Ramgarh News: 20 दिन पहले भी फैक्ट्री में लगी थी आग… फिर भी नहीं चेते! अब टरबाइन ब्लास्ट ने ली 3 इंजीनियरों की जान, मजदूरों का फूटा गुस्सा
हेहल की स्पंज आयरन फैक्ट्री में देर रात जोरदार विस्फोट से मचा हड़कंप, तीन इंजीनियरों की मौत और एक मजदूर गंभीर घायल; हादसे के बाद सुरक्षा व्यवस्था पर उठे सवाल, मुआवजे की मांग को लेकर सड़क पर उतरे मजदूर और जनप्रतिनिधि

Ramgarh News: रामगढ़ के बरकाकाना ओपी क्षेत्र के हेहल स्थित मां छिन्नमस्तिका सीमेंट एंड इस्पात प्राइवेट लिमिटेड की स्पंज आयरन फैक्ट्री में हुए भीषण हादसे ने पूरे इलाके को हिलाकर रख दिया है। फैक्ट्री के पावर प्लांट में उत्पादन के दौरान अचानक टरबाइन में जोरदार ब्लास्ट हो गया। इस हादसे में तीन इंजीनियरों की मौत हो गई, जबकि एक मजदूर गंभीर रूप से घायल है।
हादसे के बाद सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि क्या इस जानलेवा घटना को रोका जा सकता था? क्योंकि बताया जा रहा है कि महज 20 दिन पहले भी इसी टरबाइन में आग लगी थी। इसके बावजूद कथित तौर पर मामूली मरम्मत के बाद इसे दोबारा चालू कर दिया गया।
धमाके से मची अफरा-तफरी
जानकारी के अनुसार, शुक्रवार देर रात फैक्ट्री के पावर प्लांट में रात्रि पाली के दौरान उत्पादन का काम चल रहा था। इसी दौरान अचानक टरबाइन में जोरदार विस्फोट हुआ।
धमाका इतना तेज था कि मौके पर अफरा-तफरी मच गई। हादसे में तीन इंजीनियरों की जान चली गई, जबकि एक मजदूर गंभीर रूप से घायल हो गया। घायल मजदूर को इलाज के लिए अस्पताल ले जाया गया है।
मृतकों में 50 साल के शिफ्ट इंचार्ज भी शामिल
हादसे में जान गंवाने वालों की पहचान रांची निवासी और फैक्ट्री के शिफ्ट इंचार्ज संजीव कुमार केसरी (50), बोकारो के जगेश्वर विहार निवासी विनीत महतो (25) और गढ़वा निवासी अभिषेक पांडेय (24) के रूप में हुई है।
वहीं, हादसे में घायल मजदूर की पहचान हजारीबाग निवासी तरुण रवानी के रूप में हुई है। उसकी हालत गंभीर बताई जा रही है।
20 दिन पहले लगी आग, फिर क्यों शुरू कर दिया गया उत्पादन?
इस हादसे के बाद फैक्ट्री की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर कई गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। बताया जा रहा है कि करीब 20 दिन पहले भी इसी टरबाइन में आग लगी थी।
आरोप है कि उस घटना के बाद टरबाइन की केवल हल्की-फुल्की मरम्मत कर उसे दोबारा उत्पादन के लिए चालू कर दिया गया। अगर यह दावा सही है तो सबसे बड़ा सवाल यही है कि जब टरबाइन में पहले ही आग लग चुकी थी, तो उसकी पूरी तकनीकी जांच और सुरक्षा ऑडिट क्यों नहीं कराया गया?
अब इसी सवाल को लेकर मजदूरों में भी भारी नाराजगी देखने को मिल रही है।
मजदूरों ने सुरक्षा व्यवस्था पर उठाए सवाल
हादसे के बाद मजदूरों ने फैक्ट्री में सुरक्षा इंतजामों को लेकर गंभीर आरोप लगाए हैं। मजदूरों का कहना है कि फैक्ट्री में कर्मचारियों की सुरक्षा के लिए पर्याप्त व्यवस्था नहीं है।
मजदूरों ने यह भी आरोप लगाया कि उन्हें न्यूनतम मजदूरी तक नहीं मिलती है। हादसे के बाद मजदूरों का गुस्सा खुलकर सामने आया और उन्होंने फैक्ट्री प्रबंधन के खिलाफ नाराजगी जताई।
मुआवजे की मांग को लेकर सड़क पर उतरे लोग
तीन लोगों की मौत के बाद मृतकों के परिजनों और मजदूरों में आक्रोश है। मुआवजे और अन्य मांगों को लेकर मजदूरों समेत कई राजनीतिक दलों के लोग सड़क पर उतर आए और सड़क जाम कर प्रदर्शन शुरू कर दिया।
बड़कागांव विधायक रोशन लाल चौधरी भी सड़क जाम के समर्थन में धरने पर बैठे।
मृतकों के परिजनों ने सरकार और फैक्ट्री प्रबंधन के सामने डेढ़ करोड़ रुपये मुआवजा, आश्रितों को नौकरी और बच्चों की शिक्षा की व्यवस्था करने की मांग रखी है।
अब जांच से खुलेगा हादसे का असली राज
फिलहाल इस दर्दनाक हादसे के बाद सबसे बड़ा सवाल फैक्ट्री की सुरक्षा व्यवस्था और 20 दिन पहले हुई टरबाइन की आग की घटना को लेकर है। क्या उस समय लापरवाही हुई थी? क्या टरबाइन को दोबारा चालू करने से पहले पर्याप्त तकनीकी जांच हुई थी? और आखिर उत्पादन के दौरान ऐसा क्या हुआ कि तीन लोगों की जान चली गई?
इन सवालों के जवाब जांच के बाद ही सामने आएंगे। लेकिन इतना जरूर है कि 20 दिन पहले की घटना के बाद अगर सुरक्षा मानकों को लेकर गंभीरता बरती जाती, तो आज तीन परिवारों को अपने लोगों को खोने का दर्द शायद नहीं झेलना पड़ता।












