दिल्ली में CEC ज्ञानेश कुमार के खिलाफ प्रदर्शन पर बड़ा एक्शन, 3 FIR दर्ज; सैकड़ों हिरासत में
जंतर-मंतर पहुंचने से पहले रोके गए प्रदर्शनकारी, दिल्ली पुलिस ने निषेधाज्ञा के उल्लंघन के मामले में FIR दर्ज की; SIR को लेकर उठाए गए सवाल

नई दिल्ली। मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के खिलाफ 2 अक्टूबर को दिल्ली में प्रस्तावित प्रदर्शन के दौरान पुलिस की कार्रवाई अब कानूनी कार्रवाई तक पहुंच गई है। दिल्ली पुलिस ने जंतर-मंतर और आसपास हुए विरोध-प्रदर्शन के सिलसिले में तीन FIR दर्ज की हैं। प्रदर्शनकारी Special Intensive Revision (SIR) और मतदाता सूचियों से जुड़े कथित अनियमितताओं के सवाल उठाते हुए CEC ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग कर रहे थे।
जंतर-मंतर पहुंचने से पहले रोके गए प्रदर्शनकारी
प्रदर्शन के लिए जंतर-मंतर पर जुटने का आह्वान किया गया था, लेकिन दिल्ली पुलिस ने इसकी अनुमति नहीं दी थी। इसके बाद मध्य दिल्ली में सुरक्षा बढ़ाने के साथ कई स्थानों पर बैरिकेडिंग की गई। पुलिस ने जंतर-मंतर की ओर बढ़ रहे प्रदर्शनकारियों को अलग-अलग जगहों पर रोककर हिरासत में लिया।
हिरासत में लिए गए लोगों की संख्या को लेकर अलग-अलग रिपोर्ट सामने आई हैं। दिल्ली पुलिस के हवाले से Hindustan Times ने करीब 1,000 से अधिक लोगों को हिरासत में लिए जाने की जानकारी दी, जबकि दिन के दौरान आई अन्य रिपोर्टों में यह संख्या करीब 500 से 700 के बीच बताई गई थी।
हिरासत में लिए गए लोगों में राजनीतिक दलों से जुड़े नेता, छात्र संगठनों के कार्यकर्ता और अन्य प्रदर्शनकारी शामिल थे।
तीन FIR में BNS की धारा 223 का जिक्र
दिल्ली पुलिस के अनुसार, संसद मार्ग और कनॉट प्लेस थानों में तीन FIR दर्ज की गई हैं। इनमें भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 223 के तहत लोक सेवक द्वारा विधिवत जारी आदेश की अवज्ञा से संबंधित आरोप लगाए गए हैं। कार्रवाई का संबंध क्षेत्र में लागू निषेधाज्ञा के उल्लंघन से भी बताया गया है।
पुलिस के मुताबिक, FIR में फिलहाल किसी व्यक्ति या संगठन को नामजद आरोपी नहीं बनाया गया है। हालांकि, FIR की सामग्री में प्रदर्शन का आह्वान करने वाले आयोजकों और संगठनों तथा प्रदर्शन में शामिल लोगों का उल्लेख किया गया है।
AAP, छात्र संगठनों और अन्य समूहों की भागीदारी
प्रदर्शन में AAP, AISA, SFI, NSUI और Indian Youth Congress से जुड़े लोगों की भागीदारी की रिपोर्ट सामने आई। AAP नेता सौरभ भारद्वाज और पूर्व दिल्ली मुख्यमंत्री आतिशी समेत कई लोगों को हिरासत में लिए जाने की जानकारी भी सामने आई।
प्रदर्शनकारियों की मुख्य मांग CEC ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की रही। इसके साथ ही SIR के दौरान मतदाता सूचियों में कथित बदलाव और नाम हटाए जाने को लेकर सवाल उठाए गए।
SIR को लेकर क्या है विवाद?
Special Intensive Revision यानी SIR के जरिए मतदाता सूचियों के पुनरीक्षण को लेकर राजनीतिक दलों और विभिन्न संगठनों की ओर से सवाल उठाए जा रहे हैं। प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि इस प्रक्रिया के दौरान मतदाताओं के नामों को लेकर गंभीर सवाल सामने आए हैं। दूसरी ओर, ये आरोप राजनीतिक विवाद का हिस्सा हैं और संबंधित प्रक्रियाओं व दावों पर अलग-अलग पक्ष मौजूद हैं।
दिल्ली में 2 अक्टूबर के प्रदर्शन से पहले पुलिस ने जंतर-मंतर के आसपास सुरक्षा बढ़ाई थी और निषेधाज्ञा लागू होने की जानकारी दी थी।
फिलहाल तीन FIR दर्ज होने के बाद मामले ने नया कानूनी मोड़ ले लिया है। पुलिस की जांच के दौरान यह स्पष्ट होगा कि प्रदर्शन के दौरान किन परिस्थितियों में निषेधाज्ञा का उल्लंघन हुआ और आगे की कार्रवाई किस आधार पर की जाती है।












