झारखंड शिक्षकों की खबर : इन शिक्षकों को मिलेगा वरीयता व प्रोन्नति का लाभ, 1 सप्ताह में मांगी गयी जिलों से रिपोर्ट, रिटायर व दिवंगत शिक्षकों के परिजनों को भी मिलेगी राहत
Jharkhand Teacher News: These teachers will receive seniority and promotion benefits, reports requested from districts within a week, and families of retired and deceased teachers will also receive relief.

Jharkhand Teacher News : झारखंड के शिक्षकों से जुड़ी एक अच्छी खबर है। सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद झारखंड के प्राथमिक शिक्षा निदेशालय ने बड़ा फैसला लिया है। अनुकंपा पर नियुक्त प्राथमिक शिक्षकों को नियुक्ति तिथि से वरीयता और प्रोन्नति का वित्तीय लाभ देने की तैयारी शुरू हो गयी है। जानकारी के मुताबिक इसमें वे शिक्षक भी शामिल होंगे जो पहले ही सेवानिवृत्त हो चुके हैं या जिनकी मृत्यु हो चुकी है। इसके लिए सभी जिलों से खर्च का आकलन मांगा गया है।
जो नियमावली तैयार हो रही है, उसके मुताबिक ऐसे शिक्षक, जो अनुकंपा के आधार पर नियुक्त हुए थे और अब सेवानिवृत्त हो चुके हैं या जिनका निधन हो चुका है, उन्हें भी नियुक्ति तिथि से वरीयता (सीनियरिटी) और प्रोन्नति से जुड़े वित्तीय लाभ दिये जायेंगे। प्राथमिक शिक्षा निदेशालय ने इस संबंध में सभी जिलों के जिला शिक्षा अधीक्षकों (डीईओ) को निर्देश दिया है कि वे एक सप्ताह के भीतर संभावित खर्च का आकलन कर रिपोर्ट प्रस्तुत करें।
दरअसल ये पूरी कवायद सर्वोच्च न्यायालय के उस महत्वपूर्ण आदेश के बाद की जा रही है, जिसमें राज्य सरकार द्वारा जारी पूर्व संकल्प के एक विवादित प्रावधान को निरस्त कर दिया गया था। आपको बता दें कि स्कूली शिक्षा एवं साक्षरता विभाग, झारखंड सरकार ने 18 जुलाई 2019 को एक संकल्प जारी किया था, जिसमें अनुकंपा के आधार पर नियुक्त अप्रशिक्षित प्राथमिक शिक्षकों को कुछ शर्तों के साथ ग्रेड-वन में वरीयता निर्धारण और अग्रेतर प्रोन्नति देने का निर्णय लिया गया था।
क्योकं बनी थी विवाद की स्थिति
इस संकल्प में एक अहम शर्त यह जोड़ी गई थी कि जो शिक्षक पहले ही सेवानिवृत्त हो चुके हैं या जिनकी मृत्यु हो चुकी है, उन्हें नियुक्ति तिथि से वरीयता और प्रोन्नति का वित्तीय लाभ नहीं मिलेगा। इस प्रावधान को लेकर शिक्षकों और उनके परिजनों में असंतोष था, जिसके बाद इसे न्यायालय में चुनौती दी गई।
मामला सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचा, जहां एक विशेष अनुमति याचिका (एसएलपी) की सुनवाई के दौरान शीर्ष अदालत ने इस प्रावधान को असंवैधानिक और भेदभावपूर्ण मानते हुए निरस्त कर दिया। सुप्रीम कोर्ट ने अपने आदेश में स्पष्ट किया कि केवल सेवानिवृत्त या दिवंगत होने के आधार पर शिक्षकों को उनके वैध अधिकारों से वंचित नहीं किया जा सकता।
अब क्या कार्रवाई हो रही है
सुप्रीम कोर्ट के इस आदेश के अनुपालन में प्राथमिक शिक्षा निदेशालय ने सभी जिलों से यह जानकारी मांगी है कि यदि सेवानिवृत्त और मृत शिक्षकों को भी नियुक्ति तिथि से वरीयता और प्रोन्नति का वित्तीय लाभ दिया जाता है, तो राज्य सरकार पर कितना अतिरिक्त वित्तीय भार पड़ेगा। निदेशालय ने जिला शिक्षा अधीक्षकों को एक सप्ताह के भीतर यह आकलन रिपोर्ट भेजने का निर्देश दिया है।
गौरतलब है कि इससे पहले भी निदेशालय द्वारा जिलों से इस संबंध में रिपोर्ट मांगी गई थी, लेकिन सभी जिलों से समय पर जानकारी प्राप्त नहीं हो सकी थी। इसी कारण अब दोबारा स्मरण पत्र जारी कर जल्द रिपोर्ट उपलब्ध कराने को कहा गया है।
शिक्षकों और परिजनों में उम्मीद
इस पहल से न केवल वर्तमान कार्यरत अनुकंपा नियुक्त शिक्षक लाभान्वित होंगे, बल्कि उन शिक्षकों के परिजनों को भी राहत मिलने की उम्मीद है, जो सेवा के दौरान या सेवानिवृत्ति के बाद इस लाभ से वंचित रह गए थे। यदि निदेशालय की प्रक्रिया पूरी होने के बाद सरकार इस पर अंतिम निर्णय लेती है, तो बड़ी संख्या में मामलों में एरियर भुगतान और पेंशन पुनर्निर्धारण की संभावना भी बन सकती है।












