रांची- सामूहिक आत्महत्या मामले की इनसाईड स्टोरी: कोलकाता जाने की बात कहकर पूरा परिवार घर में हो गया था कैद, चार्टर एकाउंटेंट बेटा नौकरी जाने के बाद कमरे में था बंद, जानिये क्या कहती है पड़ताल
Ranchi: Inside story of mass suicide: The entire family was confined to their home after promising to go to Kolkata. The chartered accountant son was locked in his room after losing his job. Find out what the investigation says.

रांची। राजधानी के अरगोड़ा थाना क्षेत्र के कडरू न्यू एजी कॉलोनी में सामने आई आत्महत्या की कोशिश की घटना अब सिर्फ एक हादसा नहीं, बल्कि उस मानसिक दबाव की भयावह तस्वीर बनकर उभर रही है, जो चुपचाप एक पूरे परिवार को भीतर ही भीतर तोड़ रहा था।
सोमवार को सामने आई सामूहिक आत्महत्या की खबर से जुड़ी जो जानकारी आ रही है, वो ना सिर्फ चौकाने वाली है, बल्कि बेहद भयावह है।
चार दिन तक घर में कैद दर्द
सामूहिक आत्महत्या के प्रयास में बेटे मिहिर शेखर की मौत हो गई, जबकि एडवोकेट मां स्नेहा अखोरी और बहन सौम्या की हालत गंभीर बनी हुई है।
मिहिर शेखर ने जहां अपने कमरे में फांसी लगाकर जान दे दी। वहीं, उसकी मां स्नेहा अखोरी और छोटी बहन सौम्या ने कीटनाशक का सेवन कर लिया। समय रहते सूचना मिलने पर पुलिस मौके पर पहुंची और मां-बेटी को अस्पताल पहुंचाया। हालांकि, मिहिर को बचाया नहीं जा सका। पुलिस सूत्रों के मुताबिक मौत से पहले पूरा परिवार बेहद सदमे में था।
पूरा परिवार अंदर ही अंदर घुट रहा था, आलम ये था कि शुक्रवार से लेकर सोमवार दोपहर तक स्नेहा अखोरी के घर का दरवाजा अंदर से बंद था। न कोई बाहर आया, न कोई अंदर गया। पड़ोसियों ने बताया कि आमतौर पर सुबह-शाम घर में हलचल रहती थी, लेकिन इन चार दिनों में घर पूरी तरह शांत रहा।
लाइट तक नहीं जली, जिससे किसी को शक नहीं हुआ।अब जांच में यह बात साफ हो रही है कि इसी सन्नाटे के बीच परिवार गंभीर मानसिक तनाव से गुजर रहा था।
स्नेहा अखोरी पेशे से अधिवक्ता हैं और हाईकोर्ट में प्रैक्टिस करती थीं, लेकिन बीते कुछ महीनों से वह नियमित रूप से कोर्ट नहीं जा रही थीं। स्नेहा अपने दोनों बच्चों के साथ उसी मकान में रहती थीं। इसी घर में उनके साथ रहने वाली भाभी अखोरी सुधा सिन्हा ने घटना की जानकारी पुलिस को दी।
नौकरी, उम्मीद और टूटन
मिहिर शेखर की चार्टर अकाउंटेंट की पढ़ाई पूरी होने के बाद कोलकाता में नौकरी कर रहा था। मां स्नेहा और बहन सौम्या को लगता था कि अब संघर्ष का दौर खत्म होगा।
लेकिन इसी दौरान मिहिर की मौसी की डेथ हो गयी, जिसके बाद मिहिर कोलकाता से रांची आ गया। उधर, कंपनी ने मिहिर को नौकरी से निकाल दिया। नौकरी छूटने के बाद मिहिर काफी सदमे में था।
पुलिस को मिले इनपुट के अनुसार, मिहिर खुद को असफल मानने लगा था। वह लगातार यह बात दोहराता था कि उसने परिवार की उम्मीदों को तोड़ दिया है। मां स्नेहा, जो खुद पेशे से अधिवक्ता थीं, बेटे की मानसिक स्थिति को लेकर चिंतित तो थीं, लेकिन शायद हालात की गंभीरता को भांप नहीं पाईं।
मां की चुप्पी और बेटी की मजबूरी
जांच में सामने आया है कि स्नेहा ने जानबूझकर रिश्तेदारों और पड़ोसियों से दूरी बना ली थी। उन्होंने भाभी सुधा सिन्हा को यह कहकर भ्रम में रखा कि वह बच्चों के साथ कोलकाता जा रही हैं।
सौम्या, जो महज आठवीं कक्षा की छात्रा है, ने सुधा को बताया कि मां ने उसे किसी से कुछ भी बताने से सख्त मना किया था। पुलिस को शक है कि स्नेहा को डर था कि अगर बात बाहर आई, तो मिहिर को और गहरा सदमा लग सकता है।
भाभी सुधा सिन्हा ने बताया कि स्नेहा के कमरे से अचानक आवाज आने पर उन्हें लगा कि शायद घर में चोर घुस आए हैं। सुधा ने अपने बेटे को घर के पीछे भेजा ताकि घर के अंदर कौन है पता चल सके।
लेकिन काफी देर तक दरवाजा खटखटाने के बाद सौम्या ने अचानक दरवाजा खोला, जिससे वह घबरा गईं। सौम्या की हालत बदहवास जैसी थी। उसे संभालते हुए जब सुधा घर के अंदर गईं तो वहां का दृश्य बेहद भयावह था।
मिहिर का शव जमीन पर पड़ा हुआ था, जबकि स्नेहा भी फर्श पर गिरी हुई तड़प रही थी। सुधा ने कहा कि उसके द्वारा सही समय पर दरवाजा खुलवाया जिससे स्नेहा और सौम्या की जान बच सकी।
सुधा सिन्हा ने बताया कि मिहिर के पिता कुमार संजय का कई वर्ष पहले निधन हो चुका था। वह बैंक में कार्यरत थे। पति की मौत के बाद स्नेहा ने अकेले ही दोनों बच्चों की परवरिश की थी। स्नेहा की शादी के बाद कुछ समय वह पटना स्थित ससुराल में रहीं, लेकिन बाद में रांची आकर रहने लगी थीं।
अंदर का दृश्य जिसने सबको हिला दिया
चश्मदीद सुधा सिन्हा के बयान के मुताबिक, जब उन्होंने घर के अंदर का दृश्य देखा तो वह सन्न रह गईं। मिहिर का शव जमीन पर पड़ा था, जबकि स्नेहा जहर के असर से तड़प रही थीं। सौम्या बदहवास हालत में थी।पुलिस का मानना है कि अगर कुछ देर और हो जाती, तो यह घटना और भी भयावह रूप ले सकती थी।
फिलहाल पुलिस को घटनास्थल से कोई सुसाइड नोट नहीं मिला है। अधिकारियों का कहना है कि स्नेहा और सौम्या के होश में आने के बाद ही पूरी तस्वीर साफ हो पाएगी। पुलिस यह भी जांच कर रही है कि क्या किसी तरह का आर्थिक या अन्य दबाव भी परिवार पर था।












