क्या है रांची की स्थिति : निकाय चुनाव में OBC आरक्षण के लिए ट्रिपल टेस्ट का काम इन 6 जिलों में पूरा

झारखंड में लंबे समय से स्थानीय निकाय का चुनाव नहीं हो सका है.दरअसल, सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के मुताबिक बिना ओबीसी आरक्षण सुनिश्चित किए स्थानीय निकाय के चुनाव नहीं कराए जा सकते.

बावजूद इसके राज्य की हेमंत सोरेन सरकार ने अपने पिछले कार्यकाल में बिना ओबीसी आरक्षण के ही पंचायत चुनाव करा लिए थे लेकिन, अब भी नगर निकाय का चुनाव लंबित है.हालांकि, अब ओबीसी आरक्षण सुनिश्चित करने के लिए ट्रिपल टेस्ट किया जा रहा है.

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इसके लिए सभी जिलों के नगर निकायों में वार्डों में बीएलओ द्वारा सर्वे का काम किया जा रहा है. राज्य पिछड़ा वर्ग आयोग के निर्देशों पर धनबाद, गुमला, लोहरदगा, सिमडेगा, लातेहार और गोड्डा में सर्वेक्षण का काम 100 फीसदी पूरा हो चुका है.

दरअसल, मंगलवार को सभी जिलों के नगर निकायों के प्रशासकों के साथ राज्य पिछड़ा आयोग ने ऑनलाइन बैठक की थी. इस बैठक में पता चला है कि कई जिलों में डोर-टू-डोर सर्वे का काम 90 फीसदी तक पूरा हो चुका है वहीं कई जिलों में यह 90 फीसदी तक भी नहीं हआ.

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ऐसे में राज्य पिछड़ा वर्ग आयोग ने इन जिलों के डीसी से कहा है कि 31 जनवरी तक हर हाल में सर्वेक्षण का काम पूरा हो जाना चाहिए.

सर्वे की रिपोर्ट क्रॉस चेक की जायेगी
रिपोर्ट्स हैं कि सर्वे की रिपोर्ट को आयोग द्वारा क्रॉस चेक किया जायेगा.

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जब आयोग आश्वस्त हो जायेगा तो झारखंड के प्रतिष्ठित संस्थानों मसलन-एक्सएलआरआई, एक्सआईएसएस या आईआईएम की मदद ली जायेगी.

जब पूरी प्रक्रिया फाइनेंशियल स्थिति की होगी तो आयोग के द्वारा आरएफपी जारी किया जायेगा. इसमें भाग लेने वाले जो भी संस्थान चयनित होंगे वही रिपोर्ट का विश्लेषण करेंगे. विश्लेषण के पश्चात फाइनल रिपोर्ट तैयार की जायेगी.अप्रैल तक यह काम पूरा कर लेना है.

समर्पित आयोग कराता है सर्वेक्षण
गौरतलब है कि पिछड़ेपन की जांच के लिए एक समर्पित आयोग का गठन किया जाता है.

आयोग की सिफारिशों के हसाब से निकाय-वार कोटा निर्धारित किया जाता है. यह सुनिश्चित किया जाता है कि एससी, एसटी और ओबीसी के लिए आरक्षित सीटों की संख्या 50 फीसदी से ज्यादा न हो.

जानकारी मिली है कि सभी जिलों में सर्वे के बाद लोगों को आपत्ति दर्ज कराने का भी मौका दिया जायेगा. इसके लिए बकायदा जिला प्रशासन विज्ञापन जारी करेगा. आम लोग अपनी शिकायत जिलास्तर पर नियुक्त किए गये शिकायत निवारण पदाधिकारी के पास दर्ज करा सकेंगे.दर्ज शिकायत निवारण के लिए एक सप्ताह का वक्त मिलेगा. फिर आयोग को रिपोर्ट सौंप दी जायेगी.

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