सिर्फ एक पोस्ट और जिंदगी हो सकती है बर्बाद! जानिए क्या है Doxxing, भारत में कितनी मिल सकती है सजा?
बिना अनुमति किसी की निजी जानकारी सोशल मीडिया पर शेयर करना पड़ सकता है भारी। जानिए भारतीय कानून में क्या हैं प्रावधान और पीड़ित को क्या करना चाहिए।

हाल ही में जंतर-मंतर पर हुए विरोध प्रदर्शन के दौरान कुछ महिलाओं की तस्वीरें, वीडियो, मोबाइल नंबर और घर का पता कथित तौर पर सोशल मीडिया पर साझा किए जाने के बाद ‘डॉक्सिंग (Doxxing)’ एक बार फिर चर्चा में है। आरोप है कि निजी जानकारी सार्वजनिक होने के बाद कई महिलाओं को ऑनलाइन गालियां, रेप की धमकियां और जान से मारने की धमकियां मिलीं।
ऐसे में सवाल उठता है कि डॉक्सिंग आखिर है क्या, क्या यह भारत में अपराध है और इसके लिए कितनी सजा का प्रावधान है?
क्या है Doxxing?
डॉक्सिंग का मतलब है किसी व्यक्ति की निजी या संवेदनशील जानकारी उसकी अनुमति के बिना इंटरनेट या सोशल मीडिया पर सार्वजनिक करना।
इसमें शामिल हो सकते हैं—
- घर का पता
- मोबाइल नंबर
- ईमेल आईडी
- कार्यस्थल की जानकारी
- निजी तस्वीरें या वीडियो
- बैंक या वित्तीय जानकारी
- अन्य व्यक्तिगत विवरण
अक्सर ऐसा किसी व्यक्ति को डराने, बदनाम करने, धमकाने या ऑनलाइन उत्पीड़न का शिकार बनाने के उद्देश्य से किया जाता है।
क्या भारत में डॉक्सिंग के लिए अलग कानून है?
फिलहाल भारत में डॉक्सिंग को अलग से परिभाषित करने वाला कोई विशेष कानून नहीं है। हालांकि, यदि किसी मामले में निजी जानकारी का दुरुपयोग, गोपनीयता का उल्लंघन, धमकी या उत्पीड़न शामिल है, तो सूचना प्रौद्योगिकी (IT) अधिनियम, 2000 और भारतीय न्याय संहिता (BNS) की संबंधित धाराओं के तहत कार्रवाई की जा सकती है।
अपराध की प्रकृति के अनुसार दोषी को 3 साल या उससे अधिक की जेल और जुर्माना हो सकता है।
आईटी एक्ट के तहत क्या है सजा?
धारा 72A
यदि कोई व्यक्ति किसी सेवा या अनुबंध के दौरान प्राप्त निजी जानकारी को बिना अनुमति और नुकसान पहुंचाने की मंशा से सार्वजनिक करता है, तो उसे—
- 3 साल तक की जेल
- ₹5 लाख तक का जुर्माना
- या दोनों सजा हो सकती है।
धारा 66E
यदि किसी व्यक्ति की निजता का उल्लंघन करते हुए उसकी निजी तस्वीर या वीडियो बिना सहमति के साझा किए जाते हैं, तो—
- 3 साल तक की जेल
- ₹2 लाख तक का जुर्माना
- या दोनों का प्रावधान है।
धमकी देने पर भी हो सकती है कार्रवाई
यदि लीक की गई जानकारी का इस्तेमाल किसी व्यक्ति या उसके परिवार को डराने, धमकाने या ब्लैकमेल करने के लिए किया जाता है, तो भारतीय न्याय संहिता (BNS) की आपराधिक धमकी से जुड़ी धाराएं भी लागू हो सकती हैं। ऐसे मामलों में अपराध की गंभीरता के अनुसार अलग-अलग सजा का प्रावधान है।
डॉक्सिंग का शिकार होने पर क्या करें?
यदि आपकी निजी जानकारी बिना अनुमति ऑनलाइन साझा कर दी गई है, तो तुरंत ये कदम उठाएं—
- पोस्ट, मैसेज और प्रोफाइल के स्क्रीनशॉट लें।
- संबंधित URL और टाइमस्टैम्प सुरक्षित रखें।
- धमकी भरे संदेशों और अन्य डिजिटल सबूतों को सेव करें।
- संबंधित सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर कंटेंट की रिपोर्ट करें और उसे हटाने का अनुरोध करें।
- राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल पर शिकायत दर्ज करें।
- यदि मामला धमकी, उत्पीड़न या ब्लैकमेल का है, तो नजदीकी साइबर पुलिस स्टेशन या स्थानीय पुलिस में शिकायत दर्ज कराएं।
क्यों बढ़ रहा है खतरा?
सोशल मीडिया के बढ़ते उपयोग के साथ किसी की निजी जानकारी इंटरनेट पर साझा करना पहले से कहीं अधिक आसान हो गया है। ऐसी घटनाओं से पीड़ित को ऑनलाइन स्टॉकिंग, पहचान की चोरी, वित्तीय धोखाधड़ी, मानसिक उत्पीड़न और यहां तक कि शारीरिक सुरक्षा का भी खतरा हो सकता है।
निष्कर्ष
डॉक्सिंग सिर्फ ऑनलाइन शरारत नहीं, बल्कि किसी व्यक्ति की गोपनीयता और सुरक्षा पर गंभीर हमला हो सकता है। भले ही भारत में इसके लिए अलग कानून नहीं है, लेकिन मौजूदा आईटी कानून और भारतीय न्याय संहिता के तहत ऐसे मामलों में कानूनी कार्रवाई की जा सकती है। इसलिए किसी की निजी जानकारी बिना उसकी अनुमति के साझा करना गंभीर कानूनी परिणामों का कारण बन सकता है।












