परीक्षा से पहले UPSC का बड़ा फैसला, कहीं ये बढ़ती भीड़ का खतरे का संकेत तो नहीं? नए सेंटर खुलते ही उमड़े हजारों छात्र

UPSC का बड़ा दांव या लाखों छात्रों की मजबूरी? परीक्षा से ठीक पहले हुए बदलाव ने बढ़ाई हलचल, 23 हजार अभ्यर्थियों ने बदला सेंटर

नई दिल्ली। देश की सबसे कठिन और प्रतिष्ठित परीक्षा मानी जाने वाली UPSC सिविल सेवा परीक्षा को लेकर इस बार माहौल कुछ अलग नजर आ रहा है। लाखों युवाओं की जिंदगी तय करने वाली इस परीक्षा से ठीक पहले संघ लोक सेवा आयोग ने ऐसा फैसला लिया है, जिसने अभ्यर्थियों के बीच हलचल बढ़ा दी है। आयोग ने अचानक 3 नए परीक्षा केंद्र जोड़ दिए हैं और चौंकाने वाली बात ये रही कि 23 हजार से ज्यादा उम्मीदवारों ने तुरंत इन सेंटरों को चुन लिया।

UPSC ने इस बार परीक्षा केंद्रों की संख्या 80 से बढ़ाकर 83 कर दी है। भुवनेश्वर, कानपुर और मेरठ को नए सेंटर के रूप में शामिल किया गया है। आयोग का दावा है कि इससे पुराने केंद्रों पर बढ़ते दबाव को कम किया जा सकेगा, लेकिन छात्रों के बीच इस फैसले को लेकर कई तरह की चर्चाएं भी शुरू हो गई हैं। कई अभ्यर्थी इसे बढ़ती भीड़ और सिस्टम पर बढ़ते बोझ का संकेत मान रहे हैं।

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UPSC की ओर से जारी जानकारी के मुताबिक, सबसे ज्यादा 10,656 उम्मीदवारों ने भुवनेश्वर सेंटर को चुना। इससे कटक सेंटर पर दबाव कम होने की उम्मीद है। वहीं कानपुर सेंटर को 6,938 छात्रों ने प्राथमिकता दी, जिससे लखनऊ केंद्र की भीड़ कम होगी। मेरठ सेंटर को 5,902 अभ्यर्थियों ने चुना, जिसका सबसे बड़ा फायदा पश्चिमी उत्तर प्रदेश के छात्रों को मिलेगा।

हर साल लाखों उम्मीदवार दूसरे शहरों में जाकर परीक्षा देने को मजबूर होते हैं। सफर, रहने और भारी खर्च के बीच कई छात्रों पर मानसिक दबाव भी बढ़ जाता है। ऐसे में UPSC का यह फैसला राहत की तरह जरूर देखा जा रहा है, लेकिन परीक्षा से ठीक पहले सेंटर बढ़ाने के पीछे की वजह को लेकर सवाल भी उठने लगे हैं।

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UPSC चेयरमैन अजय कुमार ने कहा कि आयोग परीक्षा प्रक्रिया को ज्यादा सुविधाजनक और छात्र हित में बनाने के लिए लगातार काम कर रहा है। उनका कहना है कि नए सेंटर जोड़ने का मकसद सिर्फ भीड़ कम करना नहीं, बल्कि उम्मीदवारों को बेहतर सुविधा देना भी है।

इस रविवार UPSC सिविल सेवा प्रारंभिक परीक्षा आयोजित होने जा रही है। हर साल लाखों युवा IAS, IPS और IFS बनने का सपना लेकर इस परीक्षा में बैठते हैं, लेकिन सफलता बेहद कम लोगों को मिलती है। इस बार आयोग को कुल 8,19,372 आवेदन प्राप्त हुए हैं। इतनी बड़ी संख्या यह दिखाती है कि सरकारी नौकरी और सिविल सेवा को लेकर युवाओं में दीवानगी किस हद तक पहुंच चुकी है।

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इस बार UPSC ने दिव्यांग अभ्यर्थियों के लिए भी विशेष इंतजाम किए हैं। आयोग के मुताबिक, जरूरतमंद उम्मीदवारों को उनकी पसंद के सेंटर देने की कोशिश की गई है। दिल्ली क्षेत्र में करीब 805 PwBD उम्मीदवारों को उनकी पसंद का परीक्षा केंद्र मिला है। जरूरत पड़ने पर अतिरिक्त सीटें भी बनाई गईं।

अब सभी की नजर इस रविवार होने वाली परीक्षा पर टिकी है। लाखों सपनों के बीच यह देखना दिलचस्प होगा कि UPSC का यह नया प्रयोग छात्रों के लिए राहत साबित होता है या आने वाले समय में और बड़े बदलावों का संकेत देने वाला है।

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