संघर्ष, मेहनत और जुनून की मिसाल बने अर्जुन राजपूत, कुलचे की रेहड़ी से टीम इंडिया तक, छोले-कुलचे बेचने वाले के बेटे ने पहनी नीली जर्सी, अंडर-19 टीम में हुआ चयन

जालंधर। सपने बड़े हों और उन्हें पूरा करने का जुनून हो, तो गरीबी भी रास्ता नहीं रोक सकती। पंजाब के जालंधर में छोले-कुलचे की रेहड़ी लगाने वाले एक पिता के बेटे ने अपनी मेहनत और लगन के दम पर ऐसा मुकाम हासिल किया है, जिस पर पूरा शहर गर्व कर रहा है। राम नगर निवासी अर्जुन राजपूत का चयन भारतीय अंडर-19 क्रिकेट टीम में हुआ है और अब वह अगले महीने श्रीलंका दौरे पर देश की नीली जर्सी पहनकर मैदान में उतरेंगे।

अर्जुन की सफलता की कहानी संघर्ष और समर्पण की मिसाल है। उनके पिता होती राम वर्षों से डीएवी कॉलेज के बाहर छोले-कुलचे की रेहड़ी लगाकर परिवार का पालन-पोषण कर रहे हैं। सीमित संसाधनों के बावजूद उन्होंने बेटे के क्रिकेटर बनने के सपने को कभी टूटने नहीं दिया।

लेफ्ट हैंड बल्लेबाज और राइट आर्म ऑफ स्पिनर अर्जुन ने क्रिकेट की शुरुआती ट्रेनिंग हरभजन सिंह क्रिकेट अकादमी में ली। कोच विक्रम सिद्धू के मार्गदर्शन में उन्होंने अपने खेल को निखारा और लगातार मेहनत करते हुए राष्ट्रीय स्तर तक का सफर तय किया।

भारतीय अंडर-19 टीम में चयन के बाद अर्जुन ने कहा कि उन्होंने 8-9 साल की उम्र में क्रिकेट खेलना शुरू किया था। इस उपलब्धि से वह बेहद खुश हैं और श्रीलंका दौरे पर भारत का प्रतिनिधित्व करने के लिए उत्साहित हैं। उन्होंने कहा कि उनकी कोशिश रहेगी कि टीम शानदार प्रदर्शन करे और ट्रॉफी जीतकर देश लौटे।

अर्जुन ने अपनी सफलता का श्रेय माता-पिता और परिवार को दिया। उन्होंने कहा कि जब भी वह निराश होते थे, परिवार उनका हौसला बढ़ाता था। अर्जुन ने भावुक होकर कहा कि उनके पिता ने उनके सपनों को पूरा करने के लिए कड़ी मेहनत की है और अब उनकी बारी है कि वह अपने पिता के सपनों को पूरा करें।

उन्होंने मुस्कुराते हुए कहा कि अब वह अपने पिता से कहते हैं कि कुलचे बनाना छोड़ दीजिए, क्योंकि हालात पहले जैसे नहीं रहे। उनका सपना है कि वह अपने परिवार को बेहतर जीवन दें और देश के लिए खेलते हुए नई ऊंचाइयों को छुएं।

बेटे के चयन पर पिता होती राम भी भावुक नजर आए। उन्होंने कहा कि अर्जुन बचपन से ही क्रिकेट के प्रति समर्पित था और उसने दिन-रात मेहनत की। भारतीय अंडर-19 टीम में चयन की खबर सुनकर उनकी खुशी का ठिकाना नहीं रहा।

वहीं अर्जुन की मां नन्ही देवी ने इसे परिवार के लिए गर्व का क्षण बताया। बहन किरण राजपूत ने कहा कि भाई ने वर्षों तक लगातार मेहनत की और आज उसका सपना सच हो गया। अब पूरा परिवार उसे टीम इंडिया की नीली जर्सी में खेलते देखने के लिए उत्साहित है।

अर्जुन राजपूत की यह कहानी उन लाखों युवाओं के लिए प्रेरणा है, जो सीमित संसाधनों के बावजूद बड़े सपने देखते हैं। यह साबित करती है कि मेहनत, लगन और परिवार का साथ हो तो किसी भी मंजिल को हासिल किया जा सकता है।

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