रांची: म्यूटेशन के लिए 30 लाख मांगी घूस, DC ने CO सहित तीन अधिकारियों को जारी किया शो-कॉज नोटिस

रांची के नगड़ी अंचल में म्यूटेशन के लिए 30 लाख रुपये तक घूस मांगने का गंभीर आरोप सामने आया है। उपायुक्त ने मामले को गंभीरता से लेते हुए संबंधित अधिकारियों को कारण 

 

झारखंड की राजधानी रांची में प्रशासनिक व्यवस्था पर सवाल खड़े करने वाला एक गंभीर मामला सामने आया है। नगड़ी अंचल के अंचल अधिकारी (CO) राजेश कुमार पर म्यूटेशन के लिए आवेदकों से भारी भरकम घूस मांगने का आरोप लगा है। मामला उजागर होने के बाद उपायुक्त मंजूनाथ भजन्त्री ने सख्त रुख अपनाते हुए संबंधित अधिकारियों को कारण बताओ नोटिस जारी किया है।

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जनता दरबार में खुला मामला
यह मामला उपायुक्त के जनता दरबार के दौरान सामने आया, जहां प्रार्थी आनंद सिंह और महेश्वर सिंह ने अपनी शिकायत दर्ज कराई। उन्होंने आरोप लगाया कि नगड़ी CO राजेश कुमार म्यूटेशन के बदले 30 लाख रुपये तक की रिश्वत मांग रहे थे।मामले की गंभीरता को देखते हुए DC ने तत्काल वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से CO से जवाब-तलब किया और उन्हें फटकार लगाई। साथ ही CO, संबंधित सर्किल इंस्पेक्टर (CI) और कर्मचारी को 48 घंटे के भीतर स्पष्टीकरण देने का निर्देश देते हुए शो-कॉज नोटिस जारी किया गया।

म्यूटेशन आवेदन खारिज कर मांगी रिश्वत
पूरा मामला बालालोंग मौजा के खाता नंबर 14, प्लॉट नंबर 470, रकबा 1 एकड़ 5 डिसमिल जमीन से जुड़ा है। आवेदकों के अनुसार, उनके म्यूटेशन आवेदन (केस नंबर 7696/24-25) को CO द्वारा खारिज कर दिया गया। इसके बाद कथित रूप से 30 लाख रुपये की घूस की मांग की गई।जब आवेदकों ने एलआरडीसी कोर्ट का दरवाजा खटखटाया, तो कोर्ट ने उनके पक्ष में म्यूटेशन करने का आदेश दिया। इसके बावजूद CO ने कथित तौर पर रिश्वत की मांग कम कर 15 लाख रुपये कर दी।

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उच्च अधिकारियों के आदेश के बाद भी नहीं हुई कार्रवाई
आवेदकों ने एडिशनल कलेक्टर के पास भी गुहार लगाई, जहां से भी म्यूटेशन के पक्ष में आदेश मिला। बावजूद इसके, CO द्वारा 9 लाख रुपये की मांग जारी रही। इससे परेशान होकर आवेदक आखिरकार उपायुक्त के जनता दरबार पहुंचे।

CNT-SPT एक्ट की आड़ में खेल
आरोप है कि CO ने सीएनटी-एसपीटी एक्ट का हवाला देकर आवेदन को खारिज किया, जबकि संबंधित जमीन की डीड वर्ष 2010 की थी और यह कानून 2012 में लागू हुआ था। ऐसे में इस मामले में उक्त कानून लागू नहीं होता था।जब DC ने इस विसंगति पर सवाल उठाया, तो CO द्वारा रिव्यू पिटीशन का हवाला दिया गया, जिससे संदेह और गहरा गया।

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रांची के नगड़ी अंचल में म्यूटेशन के लिए 30 लाख रुपये तक घूस मांगने का गंभीर आरोप सामने आया है। उपायुक्त ने मामले को गंभीरता से लेते हुए संबंधित अधिकारियों को कारण बताओ नोटिस जारी किया है।
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झारखंड की राजधानी रांची में प्रशासनिक व्यवस्था पर सवाल खड़े करने वाला एक गंभीर मामला सामने आया है। नगड़ी अंचल के अंचल अधिकारी (CO) राजेश कुमार पर म्यूटेशन के लिए आवेदकों से भारी भरकम घूस मांगने का आरोप लगा है। मामला उजागर होने के बाद उपायुक्त मंजूनाथ भजन्त्री ने सख्त रुख अपनाते हुए संबंधित अधिकारियों को कारण बताओ नोटिस जारी किया है।

जनता दरबार में खुला मामला
यह मामला उपायुक्त के जनता दरबार के दौरान सामने आया, जहां प्रार्थी आनंद सिंह और महेश्वर सिंह ने अपनी शिकायत दर्ज कराई। उन्होंने आरोप लगाया कि नगड़ी CO राजेश कुमार म्यूटेशन के बदले 30 लाख रुपये तक की रिश्वत मांग रहे थे।मामले की गंभीरता को देखते हुए DC ने तत्काल वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से CO से जवाब-तलब किया और उन्हें फटकार लगाई। साथ ही CO, संबंधित सर्किल इंस्पेक्टर (CI) और कर्मचारी को 48 घंटे के भीतर स्पष्टीकरण देने का निर्देश देते हुए शो-कॉज नोटिस जारी किया गया।

म्यूटेशन आवेदन खारिज कर मांगी रिश्वत
पूरा मामला बालालोंग मौजा के खाता नंबर 14, प्लॉट नंबर 470, रकबा 1 एकड़ 5 डिसमिल जमीन से जुड़ा है। आवेदकों के अनुसार, उनके म्यूटेशन आवेदन (केस नंबर 7696/24-25) को CO द्वारा खारिज कर दिया गया। इसके बाद कथित रूप से 30 लाख रुपये की घूस की मांग की गई।जब आवेदकों ने एलआरडीसी कोर्ट का दरवाजा खटखटाया, तो कोर्ट ने उनके पक्ष में म्यूटेशन करने का आदेश दिया। इसके बावजूद CO ने कथित तौर पर रिश्वत की मांग कम कर 15 लाख रुपये कर दी।

उच्च अधिकारियों के आदेश के बाद भी नहीं हुई कार्रवाई
आवेदकों ने एडिशनल कलेक्टर के पास भी गुहार लगाई, जहां से भी म्यूटेशन के पक्ष में आदेश मिला। बावजूद इसके, CO द्वारा 9 लाख रुपये की मांग जारी रही। इससे परेशान होकर आवेदक आखिरकार उपायुक्त के जनता दरबार पहुंचे।

CNT-SPT एक्ट की आड़ में खेल
आरोप है कि CO ने सीएनटी-एसपीटी एक्ट का हवाला देकर आवेदन को खारिज किया, जबकि संबंधित जमीन की डीड वर्ष 2010 की थी और यह कानून 2012 में लागू हुआ था। ऐसे में इस मामले में उक्त कानून लागू नहीं होता था।जब DC ने इस विसंगति पर सवाल उठाया, तो CO द्वारा रिव्यू पिटीशन का हवाला दिया गया, जिससे संदेह और गहरा गया।

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