SC के अंतरिम आदेश पर CJP का बड़ा ऐलान! अभिजीत दीपके बोले- ‘छात्रों को छेड़ा तो फिर होगा देशव्यापी आंदोलन’
सुप्रीम कोर्ट के अंतरिम आदेश पर CJP ने आपत्ति जताई है। पार्टी के संस्थापक अभिजीत दीपके ने कहा कि यदि प्रदर्शन में शामिल छात्रों को परेशान किया गया तो देशभर में बड़ा और शांतिपूर्ण आंदोलन किया जाएगा।

नई दिल्ली: कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) ने अपने आंदोलन से जुड़े मामलों में सुप्रीम कोर्ट के अंतरिम आदेश पर गंभीर आपत्ति जताई है। पार्टी का कहना है कि यदि प्रदर्शन में शामिल छात्रों और युवाओं को पुलिस द्वारा परेशान किया गया या उनके खिलाफ कार्रवाई जारी रही, तो वह जल्द ही देशभर में बड़ा और शांतिपूर्ण आंदोलन शुरू करेगी।
अभिजीत दीपके का बड़ा बयान
CJP के संस्थापक अभिजीत दीपके ने कहा कि यदि आंदोलन में शामिल युवाओं को निशाना बनाया गया, तो पार्टी एक बार फिर बड़े स्तर पर शांतिपूर्ण विरोध-प्रदर्शन करेगी। उनका आरोप है कि छात्रों के खिलाफ कार्रवाई लोकतांत्रिक अधिकारों के विपरीत होगी।
सुप्रीम कोर्ट के अंतरिम आदेश पर जताई आपत्ति
पार्टी ने सुप्रीम कोर्ट के उस अंतरिम आदेश पर सवाल उठाया है, जिसमें कहा गया है कि दिल्ली-एनसीटी और अन्य राज्यों में दर्ज FIR की जांच आगे बढ़ सकती है। CJP का कहना है कि इस आदेश का हवाला देकर विभिन्न राज्यों में प्रदर्शनकारियों के खिलाफ कार्रवाई जारी रखी जा सकती है, जिससे छात्रों और युवाओं में डर का माहौल बन सकता है।
‘सरकार ने FIR वापस लेने का भरोसा दिया था’
CJP का दावा है कि 25 जुलाई 2026 को भारत सरकार की ओर से प्रदर्शनकारियों के खिलाफ दर्ज मामलों को वापस लेने और किसी भी छात्र को प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से निशाना नहीं बनाने का आश्वासन दिया गया था। पार्टी का कहना है कि मौजूदा स्थिति उस कथित आश्वासन के विपरीत दिखाई देती है।
आपराधिक पृष्ठभूमि वालों को नहीं मिलेगी राहत
पार्टी ने यह भी कहा कि सुप्रीम कोर्ट के अंतरिम आदेश में यह स्पष्ट किया गया है कि विरोध-प्रदर्शन में शामिल छात्रों के खिलाफ कोई कठोर कार्रवाई नहीं की जाएगी, लेकिन आपराधिक पृष्ठभूमि वाले व्यक्तियों को इस संरक्षण का लाभ नहीं मिलेगा।
केंद्र और राज्य सरकारों से की यह मांग
CJP ने मांग की है कि केंद्र सरकार और संबंधित राज्य सरकारें सुप्रीम कोर्ट के समक्ष 25 जुलाई 2026 को हुए कथित आश्वासन और समझौते की पूरी जानकारी रखें, ताकि अदालत भविष्य में सभी तथ्यों पर विचार कर निर्णय ले सके। पार्टी का कहना है कि उपलब्ध जानकारी के अभाव में दिया गया यह अंतरिम आदेश स्वीकार्य नहीं है।









