JSSC पेपर लीक मामला : 27 से 30 लाख में हुई थी डील और……गिरफ्तार अवर सचिव ने उगले कई राज

रांची : वर्षो से नौकरी की आस में तैयारी कर रहे छात्रों के भविष्य के साथ जेएसएससी पेपर लीक कर खिलवाड़ करने के मामले में जैसे जैसे जांच की कारवाई बढ़ रही है वैसे वैसे हाई प्रोफाइल संस्थान के कर्मी अधिकारी जांच के घेरे में आ रहे हैं।विधानसभा जैसे स्वच्छ संस्थान के अधिकारी का जिस तरह के पेपर लीक में नाम आया है वैसे में ये स्पष्ट हो गया है की विधानसभा की नियुक्ति में गड़बड़ी करने वालो पर अबतक करवाई न होना कहीं बड़ी साजिश की हिस्सा तो नहीं…

विधानसभा के वर्तमान अवर सचिव मो शमीम को एसआइटी ने जेएसएससी स्नातक स्तरीय संयुक्त प्रतियोगिता परीक्षा में प्रश्न पत्र लीक करने के मामले में गिरफ्तार किया है। इस दौरान जेएसएससी सीजीएल परीक्षा पेपर लीक मामले में बड़ा खुलासा हुआ है. पुलिस की जांच में पता चला है कि इस पेपर लीक कांड में रांची से लेकर पटना तक के सरकारी अफसरों, कोचिंग संचालकों और धंधेबाजों का बड़ा नेटवर्क सक्रिय था. पुलिस जांच में यह बात सामने आई है कि गिरफ्तार किए गये झारखंड विधानसभा के अवर सचिव मो. शमीम और उनके दो बेटों ने छह अभ्यर्थियों को परीक्षा के पहले 27-30 लाख रुपये में पर्चे उपलब्ध कराए थे.

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मंगलवार को जेएसएससी पेपर लीक मामले में गिरफ्तार झारखंड विधानसभा के अवर सचिव मोहम्मद शमीम और उसके दोनों बेटों शहजादा और शाहनवाज को रांची सिविल कोर्ट में पेश किया गया. जहां से कोर्ट ने तीनों को 14 दिनों की न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया है. तीनों को नगड़ी थाना क्षेत्र से रविवार को गिरफ्तार किया गया था.

जेएसएससी सीजीएल परीक्षा पेपर लीक मामले में बिहार विधानसभा के कर्मी मोहम्मद रिजवान की भी संलिप्तता सामने आयी है. रिजवान गिरफ्तार अवर सचिव का दामाद है. उसकी गिरफ्तारी के लिए एसआइटी की टीम ने पटना के अनीसाबाद स्थित उसके घर में छापेमारी की, मगर वह फरार मिला. पुलिस ने बताया कि पहले तो मो. शमीम ने पेपर लीक कांड में अपनी संलिप्तता से इंकार किया. मगर जैसे-जैसे सबूत पेश किये गये, वह राज उगलता चला गया.

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मो. शमीम ने बताया कि जेएसएससी पेपर लीक मामले में छह अभ्यर्थियों से डीलिंग हुई थी. सौदा 27 से 30 लाख में तय हुआ था. दो अभ्यर्थियों की परीक्षा 28 को हुई थी. परीक्षा से दो दिन पहले ही दोनों को पटना भेज दिया गया था. पटना में मो. शमीम के दामाद रिजवान ने उनके रहने की व्यवस्था की थी. दोनों को परीक्षा के पहले ही उत्तर याद करा दिया गया था. इसके बाद उन्हें सेंटर तक छोड़ा गया. एक अभ्यर्थी का सेंटर धनबाद और दूसरे का रांची में था.

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