खिचड़ी ही क्यों ? मकर संक्रांति पर खिचड़ी ही क्यों बनती है, चुल्हे पर तावा क्यों नहीं चढ़ता, वजह जानकर आप भी चौक जायेंगे

Why only khichdi? Why is only khichdi prepared on Makar Sankranti, and why isn't anything else cooked on the stove? You'll be surprised when you learn the reason.

Makar Sankranti : मकर संक्रांति को उत्तर भारत में खिचड़ी पर्व के रूप में मनाया जाता है। इस दिन खिचड़ी बनाना, खाना और दान करना शुभ माना जाता है। इसके पीछे धार्मिक मान्यताओं के साथ-साथ ज्योतिष, मौसम और सेहत से जुड़ी गहरी वजहें हैं।

15 जनवरी 2026 घर-घर में चावल और उड़द दाल से बनी घी से लदी खिचड़ी पकती है, तिल-गुड़ की मिठाइयां बनती हैं और दान-पुण्य किया जाता है।

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अक्सर लोगों के मन में यह सवाल उठता है कि आखिर मकर संक्रांति पर हर साल खिचड़ी ही क्यों बनती है और रोटी क्यों नहीं बनाई जाती? धार्मिक दृष्टि से देखें तो मकर संक्रांति का विशेष महत्व सूर्य देव के गोचर से जुड़ा हुआ है। इस दिन ग्रहों के राजा सूर्य अपने पुत्र शनि की राशि मकर में प्रवेश करते हैं।

ज्योतिष शास्त्र के अनुसार सूर्य और शनि के बीच स्वभाविक शत्रुता मानी जाती है, लेकिन मकर संक्रांति के दिन सूर्य देव अपने पुत्र शनि को क्षमा कर उनके घर मकर राशि में एक महीने के लिए निवास करते हैं। इसी दिन सूर्य दक्षिणायन से उत्तरायण की ओर गमन शुरू करते हैं, जिसे अत्यंत शुभ माना जाता है।

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शनिदेव को उड़द की दाल विशेष रूप से प्रिय मानी जाती है। इसलिए इस दिन उड़द की दाल और चावल से बनी खिचड़ी का भोग लगाया जाता है। मान्यता है कि खिचड़ी खाने और दान करने से शनि दोष शांत होता है, ग्रहों की अशुभता कम होती है और जीवन में स्थिरता, परिश्रम का फल तथा सुख-समृद्धि प्राप्त होती है।

ज्योतिष के अनुसार खिचड़ी केवल शनि ही नहीं, बल्कि अन्य ग्रहों को भी संतुलित करती है। इसमें मौजूद चावल चंद्रमा का प्रतीक है, हल्दी गुरु ग्रह का, हरी सब्जियां बुध ग्रह का, जबकि घी और अग्नि मंगल व सूर्य के प्रतीक माने जाते हैं। इस प्रकार खिचड़ी एक ऐसा भोजन है जो ग्रह शांति का प्रतीक बन जाता है।

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धार्मिक कारणों के साथ-साथ इसके पीछे स्वास्थ्य और मौसम से जुड़ी बड़ी वजह भी है। मकर संक्रांति के समय ठंड धीरे-धीरे कम होने लगती है और मौसम में बदलाव शुरू होता है। इस दौरान शरीर को ऐसे भोजन की जरूरत होती है जो आसानी से पच जाए, शरीर को गर्म रखे और भरपूर ऊर्जा दे।

पुराने समय में लोग मौसम के अनुसार भोजन का चयन करते थे। खिचड़ी दाल और चावल से बनी होने के कारण हल्की, पौष्टिक और पाचन के लिए बेहतर मानी जाती है।

यही वजह है कि मकर संक्रांति पर रोजमर्रा की रोटी-सब्जी की बजाय खिचड़ी को प्राथमिकता दी जाती है। रोटी तेज आंच पर तवे पर पकती है, जबकि खिचड़ी धीमी आंच पर आराम से पकाई जाती है, जिससे वह पेट के लिए हल्की होती है। कई मान्यताओं में यह भी कहा गया है कि इस दिन उबले या मंद आंच पर बने भोजन को शुभ माना जाता है।

उत्तर भारत के कई हिस्सों में मकर संक्रांति को सीधे तौर पर ‘खिचड़ी पर्व’ कहा जाता है। समय के साथ यह परंपरा इतनी मजबूत हो गई कि अब खिचड़ी इस त्योहार की पहचान बन चुकी है। स्वाद, सेहत, आस्था और ज्योतिष—चारों का संतुलन ही मकर संक्रांति पर खिचड़ी बनाने की असली वजह है।

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