‘अब नहीं होगा समझौता!’ धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे पर CJP का अल्टीमेटम, 48 घंटे में फैसला नहीं तो देशभर में होगा बड़ा आंदोलन
केंद्र के साथ तीसरे दौर की वार्ता आज, दो मांगों पर बनी सहमति का दावा, लेकिन शिक्षा मंत्री के इस्तीफे पर संगठन अड़ा

नई दिल्ली। केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर CJP ने केंद्र सरकार पर दबाव और बढ़ा दिया है। संगठन ने साफ कहा है कि इस मुद्दे पर किसी भी तरह का समझौता स्वीकार नहीं होगा। CJP का कहना है कि या तो धर्मेंद्र प्रधान स्वयं इस्तीफा दें या केंद्र सरकार उन्हें मंत्रिमंडल से हटाए।
संगठन ने चेतावनी दी है कि यदि अगले 1-2 दिनों के भीतर कोई ठोस निर्णय नहीं लिया गया, तो पूरे देश में अब तक का सबसे बड़ा प्रदर्शन किया जाएगा। CJP का दावा है कि यह आंदोलन 20 जुलाई के संसद मार्च से भी अधिक व्यापक होगा।
आज तीसरे दौर की वार्ता, निगाहें फैसले पर
CJP के प्रवक्ताओं के अनुसार केंद्र सरकार के साथ अब तक हुई बातचीत सकारात्मक रही है। संगठन का दावा है कि उसकी तीन प्रमुख मांगों में से दो मांगों पर मौखिक सहमति बन चुकी है। हालांकि, धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे को लेकर अब भी अंतिम निर्णय नहीं हुआ है।
शनिवार को केंद्र सरकार और CJP के प्रतिनिधियों के बीच तीसरे दौर की वार्ता प्रस्तावित है। संगठन को उम्मीद है कि अगले एक-दो दिनों में इस विवाद का कोई समाधान निकल सकता है।
जेपी नड्डा और जितेंद्र सिंह से हुई बैठक
कांस्टीट्यूशन क्लब में केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा और जितेंद्र सिंह से CJP के प्रवक्ता सौरव दास और आशुतोष रांका ने मुलाकात की। बैठक के बाद दोनों नेता जंतर-मंतर पहुंचे और अध्यक्ष अभिजीत दीपके की मौजूदगी में प्रदर्शनकारियों को वार्ता की जानकारी दी।
इन दो मांगों पर बनी सहमति का दावा
CJP ने सरकार के सामने तीन प्रमुख मांगें रखी हैं—
- NEET परीक्षा रद्द होने के बाद आत्महत्या करने वाले 21 छात्रों के परिवारों को 1 करोड़ रुपये का मुआवजा।
- प्रदर्शनकारियों पर दर्ज सभी मुकदमे वापस लेने और भविष्य में कानूनी कार्रवाई नहीं करने की गारंटी।
- केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा।
संगठन का दावा है कि पहली दो मांगों पर केंद्र के वार्ताकार सकारात्मक हैं, लेकिन तीसरी और सबसे अहम मांग पर अभी सहमति नहीं बनी है।
‘इस्तीफे से कम कुछ मंजूर नहीं’
CJP अध्यक्ष अभिजीत दीपके ने दोहराया कि धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा संगठन की सबसे बड़ी मांग है और इससे कम पर कोई समझौता नहीं होगा। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि जल्द फैसला नहीं लिया गया तो आंदोलन को राष्ट्रीय स्तर पर और तेज किया जाएगा।









