15 से 70 लाख तक की कथित रेट लिस्ट! झारखंड में सरकारी नौकरी के नाम पर कौन चला रहा था खेल?पूरी रेट लिस्ट

रांची: झारखंड में प्रतियोगी परीक्षाओं को लेकर चल रहे विवाद के बीच जांच एजेंसियों के सामने कथित तौर पर एक ऐसी रेट लिस्ट का जिक्र आया है, जिसने पूरे मामले को और गंभीर बना दिया है। पेपर लीक मामले में गिरफ्तार अभय तिवारी से पूछताछ के दौरान JPSC और अन्य सरकारी पदों के लिए लाखों रुपये की कथित डील से जुड़े दावे सामने आने की बात कही जा रही है।
बताया जा रहा है कि अभय के कथित बयान के अनुसार JPSC मुख्य परीक्षा में एक अभ्यर्थी के लिए 70 लाख रुपये तक की डील तय होने की बात सामने आई। वहीं, फॉरेस्ट रेंज ऑफिसर (FRO) और असिस्टेंट कंजर्वेटर ऑफ फॉरेस्ट (ACF) जैसे पदों के लिए भी लाखों रुपये की कथित रकम का जिक्र किया गया है।
हालांकि, ये सभी जांच में सामने आए आरोप और कथित बयान हैं। इनकी स्वतंत्र और आधिकारिक पुष्टि होना अभी बाकी है।
कथित रेट लिस्ट में कौन सा पद कितने का?
पूछताछ में सामने आए दावों के मुताबिक अलग-अलग पदों के लिए कथित तौर पर अलग-अलग रकम तय होने की बात कही गई है।
- JPSC मुख्य परीक्षा: 70 लाख रुपये तक
- FRO: 20-25 लाख रुपये
- ACF: 30-35 लाख रुपये
- JPSC इंटरव्यू: प्रति अभ्यर्थी करीब 15 लाख रुपये तक
इन दावों ने जांच का दायरा काफी बढ़ा दिया है। अब CID यह पता लगाने में जुटी है कि कथित तौर पर इतनी बड़ी रकम का नेटवर्क कैसे काम कर रहा था और इसमें कौन-कौन लोग शामिल थे।
टोकन मनी के तौर पर मिले 1 करोड़?
पूछताछ के दौरान अभय तिवारी के बारे में यह दावा भी सामने आया कि परीक्षा से पहले अभ्यर्थियों से कथित तौर पर टोकन मनी ली जाती थी। रिपोर्ट के मुताबिक, अभय ने पूछताछ में करीब 1 करोड़ रुपये टोकन मनी के रूप में मिलने की बात कही है।
CID ने कथित बयान को जांच की एक कड़ी मानते हुए पैसों के लेन-देन और उससे जुड़े लोगों की भूमिका की पड़ताल आगे बढ़ाई है।
आखिर CID के रडार पर कैसे आया अभय?
अभय तिवारी का नाम जांच में तब प्रमुखता से सामने आया, जब प्रतियोगी परीक्षाओं में उसकी सफलता को लेकर सवाल उठे। बताया गया कि उसने SSC CGL में रैंक-2 हासिल की थी। वह TDPL में मार्केटिंग मैनेजर के तौर पर काम करता था और इसी कंपनी का नाम JPSC से जुड़े परीक्षा कार्यों में सामने आया।
जांच के दौरान CID ने उसके ठिकाने पर छापेमारी की, जहां से करीब 5 लाख रुपये नकद बरामद होने की बात कही गई। इसके बाद उसे गिरफ्तार कर पूछताछ शुरू की गई।
पूछताछ बढ़ने के साथ जांच उसके संपर्कों और कथित सहयोगियों तक पहुंची। अरविंद कुमार और JPSC कर्मचारी सोनू कुमार समेत अन्य लोगों की भूमिका भी जांच के दायरे में आने की बात कही गई है।
होटल से लेकर बैंक खातों तक खंगाले जा रहे सबूत
जांच में रांची के स्टेशन रोड स्थित एक होटल का कनेक्शन भी सामने आने की बात कही गई है। बताया गया कि अभय ने इस होटल को 11 महीने के लिए लीज पर लिया था।
अब CID होटल के रजिस्टर, बिल और वहां आने-जाने वाले लोगों की जानकारी खंगाल रही है। इसके अलावा अभय और उसके करीबियों के बैंक खातों और वित्तीय लेन-देन की भी जांच की जा रही है।
JSSC CGL का प्रश्नपत्र परीक्षा से पहले मिलने के अभय के कथित दावे की बात भी सामने आई है, हालांकि इस दावे की स्वतंत्र और आधिकारिक पुष्टि अभी बाकी है।
JPSC से जुड़े कथित लेन-देन ने बढ़ाई हलचल
जांच का एक सिरा JPSC और TDPL के कथित कनेक्शन तक पहुंचा। आरोपों के मुताबिक, TDPL को JPSC का काम दिलाने के लिए कथित तौर पर 2 करोड़ रुपये के लेन-देन की बात सामने आई।
यह फिलहाल जांच में सामने आया आरोप है, स्थापित तथ्य नहीं। इसी मामले में तत्कालीन JPSC अध्यक्ष एल. खियांग्ते पर गंभीर आरोप लगे और बाद में उन्हें गिरफ्तार किए जाने की बात सामने आई।
सिर्फ इंटरव्यू में कथित सेटिंग के लिए 15 लाख?
जांच में JPSC इंटरव्यू में कथित सेटिंग का एंगल भी सामने आने की बात कही जा रही है। रिपोर्टों के मुताबिक, कुछ अभ्यर्थियों से इंटरव्यू में कथित मदद के लिए प्रति उम्मीदवार 15 लाख रुपये तक लिए जाने का दावा सामने आया।
मामले की जांच आगे बढ़ी तो CDPO परीक्षा को लेकर भी अभ्यर्थियों से कथित तौर पर लाखों रुपये लेने के आरोपों की पड़ताल शुरू हुई।
FRO और ACF को लेकर सबसे बड़ा दावा
जांच में सबसे ज्यादा चर्चा FRO और ACF पदों को लेकर सामने आए कथित रकम के दावों की हो रही है। रिपोर्ट के मुताबिक, FRO पद के लिए 20-25 लाख रुपये और ACF के लिए 30-35 लाख रुपये तक की कथित रकम का जिक्र किया गया।
रिपोर्ट में 12 FRO और 8 ACF यानी कुल 20 अभ्यर्थियों से जुड़े कथित नेटवर्क की बात कही गई है। इनमें 19 के सफल होने का दावा भी किया गया है।
इसी कथित नेटवर्क में करीब 5.80 करोड़ रुपये की वसूली और अभय द्वारा लगभग 1 करोड़ रुपये अपने पास रखने की बात रिपोर्ट में कही गई है। इन दावों की जांच और स्वतंत्र पुष्टि अभी महत्वपूर्ण है।
अब सबसे बड़ा सवाल- क्या अभय अकेला था?
CID के सामने अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या अभय तिवारी अकेले इस कथित नेटवर्क को संचालित कर रहा था या उसके पीछे परीक्षा एजेंसी, बिचौलियों और आयोग से जुड़े लोगों का बड़ा नेटवर्क था?
जांच फिलहाल अभ्यर्थियों, परीक्षा एजेंसी और आयोग से जुड़े लोगों के बीच कथित कनेक्शन को जोड़ने की कोशिश कर रही है। बैंक ट्रेल, डिजिटल डेटा, कॉल रिकॉर्ड, परीक्षा रिकॉर्ड और दस्तावेजों से अगर आरोपों की पुष्टि होती है, तो मामला काफी बड़ा रूप ले सकता है।
CM हेमंत सोरेन ने यूपी कनेक्शन का भी किया जिक्र
12 अगस्त को मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने भी मामले को लेकर बयान दिया। उन्होंने कथित तौर पर कहा कि यूपी की कंपनी थी, जिसने यहां पर लूट मचाई और एक को भी नहीं छोड़ा जाएगा।
मुख्यमंत्री के निशाने पर TDPL कंपनी है, जिसका मुख्यालय लखनऊ में बताया गया है। वर्ष 2010 में स्थापित इस कंपनी के पास परीक्षा कराने का ठेका होने की बात सामने आई है।
अब जांच की दिशा इस सवाल पर भी टिकी है कि क्या कथित परीक्षा सिंडिकेट की जड़ें सिर्फ झारखंड तक थीं या इसके तार दूसरे राज्यों तक भी जुड़े हुए हैं? CID की जांच और सामने आने वाले वित्तीय व डिजिटल सबूत ही इस पूरे मामले की तस्वीर साफ करेंगे।












