झारखंड: “मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को नहीं मिलेगा वेतन, मंईयां सम्मान योजना भी हो जायेगी बंद” सासंद निशिकांत दुबे ने कहा, झारखंड सरकार के पास खुद ही पैसा नहीं…

Jharkhand: "Chief Minister Hemant Soren will not receive salary, Maiyaan Samman Yojana will also be discontinued." MP Nishikant Dubey said, "The Jharkhand government itself does not have money..."

Nishikant Dubey News : “मार्च के बाद खुद मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को ही वेतन नहीं मिल पायेगी” सांसद निशिकांत दुबे ने एक बार फिर मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन पर निशाना साधा है। देवघर एयरपोर्ट पर पत्रकारों से बातचीत करते हुए कहा कि अगर आने वाले दिनों में “मंईयां सम्मान योजना” बंद हो जाए या “अबुआ आवास योजना” के तहत निर्माण कार्य ठप हो जाएं, तो इसमें कोई हैरानी नहीं होनी चाहिए।

झारखंड सरकार द्वारा केंद्र सरकार पर लगाए जा रहे करीब 1 लाख 36 हजार करोड़ रुपये के बकाया के आरोपों को लेकर सियासत तेज हो गई है।

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भाजपा सांसद निशिकांत दुबे ने झारखंड की हेमंत सोरेन सरकार पर तीखा हमला बोलते हुए राज्य की आर्थिक स्थिति पर भी गंभीर सवाल खड़े किए हैं। देवघर एयरपोर्ट पर मीडिया से बातचीत करते हुए सांसद ने कहा कि झारखंड सरकार की हालत ऐसी है कि मार्च के बाद मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन का वेतन तक मिलने में परेशानी हो सकती है।

निशिकांत दुबे ने तंज कसते हुए कहा कि अगर आने वाले दिनों में “मंईयां सम्मान योजना” बंद हो जाए या “अबुआ आवास योजना” के तहत निर्माण कार्य ठप हो जाएं, तो इसमें कोई हैरानी नहीं होनी चाहिए।

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“पहले अपना खाना-पीना तो खा ले सरकार”
उन्होंने आरोप लगाया कि राज्य सरकार के पास विकास कार्यों के लिए धन नहीं है और वह अपनी नाकामी छिपाने के लिए केंद्र सरकार पर आरोप मढ़ रही है।सांसद ने बेहद तल्ख लहजे में कहा,“झारखंड सरकार के पास पैसा ही नहीं है। पहले वो अपना खाना-पीना तो खा ले, उसके बाद केंद्र से मांग करे।”

उन्होंने दावा किया कि राज्य सरकार की लोकप्रिय योजनाएं—खासतौर पर मंईयां सम्मान योजना—राज्य के वित्तीय संतुलन पर भारी पड़ रही हैं, जिसके कारण सड़क, पुल, शिक्षा, स्वास्थ्य और अन्य बुनियादी ढांचे से जुड़े विकास कार्य ठप पड़े हैं। सांसद के मुताबिक, सरकार बिना ठोस वित्तीय योजना के योजनाएं चला रही है, जिसका खामियाजा राज्य की जनता को भुगतना पड़ सकता है।

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केंद्र बनाम राज्य: बकाया राशि पर राजनीति
गौरतलब है कि झारखंड सरकार लगातार यह दावा कर रही है कि केंद्र सरकार पर राज्य का 1.36 लाख करोड़ रुपये से अधिक का बकाया है और आगामी केंद्रीय बजट में इसके लिए विशेष प्रावधान किया जाना चाहिए।

राज्य सरकार का कहना है कि केंद्र से राशि नहीं मिलने के कारण विकास योजनाएं प्रभावित हो रही हैं।हालांकि निशिकांत दुबे ने इन दावों को राजनीतिक दबाव बनाने की रणनीति करार देते हुए कहा कि केंद्र सरकार ने राज्यों के साथ कभी भेदभाव नहीं किया है।

यूजीसी विवाद और सुप्रीम कोर्ट पर बयान
देवघर एयरपोर्ट पर ही सांसद ने यूजीसी (UGC) से जुड़े एक मामले पर भी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह मामला फिलहाल सुप्रीम कोर्ट में विचाराधीन है और इस पर स्थगन (स्टे) भी लगा हुआ है। ऐसे में इस विषय पर राजनीति करना उचित नहीं है।

उन्होंने कहा कि संविधान के अनुच्छेद 14 और 15 देश के पिछड़े, दलित और वंचित वर्गों को समानता और सुरक्षा की गारंटी देते हैं। देश आज प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में “सबका साथ, सबका विकास और सबका विश्वास” के मूल मंत्र के साथ आगे बढ़ रहा है।

सभी वर्गों के हित में सोचती है केंद्र सरकार
निशिकांत दुबे ने यह भी कहा कि केंद्र सरकार ने आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (EWS) यानी तथाकथित स्वर्ण समाज के लिए भी आरक्षण की व्यवस्था की है, जो इस बात का प्रमाण है कि भाजपा सरकार समाज के हर वर्ग के हित में निर्णय लेती है।

उन्होंने यूजीसी मुद्दे को लेकर विरोध कर रहे लोगों से अपील की कि वे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर भरोसा रखें। साथ ही यह भी कहा कि भारतीय जनता पार्टी न्यायपालिका के हर फैसले का सम्मान करती है और सुप्रीम कोर्ट द्वारा लिया गया कोई भी निर्णय पूरी तरह मान्य और स्वीकार्य है।

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