अब ‘केरल’ नहीं कहलाएगा राज्य? राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने दी मंजूरी, जानें क्यों बदला गया नाम
Kerala Name Change: संसद के दोनों सदनों से पास हुआ विधेयक, संविधान की पहली अनुसूची में भी होगा बदलाव

New Delhi: केरल के नाम को लेकर बड़ा बदलाव सामने आया है। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने राज्य का नाम बदलकर ‘केरलम’ करने संबंधी विधेयक को मंजूरी दे दी है। संसद के दोनों सदनों ने पिछले सप्ताह केरल (नाम परिवर्तन) विधेयक, 2026 को पारित किया था। राष्ट्रपति की मंजूरी के बाद राज्य के नाम में आधिकारिक बदलाव का रास्ता साफ हो गया है।
इस फैसले के बाद अब सरकारी और संवैधानिक दस्तावेजों में केरल के नाम को ‘केरलम’ किए जाने की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी।
आखिर क्यों बदला गया केरल का नाम?
राज्य का नाम बदलने की मांग केरल विधानसभा की ओर से उठाई गई थी। राज्य विधानसभा ने 2024 में एक प्रस्ताव पारित कर केंद्र सरकार से संविधान के अनुच्छेद 3 के तहत राज्य का नाम बदलकर ‘केरलम’ करने के लिए आवश्यक कदम उठाने की अपील की थी।
केरल सरकार ने जून 2024 में विधानसभा से पारित यह प्रस्ताव केंद्र सरकार को भेजा था।
राज्यसभा में सरकार ने क्या कहा?
राज्यसभा में विधेयक पर चर्चा के दौरान गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय ने बताया था कि विधेयक में केरल राज्य का नाम बदलकर ‘केरलम’ करने का प्रावधान है।
सरकार के अनुसार, नाम परिवर्तन के लिए संविधान में आवश्यक संशोधन भी किए जाएंगे।
विधानसभा ने सर्वसम्मति से किया समर्थन
नाम परिवर्तन की प्रक्रिया के दौरान विधेयक को राज्य विधानसभा के पास भी भेजा गया था। राष्ट्रपति की ओर से राय जानने के लिए इसे विधानसभा के पास भेजे जाने के बाद विधानसभा ने इसका समर्थन करते हुए सर्वसम्मति से प्रस्ताव पारित किया।
इसके बाद संसद के दोनों सदनों में विधेयक पारित हुआ और अब राष्ट्रपति की मंजूरी भी मिल गई है।
संविधान की पहली अनुसूची में होगा बदलाव
संविधान के अनुच्छेद 3 के तहत किसी राज्य के नाम में बदलाव के लिए संविधान की पहली अनुसूची में संशोधन किया जाता है।
‘केरल’ का नाम बदलकर ‘केरलम’ करने के लिए भी संविधान की पहली अनुसूची में आवश्यक संशोधन का प्रावधान किया गया है। इसके अलावा नाम परिवर्तन से जुड़े अन्य कानूनी और संवैधानिक प्रावधान भी विधेयक में शामिल हैं।
अब आगे क्या?
राष्ट्रपति की मंजूरी के बाद केरल के नाम को ‘केरलम’ किए जाने की प्रक्रिया का अगला चरण आधिकारिक अधिसूचना और संबंधित संवैधानिक-कानूनी बदलावों से जुड़ा होगा।
यानी जिस नाम को लेकर 2024 में राज्य विधानसभा से आवाज उठी थी, वह अब संसद और राष्ट्रपति की मंजूरी के बाद एक बड़े संवैधानिक बदलाव का रूप ले चुका है।












