हादसों का सोमवार: 4 राज्यों में मातम…भगदड़-डूबने-आग से कई जिंदगियां खत्म…हादसों ने मचाई तबाही…
Monday Tragedy: लखीसराय से उज्जैन और तारापीठ तक हादसों ने मचाई तबाही, श्रद्धालुओं की भीड़ के बीच सामने आई दर्दनाक तस्वीर

नई दिल्ली: सावन के तीसरे सोमवार को देश के कई हिस्सों से आई हादसों की खबरों ने श्रद्धालुओं और उनके परिवारों को झकझोर दिया। बिहार, मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश और पश्चिम बंगाल में अलग-अलग घटनाओं में लोगों की जान गई और बड़ी संख्या में श्रद्धालु घायल हुए। कहीं भगदड़ की स्थिति बनी, कहीं नदी में डूबने से मौत हुई तो कहीं होटल में लगी भीषण आग ने कई जिंदगियां छीन लीं।
सबसे दर्दनाक हादसा बिहार के लखीसराय स्थित अशोकधाम मंदिर में हुआ, जहां भगदड़ में सात महिला श्रद्धालुओं की मौत हो गई और 27 लोग घायल हुए। इसके अलावा बिहार में अलग-अलग जगहों पर नदी में स्नान के दौरान कई लोग बह गए। वहीं पश्चिम बंगाल के तारापीठ में होटल में लगी आग ने आठ लोगों की जान ले ली।
लखीसराय में भगदड़ से 7 महिला श्रद्धालुओं की मौत
सोमवार सुबह श्रीइंद्रदमनेश्वर महादेव मंदिर अशोकधाम के दक्षिणी द्वार और अशोकधाम स्टेशन मार्ग के बीच अचानक भीड़ का दबाव बढ़ गया। बताया गया कि सुबह करीब पौने पांच बजे मोकामा-बैद्यनाथधाम मेला स्पेशल ट्रेन से बड़ी संख्या में श्रद्धालु अशोकधाम स्टेशन पहुंचे और मंदिर की ओर जाने लगे।
इसी दौरान दृष्टिकिरण विला के पास एक जर्जर बिजली का पोल भीड़ के दबाव में गिर गया। तार से चिंगारी निकलने के बाद वहां करंट फैलने की अफवाह फैल गई। इसके बाद लोगों में अफरा-तफरी मच गई और भगदड़ की स्थिति पैदा हो गई।
कई महिलाएं भीड़ के नीचे दब गईं। हादसे में 7 महिला श्रद्धालुओं की मौत हुई, जबकि 27 लोग घायल बताए गए।
PM मोदी ने किया मुआवजे का ऐलान
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हादसे पर दुख जताते हुए मृतकों के निकटतम परिजनों को PMNRF से 2-2 लाख रुपये और घायलों को 50-50 हजार रुपये की सहायता देने की घोषणा की।
वहीं, बिहार सरकार की ओर से भी मृतकों के आश्रितों को 4-4 लाख रुपये की सहायता देने की बात सामने आई है।
उज्जैन में भी मची अफरा-तफरी
मध्य प्रदेश के उज्जैन में भी महाकाल मंदिर में दर्शन के लिए उमड़ी भीड़ के बीच अफरा-तफरी की स्थिति बन गई। नागचंद्रेश्वर मंदिर के दर्शन के लिए श्रद्धालुओं की लंबी कतार लगी थी।
इसी दौरान करंट फैलने की अफवाह के बाद लोगों में भगदड़ जैसी स्थिति बन गई। कई श्रद्धालु गिर पड़े और बैरिकेडिंग से टकराने के कारण घायल हुए।
कुल 13 घायलों को अस्पताल में भर्ती कराया गया। हालांकि उज्जैन जिला प्रशासन ने बैरिकेडिंग में करंट आने और भगदड़ होने की बात से इनकार किया है। उपचार के बाद कुछ घायलों को अस्पताल से छुट्टी भी दे दी गई।
बिहार में नदी में स्नान के दौरान कई हादसे
सावन के सोमवार पर बिहार के अलग-अलग जिलों में नदी में स्नान के दौरान भी हादसे हुए। बख्तियारपुर, कटिहार, मुजफ्फरपुर और मधुबनी में अलग-अलग घटनाओं में कुल 18 लोगों के बहने की सूचना सामने आई।
इन हादसों में 7 लोगों की मौत हुई, जबकि कुछ लोग लापता बताए गए। आठ लोगों को सुरक्षित बचा लिया गया और लापता लोगों की तलाश जारी रही।
यूपी में 5 कांवड़ियों के डूबने की खबर
उत्तर प्रदेश में भी कांवड़ यात्रा के दौरान अलग-अलग हादसे हुए। फर्रुखाबाद और कासगंज में गंगा स्नान के दौरान पांच कांवड़ियों के डूबने की खबर सामने आई।
फर्रुखाबाद में शाहजहांपुर के चार कांवड़िये गंगा स्नान के दौरान बह गए, जबकि कासगंज के लहरा गंगा घाट पर एक कांवड़िये की डूबने से मौत हो गई।
तारापीठ के होटल में आग, 8 की मौत
पश्चिम बंगाल के बीरभूम जिले में स्थित प्रसिद्ध तारापीठ मंदिर के पास एक पांच मंजिला होटल में सोमवार तड़के करीब साढ़े चार बजे आग लग गई।
होटल में ठहरे श्रद्धालुओं के बीच आग लगने के बाद अफरा-तफरी मच गई। हादसे में दो बच्चों समेत आठ लोगों की मौत हो गई। मृतकों में मेघालय के एक ही परिवार के पांच सदस्य भी शामिल बताए गए हैं।
प्रशासन के मुताबिक, करीब 28 लोगों को सुरक्षित बाहर निकाला गया। कई लोग धुएं की वजह से बीमार पड़े और कुछ लोग झुलस भी गए।
शॉर्ट सर्किट की आशंका, होटल मालिक गिरफ्तार
प्रारंभिक जांच में होटल में आग लगने की वजह शॉर्ट सर्किट बताई जा रही है। हादसे के बाद पुलिस ने होटल मालिक कल्याण पाल को गिरफ्तार कर लिया है।
अब होटल में अग्निशमन व्यवस्था, आपातकालीन निकास और सुरक्षा नियमों के पालन की जांच की जा रही है।
एक ही दिन में कई हादसों ने उठाए सुरक्षा पर सवाल
सावन के तीसरे सोमवार को धार्मिक स्थलों और नदी घाटों पर बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचे थे। लेकिन इसी दौरान अलग-अलग राज्यों में हुए हादसों ने भीड़ प्रबंधन, अफवाहों पर नियंत्रण, बिजली सुरक्षा और अग्निशमन व्यवस्था को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
लखीसराय और उज्जैन में करंट की अफवाह से जुड़ी स्थिति और तारापीठ में आग जैसी घटनाएं बताती हैं कि बड़े धार्मिक आयोजनों के दौरान सुरक्षा व्यवस्था में छोटी सी चूक भी बड़ी त्रासदी में बदल सकती है।












