MMDR कानून पर रघुवर दास का JMM-कांग्रेस पर बड़ा हमला! बोले- गलत व्याख्या कर फैला रहे भ्रम, बंद खदानों और DMF फंड पर भी मांगा हिसाब
चाईबासा में प्रेस वार्ता के दौरान पूर्व मुख्यमंत्री ने उठाए खनिज संपदा, रोजगार और राजस्व के मुद्दे; बंद पड़ी खदानों की नीलामी और DMF राशि के इस्तेमाल का ब्योरा सार्वजनिक करने की मांग

चाईबासा। झारखंड में MMDR संशोधन कानून को लेकर सियासत तेज हो गई है। पश्चिमी सिंहभूम जिला भाजपा की ओर से रविवार को चाईबासा के कैफेटेरिया में आयोजित प्रेस वार्ता में पूर्व मुख्यमंत्री रघुवर दास ने झामुमो और कांग्रेस पर कानून की गलत व्याख्या कर जनता के बीच भ्रम फैलाने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि खनिज क्षेत्र में उत्पादन और निवेश बढ़ने से रोजगार के साथ राज्य को राजस्व भी मिल सकता है।
बंद खदानों को लेकर उठाए सवाल
रघुवर दास ने पश्चिमी सिंहभूम समेत झारखंड में लंबे समय से बंद पड़ी लौह अयस्क खदानों का मुद्दा उठाया। उन्होंने बंद खदानों की समयबद्ध नीलामी और जरूरी वैधानिक प्रक्रियाएं पूरी कर उनके संचालन की मांग की।
उनका कहना है कि खनन गतिविधियां बढ़ने से रोजगार के अवसर पैदा हो सकते हैं और राज्य को रॉयल्टी, नीलामी प्रीमियम समेत विभिन्न मदों से राजस्व प्राप्त हो सकता है।
DMF फंड पर मांगा पूरा हिसाब
पूर्व मुख्यमंत्री ने District Mineral Foundation (DMF/DMFT) की राशि के इस्तेमाल पर भी राज्य सरकार से जवाब मांगा। उन्होंने कहा कि खनन प्रभावित क्षेत्रों में पेयजल, स्वास्थ्य, शिक्षा, कौशल विकास और बुनियादी सुविधाओं के लिए इस फंड का इस्तेमाल किया जाना है।
रघुवर दास ने CAG के आंकड़ों का हवाला देते हुए दावा किया कि मार्च 2023 तक झारखंड के DMFT में 4,003.51 करोड़ रुपये जमा थे, जबकि 1,826.46 करोड़ रुपये खर्च किए गए। उन्होंने सरकार से यह बताने की मांग की कि खनन प्रभावित गांवों में इस राशि से कितने लोगों को वास्तविक लाभ मिला।
खनन और अवैध गतिविधियों पर भी उठाए सवाल
रघुवर दास ने आरोप लगाया कि वैध खनन गतिविधियों में देरी से राज्य के राजस्व और रोजगार पर असर पड़ सकता है। उन्होंने यह भी दावा किया कि ऐसी परिस्थितियां अवैध खनन के लिए अवसर पैदा कर सकती हैं। उन्होंने खनन से जुड़े मामलों और अवैध गतिविधियों की पारदर्शी जांच की मांग की।
पारदर्शी नीलामी और पर्यावरण नियमों पर जोर
पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि झारखंड की खनिज संपदा राज्य की अर्थव्यवस्था के लिए महत्वपूर्ण है। उन्होंने पारदर्शी नीलामी, समयबद्ध खनन, पर्यावरणीय नियमों के पालन और DMF राशि के प्रभावी इस्तेमाल पर जोर दिया।
उन्होंने राज्य सरकार पर भ्रष्टाचार और प्रशासनिक विफलता के आरोप भी लगाए और खनन से जुड़े मामलों में पारदर्शिता की मांग की।
सार्वजनिक बहस की पेशकश
रघुवर दास ने अपने मुख्यमंत्री कार्यकाल और मौजूदा सरकार के कार्यकाल के विकास एवं शासन से जुड़े कामकाज पर सार्वजनिक मंच पर तथ्यात्मक बहस की पेशकश की। उन्होंने कहा कि खनिज, रोजगार, राजस्व, DMF, शिक्षा और स्वास्थ्य से जुड़े आंकड़ों के आधार पर सरकार के कामकाज पर चर्चा होनी चाहिए।
वहीं, MMDR संशोधन को लेकर झामुमो पहले ही विरोध प्रदर्शन कर चुका है और पार्टी ने इसे राज्य के खनिज अधिकारों तथा राजस्व से जुड़ा मुद्दा बताया है। इस तरह कानून को लेकर भाजपा और झामुमो के बीच राजनीतिक टकराव लगातार तेज होता दिख रहा है।












