सुप्रीम कोर्ट के बाहर छात्रों के समर्थन में उतरे वकील! संविधान की प्रस्तावना पढ़ी, राष्ट्रगान गाया… पुलिस कार्रवाई पर लगाए गंभीर आरोप

नई दिल्ली। जंतर-मंतर पर छात्रों के विरोध-प्रदर्शन को लेकर अब देश के शीर्ष वकीलों ने भी खुलकर समर्थन जताया है। सुप्रीम कोर्ट परिसर के बाहर वकीलों ने शांतिपूर्ण तरीके से संविधान की प्रस्तावना पढ़ी और राष्ट्रगान गाकर छात्रों के साथ एकजुटता दिखाई। इस दौरान किसी तरह की नारेबाजी नहीं की गई, लेकिन पुलिस कार्रवाई पर तीखी आपत्ति दर्ज कराई गई।
सुप्रीम कोर्ट की वकील महालक्ष्मी पावनी ने कहा कि वे छात्रों के साथ एकजुटता व्यक्त करने और उन पर हुई कथित पुलिस बर्बरता की निंदा करने के लिए एकत्र हुए हैं। उन्होंने कहा कि छात्र देश का भविष्य हैं और वे केवल अपने अधिकारों की मांग कर रहे थे। ऐसे में उनके साथ हिंसक व्यवहार बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है। उन्होंने आरोप लगाया कि जिन पर सुरक्षा की जिम्मेदारी है, वही कथित तौर पर छात्रों और महिलाओं के खिलाफ बल प्रयोग करते नजर आए।
इस दौरान सुप्रीम कोर्ट की वकील ननिता शर्मा ने भी पुलिस कार्रवाई पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने दावा किया कि प्रदर्शन के दौरान छात्रों पर लाठीचार्ज किया गया, डंडों से पीटा गया और यहां तक कि उन्हें इलेक्ट्रिक करंट भी लगाया गया। उन्होंने कहा कि छात्र केवल शिक्षा व्यवस्था और अन्याय के खिलाफ अपनी आवाज उठा रहे थे, ऐसे में सरकार को बल प्रयोग के बजाय उनसे बातचीत करनी चाहिए थी। उनके मुताबिक, संवाद से हर समस्या का समाधान निकल सकता है।
वरिष्ठ अधिवक्ता इंदिरा जयसिंह ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट न्याय का मंदिर है और वकीलों का कर्तव्य है कि वे देश के नागरिकों तक न्याय की आवाज पहुंचाएं। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह आंदोलन किसी व्यक्तिगत हित के लिए नहीं, बल्कि छात्रों के अधिकारों और न्याय की मांग के समर्थन में है।
एडवोकेट अरविंद शुक्ला ने कहा कि छात्रों के साथ जो भी कथित अन्याय हुआ है, उसका सुप्रीम कोर्ट बार के सदस्य विरोध करते हैं। उन्होंने कहा कि संविधान की प्रस्तावना पढ़कर इस विरोध की शुरुआत इसलिए की गई ताकि यह संदेश दिया जा सके कि कानून के दायरे में रहकर छात्रों को न्याय दिलाने की हर संभव कोशिश की जाएगी। उन्होंने यह भी कहा कि कथित गैर-कानूनी क्रूरता के खिलाफ आवश्यक कानूनी कदम उठाए जाएंगे।
सीनियर एडवोकेट डॉ. एस. मुरलीधर ने भी छात्रों के समर्थन में आवाज उठाते हुए कहा कि जो छात्र अपने अधिकारों के लिए शांतिपूर्ण विरोध कर रहे हैं, उनके साथ न्याय होना चाहिए और वकील समुदाय इस मांग के साथ खड़ा है।
फिलहाल, छात्रों के आंदोलन को देशभर में अलग-अलग वर्गों का समर्थन मिलने लगा है। ऐसे में यह मामला अब केवल सड़क तक सीमित नहीं रहा, बल्कि न्यायिक और कानूनी हलकों में भी चर्चा का विषय बन गया है। वहीं, छात्रों द्वारा लगाए गए आरोपों और पुलिस की कार्रवाई को लेकर विवाद लगातार गहराता जा रहा है।









