सिर्फ 50 दिन …: हेमंत सरकार को जल्द करनी होगी नये डीजीपी की तलाश, सिर्फ 50 दिन का है वक्त, जानिये कहां फंस गया पूर्णकालिक डीजीपी का पेंच

Only 50 days left: The Hemant government will have to quickly find a new DGP. Just 50 days are left. Find out where the full-time DGP's job is stuck.

DGP Tadasha Mishra : अनुराग गुप्ता के इस्तीफे के बाद भले ही राज्य सरकार ने तदाशा मिश्रा को प्रभारी डीजीपी बनाया हो, लेकिन हेमंत सरकार की डीजीपी की तलाश अभी भी खत्म नहीं हुई है। हेमंत सरकार को 50 दिन के भीतर दूसरे डीजीपी की तलाश करनी होगी। सुप्रीम कोर्ट के नियमों के अनुसार उनका पूर्णकालिक डीजीपी बनना लगभग असंभव माना जा रहा है, क्योंकि उनका रिटायरमेंट 31 दिसंबर 2025 को है और उनके पास छह महीने का कार्यकाल शेष नहीं है।

 

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झारखंड पुलिस सेवा के इतिहास में नया अध्याय जोड़ते हुए वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी तदाशा मिश्रा को राज्य का प्रभारी पुलिस महानिदेशक (DGP) नियुक्त किया गया है। हालांकि यह उपलब्धि जितनी ऐतिहासिक है, उतनी ही चुनौतीपूर्ण भी, क्योंकि सुप्रीम कोर्ट के दिशा-निर्देश उनकी पूर्णकालिक नियुक्ति की राह रोकते दिखाई दे रहे हैं।

 

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सुप्रीम कोर्ट की गाइडलाइन के मुताबिक, किसी को फुल-टाइम डीजीपी बनाने के लिए उसकी सेवा अवधि में कम से कम छह महीने शेष होना जरूरी है।लेकिन 1994 बैच की IPS तदाशा मिश्रा 31 दिसंबर 2025 को सेवानिवृत्त हो रही हैं। ऐसे में स्पष्ट माना जा रहा है कि हेमंत सरकार को जल्द ही नए डीजीपी की तलाश करनी होगी।

 

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दो सीनियर IPS को सुपरसीड कर बनीं प्रभारी DGP

तदाशा मिश्रा की नियुक्ति इसलिए भी चर्चा में है क्योंकि उन्हें उनके सीनियर अधिकारियों—अनिल पालटा, प्रशांत सिंह और एम.एस. भाटिया—को सुपरसीड कर प्रभारी डीजीपी बनाया गया है। इससे पुलिस महकमे के एक वर्ग में नाराजगी की हलचल भी देखी जा रही है। हालांकि करियर भर अपनी सादगी, ईमानदारी और विवादों से दूरी के लिए जानी जाने वाली मिश्रा को सिस्टम में एक साफ और मजबूत नेतृत्व के रूप में देखा जाता रहा है।

 

ईमानदार और बेदाग छवि वाली अधिकारी

ओडिशा निवासी तदाशा मिश्रा ने यूपीएससी में चयन के बाद बिहार कैडर जॉइन किया था। झारखंड के गठन के बाद वे झारखंड कैडर में आ गईं। अपने करियर में उन्होंने रांची सिटी एसपी, बोकारो एसपी, एडीजी रेल, जेल एवं आपदा प्रबंधन विभाग में विशेष सचिव जैसे अहम पदों पर उल्लेखनीय सेवाएँ दीं।पूरे करियर में उनका किसी विवाद या राजनीतिक偏ता से दूर रहना उन्हें एक नीतिपरक अफसर के रूप में स्थापित करता है।

 

नक्सल मोर्चे पर रहा सबसे यादगार काम

राज्य में नक्सल उन्मूलन में तदाशा मिश्रा की भूमिका को आज भी सराहा जाता है।

• बोकारो की पहली महिला एसपी बनने पर उन्होंने नक्सल गढ़ माने जाने वाले क्षेत्रों—झुमरा, कसमार, नावाडीह और रहावन—में लगातार सफल अभियान चलाए।• उनके कार्यकाल में एरिया कमांडर कमल महतो सहित 37 नक्सलियों ने आत्मसमर्पण किया था। बाद में वे बोकारो की पहली जोनल IG भी बनीं।

उनके नेतृत्व में कई सफल ऑपरेशनों ने नक्सली नेटवर्क को कमजोर किया और पुलिस को जनता का भरोसा दिलाया।

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