स्कूल में छात्रा को तालिबानी सजा : स्कूल लेट आने पर बच्ची को दी गयी 100 उठक-बैठक लगाने की सजा, छात्रा की हुई मौत, अभिभावकों में आक्रोश, जांच शुरू
Taliban punishment for schoolgirl: 100 sit-ups punished for arriving late, student dies, parents outraged, investigation launched

School News: स्कूल देर से पहुंचने पर बच्ची को ऐसी सजा मिली, उसकी जान ही चली गयी। घटना के बाद स्कूल में हड़कंप मचा है। वहीं मामले में अब जांच शुरू कर दी गयी है। पूरा मामला महाराष्ट्र के पालघर जिले का है। जहां से एक बेहद दर्दनाक और हैरान कर देने वाली घटना सामने आई है। कथित सजा के बाद एक 12 वर्षीय बच्ची ने मुंबई के जेजे अस्पताल में दम तोड़ दिया। यह घटना पूरे क्षेत्र में गुस्से और शोक की लहर पैदा कर चुकी है।
परिजनों का दावा है कि बच्ची को स्कूल बैग पहने हुए 100 उठक-बैठक करने की सजा दी गई, जिससे उसकी हालत बिगड़ती चली गई और कुछ ही घंटों में वह खड़े होने में भी असमर्थ हो गई। शिक्षा विभाग ने मामले की जांच शुरू कर दी है, जबकि पुलिस में अभी तक कोई आधिकारिक शिकायत दर्ज नहीं हुई है।
देर से आने पर दी गई सजा बनी जानलेवा
स्थानीय लोगों के अनुसार, घटना 8 नवंबर की है, जब स्कूल प्रबंधन ने देर से आने पर पाँच छात्रों को कठोर शारीरिक सजा दी थी। इनमें से सबसे गंभीर प्रभाव 12 वर्षीय बच्ची पर पड़ा, जिसने सजा के तुरंत बाद दर्द की शिकायत की।बच्ची की मां ने बताया—“शिक्षक ने उसे बैग पीठ पर रखकर उठक-बैठक कराई। वह दर्द से तड़प रही थी। उसे खड़े होने में भी मुश्किल हो रही थी।”
परिजनों के अनुसार, यह सजा न सिर्फ अमानवीय थी बल्कि बच्चे के स्वास्थ्य पर सीधे तौर पर घातक असर डालने वाली थी।
अस्पताल में बिगड़ती हालत और अंततः मौत
घर लौटते समय बच्ची की स्थिति और खराब होती गई। परिजनों ने उसे नालासोपारा के एक स्थानीय अस्पताल में भर्ती कराया। डॉक्टरों ने उसकी स्थिति को गंभीर बताया और बेहतर इलाज के लिए उसे मुंबई के जेजे अस्पताल में रेफर किया।
उपचार के दौरान स्थिति लगातार बिगड़ती गई और शुक्रवार देर रात बच्ची ने दम तोड़ दिया। डॉक्टरों के अनुसार, उसकी स्थिति आने के समय ही गंभीर थी।
शिक्षक ने सजा को बताया सही, मां का गंभीर आरोप
मां ने आरोप लगाया कि जब वे शिकायत लेकर स्कूल पहुंचीं, तो शिक्षक ने अपने निर्णय को सही ठहराया और कहा कि—“माता-पिता अक्सर हम पर आरोप लगाते हैं कि हम फीस लेते हैं, लेकिन बच्चों को ठीक से नहीं पढ़ाते, इसलिए अनुशासन जरूरी है।”मां का कहना है कि इतनी कठोर सजा किसी भी मानवीय मानक के खिलाफ है और इसी सजा के कारण उनकी बेटी ने जान गंवाई।
MNS की चेतावनी, अभिभावकों में आक्रोश
घटना के बाद इलाके में भारी तनाव है। अभिभावक और स्थानीय लोग स्कूल प्रबंधन पर कड़ी कार्रवाई की मांग कर रहे हैं।महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (MNS) ने भी मामले में हस्तक्षेप किया है और चेतावनी दी है—“दोषियों पर आपराधिक केस दर्ज होने तक स्कूल को खुलने नहीं दिया जाएगा।”MNS नेताओं ने स्कूल प्रबंधन पर गंभीर आरोप लगाए हैं और कहा है कि यह मामला सिर्फ लापरवाही का नहीं, बल्कि आपराधिक कृत्य का है।












