खूनी कुत्तों का आतंक! एक दिन में 34 लोगों पर हमला…बच्चे-बुजुर्ग तक नहीं बचे…शहर में दहशत का माहौल

सड़क पर निकलना हुआ खौफनाक… झुंड बनाकर दौड़े आवारा कुत्ते, शहर में दहशत का माहौल

जलगांव। महाराष्ट्र के जलगांव शहर में आवारा कुत्तों का आतंक अब डरावने स्तर तक पहुंच गया है। हालात इतने बिगड़ चुके हैं कि एक ही दिन में 34 लोगों को कुत्तों ने काटकर घायल कर दिया। सबसे ज्यादा चिंता की बात यह है कि इन हमलों का शिकार मासूम बच्चे और बुजुर्ग भी हुए हैं। लगातार हो रहे हमलों के बाद पूरे शहर में दहशत का माहौल बन गया है।

शहर के अलग-अलग इलाकों से सामने आई इन घटनाओं ने लोगों को घर से बाहर निकलने तक से डराना शुरू कर दिया है। स्थानीय लोगों का कहना है कि कई जगहों पर आवारा कुत्ते झुंड बनाकर घूमते हैं और अचानक राह चलते लोगों पर हमला कर देते हैं।

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सोमवार को स्थिति तब और भयावह हो गई जब अलग-अलग क्षेत्रों में एक के बाद एक डॉग बाइट के मामले सामने आने लगे। घायलों को तुरंत सरकारी मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल में भर्ती कराया गया। अस्पताल में एक साथ बड़ी संख्या में पहुंचे मरीजों को देखकर वहां भी अफरा-तफरी जैसा माहौल बन गया।

जलगांव के सहायक चिकित्सा अधीक्षक डॉ. जाकिर पठाण के मुताबिक, शहर में हर दिन औसतन 30 डॉग बाइट के मामले सामने आ रहे हैं। आंकड़े और भी ज्यादा डराने वाले हैं। हर महीने करीब 900 लोग और सालभर में 10 हजार से ज्यादा लोग कुत्तों के हमलों का शिकार हो रहे हैं।

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डॉक्टरों ने लोगों को चेतावनी दी है कि कुत्ता काटने के बाद घरेलू इलाज या लापरवाही जानलेवा साबित हो सकती है। विशेषज्ञों के अनुसार, घाव को तुरंत साफ पानी से धोना चाहिए और बिना देर किए अस्पताल पहुंचकर एंटी-रेबीज वैक्सीन लगवानी चाहिए।

लगातार बढ़ते हमलों से नाराज नागरिक अब प्रशासन पर सवाल उठा रहे हैं। लोगों का कहना है कि शहर में आवारा कुत्तों की संख्या तेजी से बढ़ रही है, लेकिन उन्हें नियंत्रित करने के लिए कोई ठोस कदम नजर नहीं आ रहा। खासकर स्कूल जाने वाले बच्चों और अकेले बाहर निकलने वाले बुजुर्गों की सुरक्षा को लेकर लोगों में भारी डर है।

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इस बीच आवारा कुत्तों के बढ़ते हमलों को लेकर सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों की भी चर्चा तेज हो गई है। अदालत पहले ही नगर निगमों और सरकारी निकायों को निर्देश दे चुकी है कि अस्पताल, स्कूल, बस स्टैंड और अन्य सार्वजनिक स्थानों से आवारा कुत्तों को हटाकर सुरक्षित आश्रयों में भेजा जाए। साथ ही उनका स्टरलाइजेशन और वैक्सीनेशन सुनिश्चित किया जाए।

लेकिन सबसे बड़ा सवाल अब यही है कि आखिर जलगांव में कब थमेगा ‘डॉग आतंक’? और क्या प्रशासन किसी बड़े हादसे का इंतजार कर रहा है?

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