिंता का विषय बन गई है। पहले भी झारखंड के बोकारो और हजारीबाग में सामने आए घोटालों ने विभाग की छवि को प्रभावित किया था, और अब जामताड़ा के इस मामले ने खाकी वर्दी की साख पर एक और सवाल खड़ा कर दिया है।

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