ये कैसी व्यवस्था ? रिम्स की सालाना बजट 450 करोड़ और मरीज के लिए सिरिंज तक नहीं…..

रांची । रिम्स, झारखंड का ऐसा प्रसिद्ध अस्पताल जहां पर लोग अपने बेहतर इलाज के लिए दूर-दूर से इलाज कराने आते हैं। राज्य सरकार इस अस्पताल पर सालाना 450 करोड़ रुपए खर्च करती है। यह अस्पताल और कोई नहीं रिम्स है। जिसे राज्य के सबसे बड़े अस्पताल का दर्जा प्राप्त है । लेकिन यहां की विडंबना तो देखिए, न्यूरो सर्जरी विभाग में भर्ती मरीजों को सिरिंज उपलब्ध नहीं हो पा रहा। मरीज अपने इलाज के लिए सिरिंज बाहर से उपलब्ध करा रहे हैं। न्यूरो सर्जरी विभाग की जांच पड़ताल करने पर यह बात सामने आई कि 10ml और 5ml का सिरिंज मरीजों को नहीं मिल पा रही है।

केस स्टडी के दौरान खुलासा

रिम्स के न्यूरो सर्जरी विभाग में भर्ती गिरिडीह जिले के सरिया प्रखंड की दिनेश्वरी देवी को बिजली का झटका लगाने के बाद यहां भर्ती किया गया था। उनके पुत्र संतोष मंडल ने कहा कि शुक्रवार को अपनी मां को लेकर यहां आया हूं। ड्यूटी पर तैनात नर्स सभी को सिरिंज बाहर से खरीद कर लाने के लिए कहती है। पूछने पर कहा जाता है कि अस्पताल में सिरिंज नहीं है । इलाज कराना जरूरी है। ऐसे में बाहर के दुकान से मरीज के परिजन सिरिंज खरीदने को मजबूर हो जाते हैं।

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धनबाद जिले के कुमारधुबी से अपने बच्चे नवीश राय को रिम्स लेकर आए पिता बीरबल राय ने कहा कि 2 अगस्त से यहां भर्ती है। इतने बड़े अस्पताल में सिरिंज तक नहीं मिल रहा है । इसी बात से अंदाजा लगाया जा सकता है कि यहां की व्यवस्था कैसी होगी।

ऐसी ही परेशानियों की शिकार साहिबगंज जिले के सद्दाम भी हैं। सिर में चोट लगने के बाद उन्हें रिम्स के न्यूरोसर्जरी विभाग में भर्ती किया गया है। अस्पताल में सिरिंज नहीं मिलने के कारण उन्हें बाहर से फिर लाना पड़ रहा है। 60 वर्षीय कुंजल राम राजमिस्त्री का काम करते हैं। काम के दौरान ही वह गिर पड़े और कमर में चोट लग गई। परिजन बेहतर इलाज के लिए रिम्स लेकर आए हैं। इन्हें भी बाहर से खरीद कर लगाना पड़ रहा है।

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क्या कहते हैं रिम्स के पदाधिकारी।

अस्पताल में सिरिंज की कमी के बावजूद जनसंपर्क पदाधिकारी डॉ राजीव कुमार ने सफाई देते हुए कहा कि चिकित्सा पदाधिकारी के अनुसार रिम्स के स्टाफ में पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध है। मांग के अनुसार विभागों को सिरिंज दी जाती है। लेकिन सवाल यह है कि आखिर रिम्स के न्यूरो सर्जरी विभाग में सिरिंज क्यों नहीं पहुंच पा रहा।

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